कश्मीर पर आज बैठक, रविवार से सर्वदलीय दौरा

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कश्मीर में जारी हालात पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार ने शनिवार को दिल्ली में एक बैठक बुलाई है.
रविवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में 28 सदस्यों का एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल दो-दिनों के दौरे पर कश्मीर जा रहा है जहां वो सभी पक्षों से भेंट करेगा. हालांकि राजनाथ सिंह उन्हीं लोगों से मिलेंगे जो उनसे मिलने में दिलचस्पी दिखाएंगे.
ख़बरों के मुताबिक़ सरकार ने इस बात के संकेत दिए हैं कि दल में शामिल नेता अगर चाहें तो वो अलगाववादियों से भी भेंट कर सकते हैं.
इस दल को कश्मीर भेजने का फ़ैसला 12 अगस्त को इसी मसले पर सभी राजनीतिक दलों की बैठक के दौरान लिया गया था. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे.
शुक्रवार रात एक टेलीविज़न चैनल के दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा, "कश्मीर समस्या के बीज आज़ादी के दौरान बोए गए थे."

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उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या का हल 'विकास' और 'लोगों का विश्वास' जीतने से होगा. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कश्मीर के युवा 'गुमराह नहीं होंगे' और कश्मीर सही मायनों में 'जन्नत बन सकेगा'.
प्रतिनिधि मंडल में शामिल जनता दल (यूनाइटेड) के शरद यादव ने कहा, “हमारी कोशिश होगी कि आम राय बन जाए. हम लोग हुर्रियत समेत, हर किसी से बातचीत करने कि लिए तैयार हैं.”
एनसीपी नेता तारिक अनवर ने कहा, “बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं कर रहे हैं. वहां का माहौल बद से बदतर हो चुका है. एक प्रतिनिधि मंडल के जाने से वहां तुरंत हालात बदल जाएंगे ऐसा नहीं है. 2010 में बातचीत चली थी तो उसका लाभ हमें मिल सकेगा. कम से कम अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह कर सकेंगे कि हमने वहां शांति व्यवस्था बनाने के लिए सभी कोशिश की.”

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श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर कहते हैं, कि सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल साल 2010 में भी यहां आया था. लेकिन पिछली बार ऐसे हालात नहीं थे. 60 हफ्तों तक लगातार कर्फ्यू, हड़ताल और बंद नहीं था, न ही इतने लोग घायल थे जितने इस बार हैं.
वे कहते हैं कि प्रतिनिधि मंडल के हवाले से शुक्रवार को कांग्रेस के डॉक्टर करण सिंह कश्मीर पहुंचे. हालांकि उन्होंने कोई औपचारिक घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि अलगाववादियों को बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उसे ख़ारिज नहीं करना चाहिए.
रियाज़ बताते हैं कि कश्मीर में <link type="page"><caption> अलगाववादी संगठन</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/08/160830_gilani_nia_za" platform="highweb"/></link>, व्यापार मंडल, सरकारी कर्मचारियों संगठनों ने पहले ही कहा है कि कोई भी प्रतिनिधि मंडल हो बातचीत तब तक नहीं होगी जब तक उसका एजेंडा साफ़ न हो.
इन संगठनों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बयान दिया था कि कश्मीर की समस्या के राजनीतिक हल और स्थाई हल ढूंढ़ने होगे, लेकिन इसके बाद उस तरह से कोई पहल होती नहीं दिखती.

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रियाज़ बताते हैं कि इन संगठनों के अनुसार पैलेट गन को बैन किए जाने के बारे में सभी राजनीतिक दल सहमत हैं. लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह की बनाई कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे बैन नहीं किया जा सकता. इसके बाद शुक्रवार को यह ख़बर भी आई कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने 6 करोड़ से अधिक पैलेट ख़रीदे हैं.
वे बताते हैं कि प्रशासन का कोशिश है कि वह कर्फ्यू हटाए. लेकिन जिस इलाक़े में भी ऐसा किया जाता है वहां से युवा बाहर आते हैं और प्रदर्शन करते हैं.
लोगों का कहना है कि पिछले कई हफ्तों में पुलिस ने लोगों को अंधाधुंध गिरफ्तार किया है. पुलिस ने भी इससे पहले कहा था कि हिंसक प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले ढाई हज़ार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
इस कारण लोगों में एक नए सिरे से ग़ुस्सा है, बुरहान वानी का मुद्दा तो है ही.
पिछली 8 जुलाई को कथित चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद से भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले 65 दिनों से कर्फ्यू जारी है.
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