बाढ़ के 'ख़तरे पर भारी चोरी का डर'

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- Author, वात्सल्य राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जान क़ीमती है या फिर सामान?
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव काम में लगी एनडीआरएफ़ यानी नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स लोगों से यही सवाल कर रही है.
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के क़रीब 15 से ज़्यादा ज़िलों का बड़ा हिस्से बाढ़ से प्रभावित हैं. एनडीआरएफ़ के मुताबिक़ यहां करीब 25 हज़ार लोगों को तुरंत राहत शिविरों में भेजा जाना जरुरी है लेकिन प्रभावित क्षेत्रों के लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं.
उन्हें डर है कि बाढ़ से बचने के लिए घर ख़ाली किया तो कहीं बंद घर के ताले न टूट जाएं और क़ीमती सामान चोरी न हो जाए.

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इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोग भी शामिल हैं.
वाराणसी में नगवां और सामने घाट के इलाक़े के बीच बसे सात बड़े मोहल्लों में क़रीब तीन हज़ार लोग फंसे हुए हैं.
एनडीआरएफ के कमांडेंट आलोक कुमार सिंह ने बताया, "पहले ऐसी ख़बरें आती रही हैं कि बाढ़ आने पर जब लोगों ने अपने मकान ख़ाली कर दिए तब वहां काफी चोरियां हुई हैं. इसके कारण हमें लोगों को काफ़ी मनाना पड़ रहा है कि आप मकानों को ख़ाली करें."
कमांडेंट सिंह बताते हैं कि ये सिर्फ वाराणसी की कहानी नहीं है. हर ज़िले में यही स्थिति देखने को मिल रही है.
मध्य प्रदेश के रीवा में भी करीब तीन हज़ार लोग घर ख़ाली करने को तैयार नहीं है.

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चित्रकूट में तो बाढ़ प्रभावित इलाक़ो में इंसानों के साथ जानवरों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना भी एनडीआरएफ के लिए चुनौती बन गया है.
कमांडेंट सिंह बताते हैं, "चित्रकूट में जो सीमा का इलाक़ा है वहां सुरक्षा को लेकर कई बार समस्या हुई है. वहां लोग जानवरों को भी बड़ी मुश्किल में छोड़ना चाह रहे हैं. जानवरों को बचाना भी हमारे लिए चुनौती है."
एनडीआरएफ अधिकारियों ने राहत में लगी टीमों को निर्देश दिया है कि वो जानवरों को ऊंचे इलाके में ले जाकर खुला छोड़े दें. जानवर अच्छे तैराक होते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए इतना प्रयास ही काफी होगा.
लेकिन, वाराणसी से लेकर रीवा और चित्रकूट तक लोग घरों की सुरक्षा की गारंटी मिलने तक राहत शिविरों में जाने को तैयार नहीं.
इसे लेकर एनडीआरएफ को पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने का अनुरोध करना पड़ रहा है.
कमांडेंट सिंह ने बताया, "हमने पुलिस प्रशासन से अनुरोध किया है कि प्रभावित इलाक़ों में प्राइवेट नावों के जाने पर रोक लगाई जाए. ख़ाली मकानों की सुरक्षा के लिए पुलिस गश्त की व्यवस्था भी जाए."
एनडीआरएफ अधिकारियों के मुताबिक़ अगर बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षा का डर न हो तो रेस्क्यू अभियान चलाने की ज़रुरत ही नहीं पड़ेगी. लोग प्रशासन के कहने पर ही घर खाली कर देंगे.

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उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, शारदा और घाघरा का जल स्तर बढ़ने की वजह से महोबा, बांदा, चित्रकूट, वाराणसी, इलाहाबाद, बलिया और गाज़ीपुर के कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बन गई है.
बिहार की सीमा से लगे क्षेत्रों में कर्मनाशा नदी की वजह से बाढ़ के हालात हैं.
वहीं मध्य प्रदेश में नर्मदा, केन और चंबल नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया है. सतना और रीवा समेत क़रीब छह जिले बाढ़ के प्रभाव में हैं.
फिलहाल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में एनडीआरएफ ने 14 टीमें राहत और बचाव कार्य के लिए तैनात की हैं. एनडीआरएफ के मुताबिक़ रविवार से टीमों की संख्या बढ़ाकर 21 कर दी जाएंगी. अर्नाकुलम की चार टीमें और गांधीनगर की तीन टीमें रविवार से अभियान का हिस्सा बनेंगी.
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