भूत-प्रेत ही दिलाते हैं चैनल को टीआरपी

इमेज स्रोत, doordarshan

    • Author, निधि सिन्हा
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी डॉटकॉम के लिए

एक ज़माना था जब छोटे पर्दे पर आने वाले धारावाहिकों की एक श्रेणी होती थी. अगर सीरियल पारिवारिक, सास-बहू, अंधविश्वास या कॉमेडी पर आधारित हैं, तो वही दिखाया जाता था.

इन सीरियलों में शुमार है, नीम का पेड़, बुनियाद, हम लोग, मालगुड़ी डेज, आहट, श....कोई है, अलिफ़ लैला, स्वाभिमान, देख़ भाई देख़, तू तू मैं मैं समेत कई और धारावाहिक.

लेकिन अब ऐसे सीरियल सिर्फ गूगल और यू-ट्यूब पर ही देखने को मिलते हैं. आजकल टीवी पर आने वाले धारावाहिकों की बात करें तो कलर्स पर प्रसारित होने वाले सीरियल 'ससुराल सिमर का' एक ऐसा धारावाहिक जिसकी शुरूआत हुई थी एक ही परिवार की दो बहुओं की जुगलबंदी से.

लेकिन अब उसमें कभी पताली देवी तो कभी किसी और देवी का सहारा लिया जाने लगा है. ये देवी किसी के भी शरीर में घुस जाती है. इसमें सिमर को मख्खी तक बना दिया जाता है.

कलर्स पर चल रहे दूसरे सीरियल 'थपकी प्यार की' में भी गोरिल्ला में दुष्ट आत्मा के प्रवेश का नायाब तरीका आज़माया गया है.

इमेज स्रोत, Colors TV

हालांकि कलर्स पर ऐसे धारावाहिकों की कोई कमी नहीं है. हाल ही में शुरू हुआ 'कवच' भी काली शक्तियों पर आधारित है.

सीरियल 'ससुराल सिमर का' के लेखक राजेश दुबे ने बीबीसी से कहा, "हम जिस सोसाइटी में रहते हैं वहां भूत-प्रेत को माना जाता है. दर्शक भी देखना पसंद करते हैं. हमलोग हर रोज़ सीरियल में कुछ नया दिखाने की कोशिश करते हैं, इसलिए आजकल भूत-प्रेत का चलन छोटे पर्दे पर ज़्यादा दिखने लगा है. लेकिन इतना ज़रूर कहूंगा कि हर धारावाहिक की एक उम्र होती है, बेमतलब लंबा खींचने से शो नहीं चलता है. हम लेखकों पर भी दबाव होता है कि हम कल क्या दिखाएंगे अपने सीरियल में, जो सीरियल से जुड़े. कहानी और भी सदस्यों से बात कर लिखी जाती है."

ज़ी टीवी पर चल रहा सीरियल 'काला टीका' भी अंधविश्वासों पर आधारित है. वहीं ज़ीटीवी के ही 'विषकन्या...एक अनोखी प्रेम कहानी' में भी अंधविश्वास दिखाया जाता है.

दूरदर्शन पर प्रसारित हो चुके सीरियल 'इंतज़ार और सही' स्टार प्लस पर प्रसारित हो चुके सीरियल 'शगुन' और कलर्स पर चल रहे धारावाहिक 'उड़ान' के लेखक राजेश सक्षम कहते हैं, "ज़रूरी नहीं कि भूत-प्रेत वाले सीरियल बहुत पसंद किए जाएं, लेकिन आजकल ऐसे धारावाहिकों को ही टीआरपी मिलती है. ज़्यादातर दर्शक आजकल ऐसे सीरियल देख रहे हैं.''

वो कहते हैं, ''इन दिनों छोटे पर्दे के लेखकों के पास इतना सोचने का समय नहीं होता है तो वही लिखना या दिखाना बेहतर समझा जाता है जिसे दर्शक देखें और सीरियल को टीआरपी मिले."

इमेज स्रोत, zee tv

छोटे पर्दे पर कुछ सालों पर धारावाहिकों का ट्रेंड ज़रूर बदलता है.

एक वक़्त था जब छोटे पर्दे पर सीरियल के किरदारों का प्लास्टिक सर्जरी कर दिया जाता था और चेहरा बदल दिया जाता था. और अब ट्रेंड है भूत -प्रेत और अंधविश्वास का, जो किसी न किसी रूप में हर सीरियल में दिखाई देता है.

चैनल लाइफ ओके पर चल रहे कॉमेडी शो 'मे आइ काम इन मैडम' में भी पति को डराने के लिए भूत की एंट्री दिखाई जाती है. सोनी पर सीरियल 'अदालत' जहां न्याय की बात होती थी, आजकल वहां भी अंधविश्वास दिखाया जाने लगा है.

धारावाहिकों में हो रहे बदलाव पर हमने कुछ युवा लेखिकाओं की राय भी जानी.

सीरियल 'होंगे जुदा न हम', 'महाराणा', 'क्राइम पेट्रोल' और 'बालिका वधू' की लेखिका प्रीति श्रीवास्तव कहती हैं, "सीरियल में बीच-बीच में एक बदलाव लाना पड़ता है, क्योंकि दर्शक भी एक चीज़ देख-देख कर बोर हो जाते हैं, तो कुछ ऐसा दिखाना पड़ता है जिससे दर्शक शो को देख कर भागे नहीं. आजकल भूत-प्रेत और अंधविश्वास दर्शकों को पसंद आ रहा है. ऐसे शो को टीआरपी भी मिलती है. इतना ज़रूर कहूँगी कि जिस दिन टीआरपी का दबाव काम हो गया सब लोग अपने हिसाब से लिखने लगेंगे."

इमेज स्रोत, life ok

वहीं ज़ीटीवी के सीरियल 'क़बूल है' की लेखिका स्वेच्छा भगत कहती हैं, "हमारे धारावाहिक का नाम 'क़बूल है' है, जहां हम लीड एक्ट्रेस को सलवार-कमीज़ और नमाज़ पढ़ते दिखा सकते थे. लेकिन हम लोगों ने मॉडर्न लड़की दिखाई. इसलिए मुझे लगता है प्रयोग करना चाहिए."

वो आगे कहती हैं, "लेकिन आजकल के सीरियल में जैसा दिखाया जाता है, उसे प्राइम टाइम में बच्चे भी अपने परिवार के साथ देखते हैं और उन पर इसका थोड़ा अलग प्रभाव ज़रूर पड़ता है, वैसे आजकल दर्शक भी काफ़ी स्मार्ट हो गए हैं, ऐसे में हमें कुछ ऐसा दिखाना पड़ता है कि वो सब कुछ जानते हुए भी शो से जुड़े रहें."

अब ऐसे में ये कहना ग़लत नहीं होगा की आजकल छोटे पर्दे पर भूत ही टीआरपी लाने में मदद करते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)