पंजाब के साथ गोवा पर भी केजरीवाल की नज़र

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- Author, शरद गुप्ता
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
पहले दिल्ली जीती, फिर पंजाब में तैयारी की. और अब आम आदमी पार्टी की निगाहें अगले साल फ़रवरी में पंजाब के साथ ही होने वाले गोवा विधानसभा चुनाव पर लग गई हैं.
अगर रविवार शाम को पणजी में आयोजित रैली कोई संकेत है तो तय है कि अपने मनमौजी जीवनशैली के लिए मशहूर गोवा में अगला मुक़ाबला बीजेपी और आप के बीच होगा.
मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत परसेकर के आवास से महज़ दो किलोमीटर दूर समुद्र के किनारे कंपाल मैदान पर रैली शुरू तो पांच बजे होनी थी लेकिन तपती दोपहरी में तीन बजे से ही लोगों की क़तारें लगनी शुरू हो गई.
शाम साढ़े सात बजे जब केजरीवाल ने भाषण शुरू किया तब तक मैदान खचाखच भर चुका था और बाहर सड़क पर भी दोनों ओर हुजूम जमा था.
जनता का उत्साह इतना था कि रैली के दौरान बिजली जाने से बीस मिनट तक माइक बंद रहा, लेकिन लोग रैली छोड़ कर नहीं गए.
वैसे भी आम दिनों में गोवा में दोपहर तीन-चार घंटे लोग आराम करते हैं लेकिन इस रविवार को लोग दोपहर से ही रैली में पहुंचने लगे थे.

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आख़िर आप को लेकर इतनी उत्सुकता क्यों? गोवा के एक जानेमाने आर्किटेक्ट का कहना था, "गोवा हर नई चीज़ का स्वागत करता है. वैसे भी लोग कांग्रेस और बीजेपी के भ्रष्टाचार से ऊब चुके हैं. भ्रष्टाचार ही वह मुद्दा था जिस पर केजरीवाल ने ख़ासतौर पर बोला."
उन्होंने बताया कि किस तरह दिल्ली में उन्होंने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई और कैसे उनकी ही पार्टी गोवा में फैले राजनीतिक भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकती है. समुद्र, हवा, रेत की इस जमीन को भ्रष्ट राजनीतिज्ञों ने बदनाम कर दिया है.
वहीं, गोवा राज्य में आप के संयोजक पंकज गुप्ता का कहना था, "बीजेपी का भ्रष्टाचार कांग्रेस से कम नहीं है, बस ज़ाहिर नहीं है. कांग्रेस के लोंगों ने छोटे-छोटे ढेरों घोटाले किए जबकि बीजेपी बड़े-बड़े लेकिन संख्या में कम घोटाले कर रही है. इसीलिए जनता को पता नहीं चल पा रहा है."

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वो कहते हैं, "गोवा के लोग मानते हैं कि विधायक के पास जाने से उनकी समस्याएँ सुलझ जाती हैं, लेकिन आप का मानना है कि अगर लोग अपने स्तर पर ही समस्याएँ सुलझा लें तो विधायक के पास जाने की ज़रूरत ही नहीं होगी."
आम चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद आप ने नीतिगत निर्णय किया था कि वे एक बार में एक राज्य में ही चुनाव लड़ेंगे. लेकिन आप प्रवक्ता आशुतोष का कहना था कि गोवा के लोगों की मांग के आगे पार्टी को झुकना पड़ा.
अक्टूबर में आप ने गोवा में संपर्क अभियान शुरू किया, लेकिन इसमें तेज़ी पिछले दो महीनों के दौरान ही आई.
दरअसल, गोवा की जनसंख्या के धार्मिक अनुपात में आप को फ़ायदा नज़र आ रहा है. यहाँ 26 फ़ीसदी आबादी ईसाइयों की है तो छह फ़ीसदी मुसलमानों की और 68 फ़ीसदी हिंदुओं की.
अल्पसंख्यक अभी तक कांग्रेस को वोट देते थे. लेकिन इस बार वे आप के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.
हिंदू बहुल होने के बावजूद यहाँ धार्मिक उन्माद कभी नहीं रहा. बीजेपी ने यहाँ कभी भी बीफ़ बैन करने या शराबबंदी की बात नहीं की.

एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर ने गुड फ़्राइडे की छुट्टी रद्द करने की घोषणा की थी तो जनसैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा था.
आप को भरोसा है कि मुसलमान और ईसाइयों के अलावा उन्हें उदारवादी, सुधारपसंद हिंदुओं के वोट भी मिलेंगे.
केजरीवाल ने कहा भी, “गोवा और पंजाब दोनों ही भ्रष्टाचार और नशे के कारोबार से जूझ रहे हैं.”
लेकिन पंजाब और गोवा में एक फ़र्क है. पंजाब में जहां अकाली दल और बीजेपी की सरकार की छवि धूमिल हो चुकी है वहीं गोवा में पिछले चार साल से राज कर रही बीजेपी की छवि कोई ख़राब नहीं है.
मनोहर पर्रीकर के दिल्ली में रक्षामंत्री बनने के बाद उनकी जगह मुख्यमंत्री बने परसेकर की छवि भी बेदाग़ है. इसीलिए पंजाब की तरह गोवा का क़िला फ़तह करने का आप को विश्वास नहीं है.

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हाँ, क़िले में छेद लगाने का इत्मीनान जरूर है.
गुप्ता कहते हैं, “अभी चुनाव में नौ महीने बाक़ी हैं. अक्टूबर से आपको ज़मीनी स्थिति में बदलाव दिखने लगेगा.”
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