|
नेतागिरी का अनूठा स्कूल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में चुनावों का समय है. आप को ये जानकर अचरज ज़रूर होगा लेकिन ये हकीकत है कि राजनीति में उतरने की अभिलाषा रखने वाले अनेक छात्र रांची में नेतागिरी के एक विशेष स्कूल की तरफ़ बढ़ रहे हैं. ये अनूठा नेतागिरी स्कूल 26 अप्रैल 2001 में रांची में स्थापित किया गया, जहाँ पहली बार 26 छात्रों ने दाख़िला लिया था. आज इस स्कूल में 200 से अधिक पंजीकृत छात्र हैं, जो हर शनिवार को दोपहर बाद अध्ययन के लिए पहुँचते हैं. जब से चुनाव की तारीख़ की घोषणा हुई है तब से राजनीतिक महत्वकांक्षा रखने वाले छात्र राजनीति के गुर सिखने की कोशिश में जुट गए हैं. इस नेतागिरी स्कूल ने अनेक राज्य, ज़िला और गांव स्तर के नेता पैदा किए हैं. ये स्कूल चलता है राज रंजन के घर पर, जहाँ एक अंडाकार हॉल में पढ़ाई चलती है. राज रंजन के पिता और भाई कांग्रेसी नेता रह चुके हैं. 'राजनीतिक विरासत' राज रंजन कहते हैं कि उन्होंने ये स्कूल अपने भाई ज्ञान रंजन के मरने के बाद स्थापित किया ताकि पारिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाया जा सके. उन्होंने बीबीसी को बताया, "आम लोगों की ख़ुद से जुड़े मुद्दों के प्रति अज्ञानता के कारण मैं इस स्कूल को शुरू करने के लिए विवश हुआ." उनका कहना था, "मैंने स्कूल इसलिए शुरू किया ताकि समाज को देश की राजनीतिक स्थिति के बारे में अवगत कराया जा सके. इस शिक्षा के ज़रिए भविष्य के राजनीतिक नेता समाज और देश की बेहतर सेवा कर सकते हैं." प्रत्येक शनिवार को दो घंटे की कक्षा होती है और पूरा कोर्स तीन महीने तक चलता है. इस दौरान राजनीतिशास्त्र, समाजिक मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की पढ़ाई की जाती हैं. कोर्स की अवधि तीन महीने है.
हर छात्र को पंजीकरण की राशि मात्र 50 रुपए देनी पड़ती है. राज रंजन कहते हैं, "दाख़िले की कोई आयु सीमा नहीं है लेकिन निश्चित तौर पर छात्रों की उम्र 18 साल से ऊपर होनी चाहिए - जो भारत में मतदान करने की न्यूनतम आयु है." हर उम्र के छात्र स्कूल में इस समय 21 से 70 वर्ष की आयु के छात्र हैं. सबसे नवयुवक एक स्थानीय आदिवासी 21 वर्षीय लिलेंद्र मुंडा हैं जबकि 70 वर्षीय सुखदेव लोहरा सबसे अधिक उम्र वाले छात्र हैं. मुंडा दो साल से हर रोज़ 40 किलोमीटर साइकिल चलाकर नेतागिरी स्कूल में इसलिए पढ़ने आ रहें ताकि एक दिन वो रांची के नज़दीक बु्रमु का प्रतिनिधित्व कर सकें. मुंडा ने बीबीसी को बताया, "मैंने यहां अपने स्कूल से अधिक सीखा है. यहाँ मैंने समाज के विकास, सरकार की तरफ़ से चलाए जा रही समाज कल्याण की योजनाओं के अलावा लोगों को राजनैतिक रूप से सक्रिय बनाने के बारे में सीखा है." सुखदेव लोहरा का कहना है, "राजनीतिक सीख लेने के अलावा, इस नेतागिरी स्कूल में जीवन के बार में भी सीखा है." वे राजनीति में सक्रिय हैं और चुनाव के मैदान में भी उतरे थे लेकिन कामयाब नहीं हो पाए. एक अन्य छात्र, साठ वर्षीय मुर्तज़ा अंसारी उस समय से आ रहे हैं जब से ये स्कूल शुरू हुआ है. अंसारी कहते हैं, "मैंने मदरसे में पढ़ाई की थी, लेकिन यहां मेरी ज़िंदगी को दिशा मिली है. अब मैं एक ट्रस्ट के ज़रिए ग़रीबों के लिए काम करता हूँ, जिसे मैंने कुछ समय पहले शुरू किया था." वो भी एक दिन राज्य के विधानसभा का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं. इस स्कूल के खाते में कुछ जान-पहचाने नेताओं का भी नाम है, जिनमें कांग्रेस पार्टी के नेता पीएन सिंह और अजय राय शामिल हैं. अजय राय इसी स्कूल में पढ़े और बाद में स्थानीय मज़दूर संघ के अध्यक्ष बने. स्कूल में करीब 20 महिलाएं भी सियासत को समझने के लिए आती हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें 'ग़रीब देशों पर मंदी की मार शुरु'04 मार्च, 2009 | कारोबार 'ग़रीब देशों के लिए विशेष कदम ज़रूरी'25 अक्तूबर, 2008 | कारोबार वैकल्पिक सरकार की ज़रूरत है: कारत16 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस सीटों के बँटवारे पर राजनीति गर्माई07 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस कांग्रेस-तृणमूल के बीच हुआ गठबंधन02 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस लोक सभा चुनाव पाँच चरणों में होंगे02 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस 'अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव से ज़्यादा ख़र्च'01 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||