पाकिस्तान में हिंदू होने का मतलब..

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- Author, शिवम विज
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
गर्मी की एक दोपहरी में मेरा पाकिस्तानी हिंदू दोस्त दिल्ली की जामा मस्जिद पहुँचा था. वो दिल्ली की सैर पर आया था. शाम को हम कनॉट प्लेस में एक रेस्तरां में मिले.
वह महरौली में अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ ठहरा था. महरौली में भारतीय पड़ौसी ने उसे चेतावनी दी थी कि वो सड़क पार न जाए क्योंकि “वहाँ मुसलमान रहते हैं”. ये बहुत मजेदार था, क्योंकि मेरा दोस्ता पाकिस्तान में रहता था, जहाँ कोई भी सड़क मुसलमान से मिले बिना पार नहीं की जा सकती.
वो पहली बार भारत आया था और अधिकतर पाकिस्तानी सैलानियों की तरह भारत को ज़्यादा से ज़्यादा देखना चाहता था.
मैंने भी उससे वही सवाल पूछा, जो उससे सभी लोग पूछ रहे थे. पाकिस्तान में हिंदू होना कैसा है. उसने पूछा, “किस मायने में?”

वो थोड़ा घबराया हुआ सा लग रहा था, क्योंकि उस विदेशी धरती पर उसका ये दूसरा ही दिन था, जो कि सही मायने में विदेशी नहीं थी.
उसने जवाब दिया, “मैंने महसूस किया कि जामा मस्जिद इलाके में भारतीय मुसलमान बहुत ग़रीब हैं.”
उसने कहा, “पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति इतनी बुरी नहीं है. हिंदुओं को वहाँ उतना नहीं सताया जाता जितना कि आप सोचते हैं. हमारी स्थिति वहाँ इन दिनों ईसाइयों, अहमदिया और शियाओं जितनी बुरी नहीं है.”

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उसके दिमाग़ में वह अब भी पाकिस्तानी हिंदुओं और भारतीय मुसलमानों की तुलना कर रहा था.
उसने ज़ोर देकर कहा, “हम पाकिस्तानी हिंदू भारतीय मुसलमानों से बेहतर हैं. हमें कराची में सिर्फ़ दो तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मुसलमान आसानी से हमें अपने घर किराए पर नहीं देते और हम अक्सर झूठ बोलकर और मुस्लिम नाम रखकर मकान हासिल करते हैं."
मुझे इतनी ज़ोर से हंसी आई कि कुर्सी से गिरने ही वाला था. मैंने उससे कहा, “ठीक ऐसा ही कई भारतीय मुसलमानों के साथ भी होता है.”
मैंने उसे ये भी बताया कि मुझे तब कितना ख़राब लगा था जब मेरे घर आए एयरकंडीशन रिपेयर करने वाले एक मैकेनिक ने अपना नाम सत्या बताया था, जबकि उसका असली नाम नदीम था. जब उसके जूनियर ने उसे नदीम कहकर बुलाया तो उसने ऐसे जतलाया जैसे कुछ हुआ ही न हो.
मैं अब भी अपने उस दोस्त के इस दावे से संतुष्ट नहीं था कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ सब कुछ ठीक है. अगर ऐसा है तो फिर क्यों बहुत सारे हिंदू भारत आते हैं?
मैंने उसे महरौली के पास छत्तरपुर में रह रहे एक पाकिस्तानी हिंदू पर ख़बर करने के अपने अनुभव के बारे में बताया. मैं सिंध के एक गांव से आए एक विकलांग शख्स से मिला था जो कई सारे बच्चों के साथ यहाँ आया था.

उसने मुझे बताया था, “पाकिस्तान में परिवार नियोजन जैसी कोई चीज़ नहीं है.” पासपोर्ट फ़ीस जुटाने के लिए उसने कई साल तक पैसे बचाए थे. उसने बताया था कि कैसे उसके बच्चों को मदरसों में पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और उसकी बेटियों का मुसलमान ज़मींदार यौन उत्पीड़न करते थे.
मेरा दोस्त कराची में ‘उच्च मध्यम वर्ग’ से ताल्लुक रखता था. उसने कहा, “कराची में मेरी ज़िंदगी देखो! मैं कहीं जाने की सोच भी नहीं सकता. लेकिन कुछ लोग सुरक्षा कारणों और रोजगार के सिलसिले में विदेश जा रहे हैं. अमीर मुसलमान और यहाँ तक कि कई अमीर हिंदुओं ने भी यूरोप और अमरीका का रुख़ किया है. इसी तरह, कई हिंदुओं को भारत जाना आसान लगता है.”
वो कहते हैं, “लेकिन सेना की वजह से कराची में सुरक्षा स्थिति में ख़ासा सुधार हुआ है.”
मैंने पूछा, "लेकिन सिंध गांव में हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन का क्या?"
मैंने उससे कहा, "क्या तुम जानते हो कि रिंकल कुमारी (सिंध की एक लड़की) का जब अपहरण हुआ था तो इंडिया गेट पर प्रदर्शन हुआ था."
मैं उसे बाद में इंडिया गेट भी लेकर गया.

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उसने कहा, “देखिए, कई मामलों में हिंदू महिला को मुसलमान से प्यार हो जाता है और फिर धर्मांतरण के बिना विवाह संभव नहीं है. अगर एक मामला जबरन धर्मांतरण का है तो बाकी नौ मामले स्वैच्छिक हैं.” उसने दावा किया कि रिंकल कुमारी का मामला भी ऐसा ही है.
मेरे दोस्त ने दावा किया, “उसके चाचा हिंदू अधिकारों के लिए लड़ने वालों में से थे और साफ़ तौर पर इस शादी से खुश नहीं थे, इसलिए उन्होंने इस पर इतना हो-हल्ला मचाया.”
उसने बताया कि समस्या ये है कि हालात कोई भी हों पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन हिंदू को ही करना होगा. यहाँ तक कि अगर एक मुसलमान महिला को हिंदू से प्यार हो जाए तो हिंदू व्यक्ति को धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनना होगा अन्यथा पाकिस्तान में क़ानूनी और संवैधानिक रूप से शादी संभव नहीं होगी.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
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