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'पुरानी बातें भूल कर मुसलमान आगे बढ़ें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्रिकेट के मैदान पर लंबी पारी खेलने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बल्लेबाज़ मोहम्मद अज़हरूद्दीन कांग्रेस पार्टी के टिकट पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. बीबीसी उर्दू संवाददाता सुहेल हलीम ने अज़हरूद्दीन से उनके चुनावी क्षेत्र में बातचीत की, पेश है बातचीत के मुख्य अंश. अज़हर सबसे पहले ये बताएं कि राजनीति में क़दम क्यों रखा? क्रिकेट मेरा प्रोफ़ेशन रहा है, तो मैंने सोचा कि कुछ हटकर किया जाए. दो तीन साल तक सोच रहा था कि लोगों के लिए कुछ न कुछ करूं. मुझे शोहरत की वजह से लोगों तक पहुंचना आसान था. मैने सोचा की कांग्रेस पार्टी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, जिस पार्टी ने देश के लिए बलिदान दिया है. मैं राजीव गांधी का बड़ा प्रशंसक हूँ. सोनिया और राहुल का नेतृत्व सराहनीय है. प्रस्ताव किसने रखा? आपने या कांग्रेस पार्टी ने. दोनों तरफ़ से कोशिश जारी थी. आप ने कहा है कि कांग्रेस ने देश के लिए बहुत बलिदान दिए हैं, लेकिन बाबरी मस्जिद ध्वस्त हुई उस समय कांग्रेस पार्टी की ही सरकार थी? जो हुआ वो अच्छा नहीं था. पुरानी बातों पर अगर बात करते रहेंगे तो इसका कोई अंत नहीं होगा. विकास की बात नहीं हो सकेगी. मुसलमानों को आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए. जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण था. आंध्र प्रदेश क्यों नहीं, उत्तर प्रदेश क्यों और उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद ही क्यों? मेरी दिलचस्पी सिर्फ़ चुनावी मुहिम में थी, लेकिन पार्टी का फ़ैसला था कि मैं मुरादाबाद से चुनाव लड़ूँ, ऐसे में पार्टी हाईकमान की बात तो माननी ही पड़ती है, मैंने यही किया है. देखिए आगे क्या होता है.
मैने मुरादाबाद में बहुत से लोगों की बात की. आप के ऊपर बाहरी होने का टैग है. हैदराबाद मुरादाबाद से दूर है. ये आपके लिए कितनी बड़ी समस्या है. सोनिया और राहुल को भी बाहरी कह सकते हैं. वो भी दिल्ली में रहते हैं. बहुत से नेता है जो अपने पैतृक स्थान से चुनाव नहीं लड़ते. अगर आप भारत के नागरिक हैं तो चुनाव कहीं से भी लड़ सकते हैं. फिर भी लोग इस बारे में सोच रहे हैं तो ये बहुत छोटी चीज़ है. लेकिन स्थानीय लोगों की स्थानीय समस्याएं होती हैं. अगर वे लोग आप से मिलना चाहेंगे तो कहां मिलेंगे. मैं यहीं रहूंगा. मैं भागने वाला नहीं हूँ. जब मैं कोई काम करता हूँ तो सौ प्रतिशत करता हूँ. जहां तक स्थानीय समस्याओं का सवाल है तो बाहर वाला अच्छी तरह से हल कर सकता है. मेरी कोशिश यही रहेगी कि विकास के कामों पर ज़ोर दिया जाए. मेरी कोशिश से किसी को फ़ायदा हो जाए तो अच्छा है. मैं अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए काम कर सकूं तो अच्छा रहेगा. युवकों पर भी ध्यान दिया जाएगा. बग़ल की सीट रामपुर से जय प्रदा हैं जो आप के इलाक़े से हैं. क्या कोई हितों का टकराव तो नहीं है. मैं नहीं समझात कि हितों का कोई टकराव है. मैं अपनी पार्टी की जीत के लिए जान लगा दूंगा. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हालत बहुत बुरी है. कांग्रेस पार्टी के नाम पर वोट देने वाले मुश्किल से ही मिलेंगे. ऐसे में आप क्या करेंगे. यह सब जनता के ऊपर है. उन लोगों ने जिस तरह से मेरा अभिवादन किया है ऐसे में अगर 90 प्रतिशत भी लोग वोट में बदल जाते हैं तो मैं बहुत भाग्यशाली रहूँगा. मैं बहुत अलग तरह का आदमी हूँ, जो ठान लेता हूँ वही करता हूँ. मेरी कोशिश है कि मुरादाबाद वैश्विक स्तर का शहर बन जाए. बेरोज़गारी समाप्त हो जाए. आप की चुनावी रणनीति क्या है, आंकड़े क्या बाताते हैं. इस सिलसिले में क्या सोचा है. मैं विकास का काम करुंगा. मैं इलाक़े का दो चार बार दौरा कर चुका हूँ और सारी समस्याओं को हल करूंगा. दो तीन घंटा आप के साथ गुज़ारा, आप के अधिकतर समर्थन मुसलमान हैं. आप के विरुद्ध भी एक मुसलमान उम्मीदवार हैं. आप का टार्गेट क्या है. मेरा कोई टार्गेट नहीं है. मैं सिर्फ़ विकास का काम करुंगा. अगर आप टार्गेट की बात करेंगे तो सिमट के रह जाएंगे और आपकी योजना धरी की धरी रह जाएंगी. अगर हार गए तो क्या करेंगे? फिर भी काम करुंगा. जीतना और हारना तो लगा ही रहता है. जीतने और हारने से काम नहीं रुकता. |
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