कश्मीर में 'सूचना कर्फ्यू' से जनता परेशान

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- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में पूरी तरह से 'सूचना कर्फ़्यू' है. इससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
कश्मीर घाटी में हिज़्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद, पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
इनमें 32 लोगों की मौत हुई है जबकि लगभग 1900 नागरिक और 1664 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं. घाटी के 10 ज़िलों में कर्फ्यू भी लगा हुआ है.
श्रीनगर में सोमवार को दूसरे दिन भी अख़बार नहीं आए. सरकार ने स्थानीय अख़बारों के प्रकाशन पर पाबंदी लगा दी है.
जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रवक्ता नईम अख़्तर ने कहा, "ये पाबंदी मजबूरी के तहत लगाई गई है."
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि अख़बारों पर पाबंदी कब तक रहेगी तो वो कुछ भी स्पष्ट नहीं बता सके.
श्रीनगर के पत्रकारों ने रविवार को प्रैस कॉलोनी में अख़बारों पर पाबंदी के ख़िलाफ़ धरना दिया.
'राइज़िंग कश्मीर' और 'ग्रेटर कश्मीर' अख़बारों ने पाबंदी से पहले, शनिवार को अपने फ्रंट पेज ट्वीट ज़रूर किए थे.
कश्मीर में मोबाइल सेवाएं और मोबाइल इंटरनेट पर भी पाबंदी लगी हुई है.

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इसी वजह से मोबाइल और सोशल मीडिया के ज़रिए भी जानकारियां नहीं पोस्ट की जा रही हैं.
सबसे ज़्यादा दिक़्क़त अस्पतालों में हो रही हैं जहां भर्ती घायलों और मरीज़ों के परिवारों को जानकारी नहीं मिल पा रही है.
कुछ मरीज़ों की मौत के बाद उनके शव तक परिजनों को नहीं दिए जा सके हैं क्योंकि मोबाइल सेवाएं बंद होने की वजह से उनकी मौत की जानकारी ही नहीं पहुँचाई जा सकी है.
इस सूचना कर्फ्यू की वजह से लोगों तक स्कूलों-कॉलेजों के बंद होने की ज़रूरी सूचनाएं भी नहीं पहुँच पा रही हैं.
सरकार के प्रवक्ता नईम अख़्तर कहते हैं, "ये पाबंदियां मजबूरी के तहत लगाई गई हैं. अलगाववादी सोशल मीडिया और मोबाइल सेवाओं का फ़ायदा उठाकर लोगों को एकजुट करते हैं."

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भारत प्रशासित कश्मीर में सोशल मीडिया भी शांत पड़ा हुआ है. बीते 48 घंटों में फ़ेसबुक या ट्विटर पर बहुत कम ही स्टेट्स पोस्ट किए जा सके हैं.
कुछ लोग लैंडलाइन फ़ोन के ज़रिए कश्मीर से बाहर रह रहे अपने परिचितों को जानकारी देकर सोशल मीडिया पर अपडेट करवा रहे हैं.
श्रीनगर में लैंडलाइन ब्रॉडबैंड के ज़रिए लोग इंटरनेट से जुड़े हैं. लेकिन इनकी संख्या सीमित है.
लेकिन कश्मीर में रह रहे लोग पूरी तरह सोशल मीडिया से कटे हुए हैं.
दो दिनों के प्रतिबंध के बाद समाचार चैनल ज़रूर दिखाई दे रहे हैं. पाकिस्तानी समाचार चैनलों के प्रसारण पर पांबदी जारी है.
कुछ भारतीय चैनल भी दिखाई नहीं दे रहे हैं. हालांकि किसी भारतीय चैनल पर अधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है.
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