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कांग्रेस-तृणमूल के बीच हुआ गठबंधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी गठबंधन की घोषणा कर बिसनुपुर विधानसभा उपचुनाव मे चोट खाए वाममोर्चे की नींद उड़ा दी है. विदेश मंत्री और पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने लंबी मुलाक़ात के बाद रविवार देर रात कहा कि दोनों पार्टियाँ राज्य में लोक सभा चुनाव साथ लड़ेगीं. हालांकि दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा क्या होगा, इस पर अभी दोनों ही पार्टियों को मत्थापच्ची करनी है. दूसरी ओर दिल्ली मे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन पर बातचीत का कोई ठोस परिणाम अभी कम से कम नही निकल पाया. दोनों ही पार्टियों के दूसरी पंक्ति के नेताओं के बीच तल्ख़ बयानबाज़ी के बाद रविवार शाम उनके शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और मुलायम सिंह यादव के बीच मुलाक़ात हुई. बातचीत घंटे भर चली पर बात बनी नहीं, हालांकि समाजवादी पार्टी के नेताओं को उम्मीद है कि देर सबेर बात बन ही जाएगी. समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले ही 59 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है. उसका मानना है की कांग्रेस प्रदेश मे 12 सीटों से ज़्यादा की दावेदारी नही कर सकती जबकि कांग्रेस 25 सीटों पर दावा ठोंक रही है. सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' हमें विश्वास है कि कांग्रेस और सपा में समझौता हो जाएगा.'' पवार के साथ खींचतान उधर कांग्रेस के एक और सहयोगी मराठा नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वो बड़ी पार्टी होने के नाते गठबंधन में क्षेत्रीय पार्टियों का सम्मान करे और उनकी आकांक्षाओं को समझे. शरद पवार ने जहाँ महाराष्ट्र में कांग्रेस से राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए आधी सीटें छोड़ने के लिए कहा है, वहीं ये सलाह भी दी है कि कांग्रेस को लोक सभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन न करने के उसके फ़ैसले पर फिर विचार करना चाहिए. इसके अलावा अभी पार्टी को बिहार में भी लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान जैसे गठबंधन में मोल भाव करने में मंझे खिलाड़ियों से निपटना है. हालांकि गठबंधन की पेचीदगियों से जहां पार्टी दो चार हो रही है, वहीं आचार संहिता लगने से पहले हो सकने वाली सरकारी घोषणाओं को करने से नहीं चूक रही है. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी आंध्र प्रदेश और अंडमान निकोबार के तूफ़ानी दौरे के तुरंत बाद हरियाणा पहुंचीं और तीन ज़िलों का दौरा कर कई परियोजनाओं की नींव डाली, साथ ही पूरी हुई परियोजनाओं पर अपनी पार्टी की सरकार की पीठ थपथपाई. |
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