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'मुन्ना भाई' की रैलियों में ख़ासी भीड़.. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
"संजय दत्त ज़िंदाबाद" के नारों से गूँजते वातावरण में एक-दूसरे को धक्के लगाते युवा इस बॉलीवुड स्टार की एक झलक पाने को बेक़रार हैं. कुछ बेताब प्रशंसक संजय की एक लोकप्रिय फ़िल्म को याद करते हुए, मुन्ना भाई ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं. समाजवादी पार्टी का स्टार प्रचारक बना यह अभिनेता आजकल उत्तर प्रदेश में लोगों का मुस्कुरा कर और हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहा है जो उस पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर रहे हैं. यहाँ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संजय दत्त पार्टी प्रत्याशी नफ़ीसा अली का प्रचार कर रहे हैं. प्रतिबंध इससे पहले इस क्षेत्र के प्रत्याशी वे स्वयं थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी. संजय दत्त को 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के संबंध में आर्म्स एक्ट के तहत छह साल की सज़ा हुई थी. भारतीय क़ानून के अनुसार दो साल या इससे ज़्यादा समय की सज़ा पाए हुए व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है. लाल और हरे रंग के झंडे लिए पार्टी समर्थकों की भीड़ उनके चारों ओर नज़र आती है.
इनमें से बहुत से लोग पार्टी के रंग के स्कार्फ़ पहन कर आते हैं जबकि कुछ इन रंगों की टोपी पहनते हैं. दूसरे बहुत से लोग पार्टी के चुनाव चिह्न साइकिल का बैज लगाए हुए हैं. मुन्नाभाई का जादू जैसे ही संजय दत्त माइक के पास पहुँचते हैं, भीड़ की आवाज़ आती है - 'लगे रहो मुन्नाभाई,' जो संजय दत्ता की ही एक फ़िल्म का नाम है. वे कहते हैं, "मेरे भाइयो, यहाँ आप लोग ही मेरा परिवार हैं. मैं वायदा करता हूँ कि मैं अब लखनऊ को नहीं छोडूँगा. मैं अपनी बहन नफ़ीसा अली को आपके हाथों में सौंप रहा हूँ. लेकिन ऐसा नहीं है कि मै छोड़ रहा हूँ. मैं भी यहीँ रहूँगा. हम मिलकर हाथी (बसपा का चुनाव चिह्न) को पछाड़ देंगे." उनके हर शब्द को भीड़ दोहरा रही थी और हर मिनट के साथ तालियों की गड़गड़ाहट और तेज़ होती जाती है. यह एक संक्षिप्त सा भाषण था और लग रहा था कि उनके प्रशंसकों को ज़्यादा कुछ सुनाई ही नहीं दिया. लखनऊ के निवासी मनोज राजपूत ने कहा, "संजय दत्त हमारे साथ हैं. वे प्रत्याशी हैं या नहीं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. अब हमें जीतने से कोई नहीं रोक सकता. हम आसानी से जीत जाएँगे. संजय कुमार गाज़ीपुर से सिर्फ़ संजय दत्त की झलक पाने के लिए ही आए हैं. वे कहते हैं, "अगर वह गाज़ीपुर से चुनाव लड़ते तो मैं निश्चित रूप से उन्हें ही वोट देता." अगले दिन, हमने संजय को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पाया. सर्वाधिक माँग संजय दत्त समाजवादी पार्टी के सबसे लोकप्रिय और सर्वाधिक माँग वाले प्रचारक बन गए हैं. जब हम उनसे मिले तो गोरखपुर उस दिन के उनके प्रचार अभियान का चौथा पड़ाव था.
इस बार उनके साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और दो मंत्री भी उनके साथ थे. स्टील मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि उनके बीच इस अभिनेता के होने से उनके 'धर्मनिरपेक्षता के उद्देश्य को मज़बूती' मिलेगी. यहाँ संजय दत्त ने भीड़ को बताया कि वे राजनीति में लोगों को चेतावनी देने आए हैं -"मैंने जो कुछ झेला हैं, वह किसी और को न झेलना पड़े." उन्होंने कहा, "मेरे पिता 18 साल तक सांसद रहे हैं लेकिन मुझे टाडा के तहत ग़िरफ़्तार कर जेल में डाल दिया गया. पुलिस ने मुझे मारा, पीटा. अगर मेरे साथ यह सब हो सकता है तो क्या आपके साथ नहीं हो सकता?" अपील इसके साथ ही लोगों के सिर सहानुभूति के साथ हामी में हिले. उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी किसानों, मुस्लिमों और युवाओं का प्रतिनिधित्व करती है. मैं भी उनके अधिकारों के लिए काम करना चाहता हूँ. इसलिए मैं आप सभी से समाजवादी पार्टी को वोट देने की अपील करता हूँ." उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट और शोर बढ़ाने के लिए कहा, "यह साइकिल दिल्ली को जीत लेगी." संजय दत्त ने कहा कि उन्हें बहुत अच्छे भाषण देने नहीं आते. लेकिन इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी सभाओं ने ही तालियों की सबसे ऊँची गूँज को बटोरा है. |
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