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दुनिया की नज़र है भारत के चुनाव पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के आम चुनाव का इंतज़ार है. अमरीकी चुनाव के बाद दुनिया की नज़रें भारत के चुनाव पर लगी हुई हैं. क्या भारत चुनाव के साथ-साथ एक नए युग में प्रवेश कर पाएगा? क्या शिक्षा के स्तर में सुधार आ पाएगा? क्या भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व के मानचित्र पर एक नई पहचान बना पाएगा? क्या भारत में चुनाव के बाद बेरोज़गारी की समस्या कम हो पाएगी? इस तरह के कई सवाल न सिर्फ़ भारतीय जनता बल्कि दुनिया के उन तमाम लोगों के मन में गूंज रहे हैं जो भारत को एक शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और खुशहाल देश के रूप में देखना चाहते हैं. जिस तरह अमरीकी चुनावों के इतिहास में पहली बार बदलाव देखने को मिला. क्या उसी तरह भारत में भी बदलाव आने की संभावना है? ख़ैर, यह तो आने वाला समय ही बताएगा. ओबामा ने जीत के बाद शिकागो में जमा लाखों लोगों को संबोधित करते हुए कहा था, "अमरीकी लोगों ने घोषणा की है कि बदलाव का समय आ गया है. अमरीका एक शताब्दी में सबसे गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है. यह नेतृत्व का एक नया सवेरा है. जो लोग दुनिया को ध्वस्त करना चाहते हैं, उन्हें मैं कहना चाहता हूँ कि हम तुम्हें हराएँगे. जो लोग सुरक्षा और शांति चाहते हैं, हम उनकी मदद करेंगे." भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ओबामा की जीत को असाधारण बताते हुए कहा था कि यह जीत पूरी दुनिया के लिए एक नई प्रेरणा है. आज लोगों की राय में चुनाव के बाद भारत में जो भी सरकार बनेगी उसे आर्थिक संकट से देश को उबारने में प्राथमिकता देनी होगी, जिस तरह अमरीकी चुनाव के समय आम लोगों की राय थी कि चुनाव के बाद सरकार को आर्थिक संकट को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी. जो राजनीतिक पार्टी अपने घोषणा पत्र में आर्थिक संकट, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और बेरोज़गारी को मुद्दा बनाएगी, उसे इसका सीधा लाभ मिलेगा. आज लोगों के मन में एक नए बदलाव कि आशा है. लोग एक बदले हुए नए भारत कि कल्पना कर रहे हैं, लेकिन लोगों को इस बात का ध्यान और धैर्य रखना होगा और यह समझना होगा कि ये बदलाव तुरंत देखने को नहीं मिल पाएगा बल्कि इसमें समय लगेगा. ऐतिहासिक अवसर भारतीय जनता को इस ऐतिहासिक मौक़े पर यह तय करना होगा कि देश के प्रति उनका भी कुछ दायित्व है, उनकी अपनी ज़िम्मेदारी है, कुछ फ़ैसले उन्हें ख़ुद करने होंगे और विकास के कामों में सरकार की मदद करनी होगी. राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी. देश की तरक्क़ी में बराबर का सहयोगी बनना पड़ेगा तभी हम एक समृद्ध समाज की स्थापना कर पाएँगे. आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र तो है, जहाँ हर तरह से लोगों को अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन वहाँ चुनौतियाँ भी बहुत हैं. जहाँ एक तरफ हम खुशहाली, आत्मसम्मान और तरक्की कि बात करते हैं वहीं दूसरी तरफ हमें अथाह ग़रीबी भी देखने को मिलती है.
एक अच्छे समाज की स्थापना के लिए आज के राजनीतिक स्वरूप को बदलना पड़ेगा. मतदाताओं को भारत में बदलाव लाने के लिए अपने डर, संदेह और भय की प्रवाह किए बिना अपनी आशाओं और महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अपने घर से निकल कर अपने मताधिकार का प्रयोग करना होगा. उन्हें अमरीकी अनुभवों को भी ध्यान में रखना होगा जहाँ एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला. जनता को अपनी साहस का एहसास राजनीतिक दलों को दिलाना होगा. हमें संपूर्ण परिवर्तन की बात चुनाव अभियान में लोगों से करनी होगी तभी हम एक नए भारत का निर्माण कर पाएँगे. मतदाताओं को सोच-विचार कर अपने मताधिकार का प्रयोग करना होगा जिससे भारत में बदलाव आ सके और भारत एक नए युग में प्रवेश कर सके. शायद हमारे वोटों की यही सबसे बड़ी उपयोगिता होगी. (लेखक वाशिंगटन यूनिवर्सिटी, सैंट लुईस, अमेरीका में प्राध्यापक हैं.) |
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