चखे हैं नवरोज़ के पारसी पकवान?

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- Author, प्रकृति करगेती
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
अपनी शांतिप्रियता के लिए मशहूर भारतीय पारसी समुुदाय अपनी घटती जनसंख्या के लिए भी चर्चा में रहा है. पूरी दुनिया में लगभग एक लाख़ तीस हज़ार के क़रीब पारसी लोग मौजूद हैं जिनमें से लगभग 70 हज़ार भारत में रहते हैं.

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अपने धर्म की रक्षा के लिए आठ सौ साल पहले भारत आए इस समुदाय के लोग आज भारत के कई शहरों जैसे मुम्बई, पुणे, बैंगलोर और हैदराबाद में फैले हुए हैं.

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पारसी अपने खान-पान के लिए जाने जाते हैं. भारत में सौ सालों से भी ज़्यादा पुराने पारसी कैफ़े दिखते हैं.

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पारसी धर्म के लोग दूसरे धर्मों में रिश्ते नहीं करते जिसके चलते उनकी जनसंख्या में भारी गिरावट भी आई है, लेकिन इस नियम को लेकर वो बेहद सख़्त हैं. हालांकि पारसी लोग अपने मिलनसार व्यवहार के लिए भी जाने जाते हैं.

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2014 में सरकार ने पारसियों की तादाद बढ़ाने के उद्देश्य से 'जियो पारसी' नाम की एक स्कीम भी चलायी थी.

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नवरोज़ यानी पारसी नव वर्ष के दिन अलग-अलग तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं. कई होटेल भी ख़ास पारसी व्यंजन अपने मेन्यू में रखते हैं. मुंबई के बांद्रा इलाके के अश्मिक्क स्नैक शैक के मालिक मीनू पावरी ने हमसे कुछ व्यंजन साझा किए.

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नवरोज़ के दिन हर पारसी परिवार ‘फ़ायर टेम्पल’ यानी ‘अगियारी’ जाता है और नए साल के लिए प्रार्थना करते हुए चन्दन और लोबान की अगरबत्तियाँ भी जलाता है.

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चर्चगेट के बीचों बीच पारसी संत भिखा बहराम ने एक कुआं खोदा. मीठे पानी के इस कुएं के आसपास गैर पारसियों का जाना मना है. भिखा बहराम के नाम से जानी जाने वाली यह जगह आज पारसियों के लिए एक विशेष धार्मिक स्थान बन गई है.

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कयानी बेकरी जो सौ से भी ज़्यादा साल पुरानी है, आज भी पारसियों में बहुत मशहूर है. इस बेकरी का ख़ास मावा केक नवरोज़ में भी बड़े चाव से खाया जाता है

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नवरोज़ के लिए कई मांसाहारी व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें से सबसे ख़ास है पातरानी मच्छी. पुदीने और दही की चटनी में लिपटी, भाप पर पकाई गई साबूत मछली पारसी नव वर्ष के ख़ाने की जान है.
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