'किशोर ने जिसके लिए गाया, वो अमर हो गया'

किशोर कुमार या किशोर दा के नाम से मशहूर आभास कुमार गांगुली का आज 87वां जन्मदिन है.
गाने का पहला ब्रेक मिलने के बारे में किशोर कुमार ने बताया था कि जब वो मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन से मिले तो अशोक कुमार उर्फ दादा मुनि ने उन्हें बताया था कि मेरा भाई भी थोड़ा-थोड़ा गा लेता है.
सुनिए- (कैसे मिला किशोर कुमार को ब्रेक)
उन्होंने बताया, "एसडी बर्मन ने मेरा नाम पूछा और कोई गाना गाने को कहा. इस पर मैंने उस समय का उनका ही गाया हुआ, एक मशहूर बंगाली गाना गाया. मेरा गाना सुनकर वो बोले- अरे यह तो मुझे ही कॉपी कर रहा है. मैं इसे निश्चय ही गाने का मौक़ा दूंगा. मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि सचिन दा मुझसे गाना गवाएंगे."

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संगीतकार जतिन-ललित की जोड़ी के ललित कहते हैं, "गानों में मस्ती का एक्सप्रेशन बहुत मुश्किल से आता है. लेकिन किशोर दा के साथ वह नेचुरली आ जाता था. उनके गानों में इतना एक्सप्रेशन सुनाई देता था, जो हम कर नहीं पाते हैं."
सुनिए- (किशोर कुमार से सावधान)
वो कहते हैं- "उनके संगीत की समझ इतनी अधिक थी कि अगर संगीतकार थोड़ी खराब धुन लेकर आए तो वो उसमें इतनी जान फूंक देते थे कि वो गाना अमर हो जाता था. किशोर कुमार का सेंस ऑफ ह्यूमर ऐसा था कि उनके बारे में कुछ भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता था कि उनका अगला क़दम क्या होगा."
ललित ने बताया कि एक बार किशोर कुमार किसी हाइवे पर फ़िल्म की शूटिंग कर रहे थे. निर्देशक ने समझाया था कि 'आपको गाड़ी में बैठकर आगे जाने और इसके बाद शॉट कट हो जाएगा.'

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ललित बताते हैं- "इसके बाद किशोर कुमार गाड़ी में बैठे और निकल गए. इसके बाद निर्देशक इंतजार करता रहा कि किशोर दा कब लौटकर आएंगे. बाद में पता चला कि वो गाड़ी से खंडाला जाकर वहां सो गए थे. किशोर कुमार कहा करते थे कि अगर ये गाना वो गाएंगे तो वह गाना निश्चित रूप से हिट हो जाएगा. किशोर कुमार को ख़ुदा ने ऐसी आवाज दी थी कि हमें आज तक उनकी बुरी आवाज सुनने को नहीं मिली.
वो ये भी कहते हैं कि राजेश खन्ना जितने बड़े एक्टर बने और जितने बड़े सुपर स्टार बने, उसमें बहुत बड़ा हाथ किशोर कुमार का था. किशोर कुमार ने जिन हीरो के लिए गाया, वो अमर हो गए. अब इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि किशोर कुमार क्या थे.

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गीतकार जावेद अख़्तर कहते हैं, "महान लोग समय के साथ-साथ और महान होते जाते हैं, क्योंकि आप यह अनुभव करते हैं कि वो कैसे काम करते हैं. यही चीज किशोर कुमार के साथ भी हुई. उनकी इमेज भी समय के साथ बड़ी होती गई और उनके न रहने पर भी लोग इसे महसूस करते हैं."
सुनिए- (बीबीसी एक मुलाक़ात)
जावेद अख़तर कहते हैं- "मैंने कई ऐसे नए संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है, जिन्हें किशोर कुमार से मिलने तक का मौका नहीं मिला है. लेकिन मैंने कई बार उन्हें यह कहते हुए सुना है कि काश किशोर कुमार इस गाने को गाने के लिए ज़िंदा होते."
किशोर के बेटे अमित कुमार कहते हैं कि उनके पिता को हॉलिवुड की फ़िल्में देखना बहुत पसंद था. एक बार वो अमरीका गए तो आठ हज़ार डॉलर की फ़िल्मों के कैसेट ख़रीद कर लाए.

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अमित कुमार ने बताया कि जब वो कलकत्ता से मुंबई आते थे तो वो और किशोर कुमार वीकएंड पर जाकर एक दिन में फ़िल्मों के तीन-तीन शो देखकर आते थे.
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