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सबसे बड़े लोकतंत्र में बढ़ती असमानता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में तेज़ आर्थिक विकास ने जहाँ उसे शक्तिशाली राष्ट्रों की सूची में शामिल कर दिया है, वहीँ लोकतंत्र के पर्व आम चुनाव के समय शायद ये अहसास भी ज़रूरी है कि समाजिक असमानता भी बढ़ी है. ये वर्ष 2020 तक भारत के असल में महाशक्ति बनने की महत्वकांक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा है. बीबीसी ब्राज़ील सेवा की टीम ने हाल ही में भारत का दौरा किया और ये जानने की कोशिश की कि 2020 में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्था कहां होगी. टीम ने दो महिलाओं से बात की और दोनों के नाम लक्ष्मी हैं. मुंबई की लक्ष्मी मुंबई में रहने वाली लक्ष्मी अपने पति के साथ कूड़े चुनने का काम करती हैं और इसे बेच कर अपना जीवनयापन करती हैं.
इस शहर में वो अकेली नहीं हैं. दस हज़ार दूसरे लोग भी इसी तरह कूड़े चुनकर ज़िंदगी बसर करते हैं. छह लाख से अधिक लोग झोपड़ी या स्लम में रहते हैं. मुंबई की दो करोड़ से अधिक आबादी को भारत के आर्थिक विकास का चमत्कार कहा जाता है. लक्ष्मी ने बेहतर ज़िंदगी की आस लेकर बड़े शहर का रुख़ किया था. आज वो सौ रुपये पर अपना गुज़ारा करती हैं, जोकि बहुत ही कम है, लेकिन लक्ष्मी कहती है कि गांवों में वो जो कमा पा रही थीं उससे ये राशि अधिक है. ऐसी ग़रीबी भारत के वैश्विक शक्ति बनने के लिए एक चुनौती है. आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन ज़बर्दस्त समाजिक असमानता है. हैदराबाद की लक्ष्मी ये लक्ष्मी भारत की एक बड़ी सूचना प्रोद्योगिकी (आईटी) कंपनी में 60 इंजीनियरों के दल का नेतृत्व करती हैं. यहां काम करने वाले प्रशिक्षित इंजीनियर हैं, ताकि प्रतिस्पर्धी आईटी सेक्टर में टिक सकें.
सिर्फ़ साठ साल पहले ये कंपनी खाने पकाने के तेल उत्पादन का काम करती थी. अब इस कंपनी में लगभग एक लाख कर्मचारी काम करते हैं और ये 1991 में शुरु हुए आर्थिक उदारीकरण की नीति का नतीजा ही है. हैदराबाद की लक्ष्मी का कहना है कि धनी देशों की मांग भारतीय तकनीकी श्रेष्ठता को अभी बरक़रार रखे हुए है. लेकिन वो कहती हैं कि भारत के विकास के लिए देश में भी आईटी की मांग अहम है. तेज़ विकास दर वाली इन कंपनियों में योग्य कर्मचारी हैं, जोकि विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुक़ाबला कर रहें हैं. लक्ष्मी के बॉस और विप्रो के उपाध्यक्ष बी कृष्णमूर्ति के अनुसार भारत के लिए 2020 की भविष्यवाणी सकारात्मक है. वो अपने आधुनिक दफ़्तर में कहते हैं, "भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रतिस्पर्धा अगले दशक और उससे आगे भी जारी रहेगी." विप्रो को नए भारत का प्रतीक माना जाता है जो भारत दिन ब दिन धनी हो रहा है. दूसरे भारतीयों की तरह, कृष्णमूर्ति को भरोसा है कि भारत की बड़ी जनसंख्या आर्थिक विकास में सहायक है. नया भारत कृष्णमूर्ति कहते हैं, "भारत में सबसे अधिक युवा काम करने वाले हैं, हमारी 28 प्रतिशत आबादी युवा है." वो आगे कहते हैं, "वे अंग्रेजी बोलते हैं, सक्षम और शिक्षित हैं. ये हमारे लिए बड़ी विशेषता होगी. दूसरे देश हमारे मुक़ाबले में आने की कोशिश कर रहें हैं, लेकिन मैं आशा करता हूँ कि हमारी श्रेष्ठता हमें दूसरों से आगे रखेगी." लेकिन देश में भीषण ग़रीबी है, ऐसे में आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत को असमानता से बचने के लिए अपनी समृद्धि को फ़ैलाना होगा. आर्थिक मामलों के जानकार राजीव कुमार का कहना, "ये सोचना बंद करना होगा बिना कोशिश और स्वत: ही भारत 6 प्रतिशत की दर से विकास करता रहेगा." भारत का आर्थिक विकास दर पिछले चार साल से लगातार नौ फ़ीसदी के क़रीब रही है. लेकिन साथ-साथ असमानता भी बढ़ी है. दुनिया में अमीरी-ग़रीबी की खाई 1980 तक स्थिर थी, लेकिन बाद के दशकों में ये खाई बढ़ रही है. उसी तरह भारत में भी जिस राज्य के पास अधिक धन था वो ग़रीब राज्यों के मुक़ाबले में तेज़ी से विकास कर रहा है. विश्व मुद्रा कोष का कहना है, "भारतीय अर्थव्यवस्था की ज्वार उठ रही है लेकिन सभी नाव उस ज्वार के साथ उठने में कामयाब नहीं हो रहे हैं." हाल के वर्षो में, विशेषकर ग्रामीण भारत में बढ़ती असमानता ने माओवादियों को बढ़ावा दिया और इस समय वे भारत के बड़े भू-भाग (40 प्रतिशत) पर मौजूद हैं. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कह चुके हैं कि भारत की सुरक्षा के लिए नक्सली सबसे बड़ी चुनौती है. |
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