पाक ने बहादुर अली पर भारतीय दावों का खंडन किया

एनआईए

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पाकिस्तान सरकार ने भारत प्रशासित कश्मीर में पकड़े गए कथित चरमपंथी बहादुर अली के बारे में भारत के दावों का खंडन किया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफ़ीस ज़कारिया ने नियंत्रण रेखा पर किसी भी घुसपैठ के भारत के दावों को भी खारिज कर दिया.

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इससे पहले बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कहा था कि लश्कर ए तैय्यबा के चरमपंथी बहादुर अली को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर स्थित कंट्रोल रूम से लगातार निर्देश दिए जाते थे और इसमें पाकिस्तान सेना का भी सहयोग रहता था.

बहादुर अली को हाल में सुरक्षा बलों ने उत्तरी कश्मीर से पकड़ा था. एनआईए के आईजी संजीव कुमार सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहादुर अली के कथित इक़बालिया बयान का एक वीडियो भी दिखाया गया था.

एनआईए कश्मीर घाटी में जारी हिंसा और अशांति को लेकर लश्कर ए तैय्यबा की भूमिका की जांच कर रही है.

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एनआईए ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेस में दावा किया था कि अली को 25 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया और गिरफ़्तारी के दौरान बरामद मैप, हथियार और गैज़ेट्स से उनके चरमपंथी संगठन से जुड़े होने के सबूत मिले हैं.

एनआईए के अनुसार अब चरमपंथी संगठनों ने अपनी रणनीति बदल दी है.

उनका कहना है कि अब यह अपने सदस्यों को आम जनता में घुलमिलकर रहने की तैयारी करा रहे हैं.

एनआईए के अनुसार अली के पास एक स्पेशल वायरलेस सेट था जिसके माध्यम से वाई-एसएमएस भेजे जा सकते हैं.

एनआईए के अधिकारी ने दावा किया कि हिज़बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद अली और उनके साथियों को सीमा पार से निर्देश मिले थे कि वो जनता में घुलमिलकर अशांति फैलाएं.

संस्था ने इस कथित चरमपंथी का वीडियो जारी करते हुए बताया कि जमात-उद-दावा ने 2008-09 में बहादुर अली को भर्ती किया था और मिलिट्री ट्रेनिंग भी दी थी.

एनआईए के आईजी ने कहा कि बहादुर अली को दी गई हथियारों की ट्रेनिंग से सैन्य विशेषज्ञों की भूमिका ज़ाहिर होती है.

बुरहान वानी की बीती 8 जुलाई को एक मुठभेड़ में हुई मौत के बाद से कश्मीर घाटी में हिंसा और तनाव की स्थिति बनी हुई है. हिंसा की घटनाओं में अब तक 60 लोग मारे गए हैं.

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