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मंगलवार, 14 अप्रैल, 2009 को 08:41 GMT तक के समाचार
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'उत्तर भारतीय की पिटाई ने मजबूर किया'

मनोज तिवारी
मनोज तिवारी के अनुसार वो गोरुखपुर के विकास के लिए काम करेंगे

पिछले साल जब मुंबई में उत्तर भारतीयों के साथ मार-पीट की ख़बरें आ रही थीं तब जाने-माने भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी ने मन बनाया कि राजनीति में प्रवेश किया जाए.

उत्तर भारत से संबंध रखने वाले मनोज तिवारी का कहना है, "मैंने उसी घटना के बाद राजनीति में आने का फ़ैसला किया." गायक से सफल अदाकार बने तिवारी समाजवादी पार्टी की टिकट पर उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

मुंबई में उत्तर भारतीयों की पिटाई की घटना उस समय घटी जब महाराष्ट्र की एक हिंदू मराठा राष्ट्रवादी पार्टी के नेता राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि उत्तर भारतीय प्रवासियों ने मुंबई में मराठियों की नौकरियाँ छीन ली हैं. इसके बाद मुंबई में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को निशाना बनाते हुए हिंसक घटनाएँ भी हुईं.

 मैं अपने मौजूदा सांसद से पूछना चाहता हूँ, जब आपके युवाओं को महाराष्ट्र में पीटा जा रहा था तो आप कहाँ थे? आप कहते हो कि आप हिंदुओं के बारे में बोलते हो, लेकिन उस समय आप कहाँ थे जब हम हिंदू महाराष्ट्र में हिंदुओं से पिट रहे थे?
मनोज तिवारी

'आंखें खोलने वाली घटना'

मनोज तिवारी का कहना है, "मुंबई में उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ हिंसा ने मेरी आंखें खोल दीं."

तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत भोजपूरी गायक के रुप में की, पर अब वे भोजपूरी फ़ल्मों के लोकप्रिय अदाकार हैं. उनकी पहली फ़िल्म वर्ष 2004 में आई थी और अब तक 51 फ़िल्में आ चुकीं हैं और चार फ़िल्में जल्द ही आने वाली हैं.

तिवारी की फ़िल्मों का प्रसार भारत सहित मॉरीशस, फिजी, सुरीनाम और वेस्ट इंडीज़ जैसे देशों तक है. उनका लोकप्रिय वेबसाइट भोजपुरी डॉटकॉम ने उन्हें 'गोरखपुर का ओबामा' बना दिया है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह उन्होंने भी 'बदलाव' का वादा किया है.

जब हम उनसे मिलने पहुँचे तो गोरखपुर में दोहपर की चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे हज़ारों लोग उनको सुनने के लिए जमा थे.

मनोड तिवारी
मनोज तिवारी ने 50 से अधिक भोजपूरी फ़िल्मों में काम किया है

सर पर पगड़ी और लंबा कुर्ता-पाजामा पहने जब तिवारी मंच पर विराजमान हुए तो भीड़ ने ज़ोरदार तालियों से स्वागत किया.

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच लोगों से उनका कहना था, " मैं अपने मौजूदा सांसद से पूछना चाहता हूँ - जब आप के युवाओं को महाराष्ट्र में पीटा जा रहा था तो आप कहां थे? आप कहते हो कि आप हिंदूओं के बारे में बोलते है, लेकिन उस समय आप कहाँ थे."

तिवारी ने भीड़ से पूछा, "क्यों हम लोगों को नौकरी के लिए मुंबई और दूसरे शहरों में जाना पड़ता है? क्यों हम लोगों को बाहर जाना पड़ता है?"

उनका कहना था, "पिछले पंद्रह साल से हम लोग भारतीय जनता पार्टी को वोट दे रहे हैं, लेकिन चीनी मीलें और खाद की फ़ैक्टरियाँ बंद हो गई हैं. इस इलाक़े पर माफ़िया का कब्ज़ा है."

गोरखपुर में न केवल क़ानून व्यवस्था की स्थिति काफ़ी ख़राब है बल्कि हर साल सैंकड़ों लोग दिमाग़ी बुख़ार का शिकार भी बन रहे हैं.

विकास का वादा

शूटिंग मुंबई में होती है और पोस्ट-प्रवोडक्शन भी, इसलिए सारा राजस्व मुंबई को जाता है. इससे इस इलाक़े के लोगों को फ़ायदा नहीं पहुंचता है. मैं इसी इलाक़े में फ़िल्में बनाकर और फ़िल्म सिटी बसाकर बेरोज़गारी की समस्या को हल करने की कोशिश करुँगा
मनोज तिवारी

उन्होंने लोगों से कहा है कि अगर वो जीतते हैं तो इलाक़े के विकास के लिए काम करेंगे.

उनका कहना था, "मैं एक अभिनेता हूँ, मैं मुंबई में रहता और काम करता हूँ. शूटिंग मुंबई में होती है और पोस्ट-प्रवोडक्शन भी, इसलिए सारा राजस्व मुंबई को जाता है. इससे इस इलाक़े के लोगों को फ़ायदा नहीं पहुंचता है. मैं इसी इलाक़े में फ़िल्में बनाकर और फ़िल्म सिटी बसाकर बेरोज़गारी की समस्या को हल करने की कोशिश करुँगा."

तिवारी के अनुसार अकसर लोग कहते हैं कि राजनीति बुरा क्षेत्र है और भले लोगों के लिए नहीं है. उन्होंने लोगों से वादा किया कि अगर वो जीतते हैं तो साल में केवल तीन फ़िल्में बनाएंगे.

बहरहाल गोरखपुर की लड़ाई उनके लिए आसान नहीं होगी. क्योंकि उन्होंने मौजूदा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता योगी आदित्यनाथ और बहुजन समाज पार्टी के विनय शंकर के ख़िलाफ़ मोर्चा संभाला है.

लेकिन मनोज का कहना है कि उनको जनता पर विश्वास है. वे कहते हैं, "जनता जानती है कि मैं कौन हूँ, मैं क्या सोच रहा हूँ, मैं कहां से आया हूँ, मैं सत्ता का भूखा नहीं हूँ."

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