जिसे सरकार कहे हां, वही भारत का नक्शा

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भारत में सरकार से स्वीकार कराए बिना, देश के किसी भी मानचित्र या सैटेलाइट इमेज पर पाबंदी लगाने के लिए विधेयक लाया जा रहा है.
गूगल, ऐपल और उबर के डिज़िटल मैप पर असर पड़ने वाले इस नए विधेयक का आंदोलनकारी संगठनों की ओर से कड़ा विरोध हो रहा है.
इस क़ानून से विवादित अंतरराष्ट्रीय सीमाओं सहित, 'ग़लत' सूचनाओं पर प्रतिबंध लग जाएगा.
सरकार का कहना है कि इस विधेयक के क़ानून बन जाने के बाद, इसके नियमों से व्यवसाय में किसी तरह की बाधा खड़ी नहीं होगी.
इस विधयेक से हर तरह की जियोस्पेशल (उपग्रह से ली गई तस्वीरें) सूचनाओं, मानचित्र, अधूरे आंकड़े या किसी भी तरह से लिए गए फ़ोटो, जिसमें सैटेलाइट फ़ोटोग्राफ़ी भी शामिल है, उनपर पाबंदी लग जाएगी.
इस क़ानून को तोड़ने वालों पर 10 करोड़ रुपए तक ज़ुर्माना भी लगाया जा सकता है.
इस क़ानून के मुताबिक़ जिन लोगों के पास पहले से इस तरह की सूचनाएं मौजूद हैं, उन्हें इसे रखने के लिए लाइसेंस लेना होगा.

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इस विधेयक को भारत में जियोस्पेशल सूचनाओं को तैयार करने और उसके वितरण को नियंत्रित करने के लिए तैयार किया गया है. भारत के गृह मंत्रालय का कहना है, "ऐसी सूचानाओं से देश की सुरक्षा, संप्रभुता और एकता पर असर पड़ने की संभावना होती है."
आलोचकों का कहना है कि जियोस्पेशल आंकड़े की परिभाषा इतनी विशाल है कि इसमें छपा हुआ मानचित्र, वर्ल्ड एटलस या आयात के बाद भारत पहुंची, किसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में की गई व्याख्या भी शामिल है.
इस प्रस्तावित क़ानून से ऐपल और गूगल के मानचित्र से जुड़े प्रोडक्ट्स और वैल्यू एडेड जियोलोकेशन सेवा, जैसे टैक्सी ऐप उबर को भी परेशानी हो सकती है.
अब तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि गूगल जैसी कंपनियां जितनी बार अपने मानचित्र को अपडेट करेंगी, उन्हें हर बार इसके लिए तीन महीने तक लंबी जांच प्रक्रिया से गुज़रना होगा या नहीं.
इस क़ानून में सरकारी संस्थाओं और विभागों को छूट दी गई है.
गूगल पहले ही भारत में अपने मानचित्र का थोड़ा बदला हुआ रूप ला चुका है. इसमें कश्मीर में मौजूद भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित सीमा रेखा को हटा दिया गया है और पूरे विवादित क्षेत्र को भारत की सीमा में दिखाया गया है.

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गूगल और उबर दोनों ने इस क़ानून पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है. यह क़ानून बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर भी लागू होगा.
इस क़ानून के बाद, बिना अनुमति के भारत का मानचित्र बनाने वाले, इसका वितरण करने वाले या इसे रखने वालों को इसके लिए सरकारी संस्था से लाइसेंस लेना ज़रूरी होगा और उन्हें अपनी सामग्री को जांच के लिए जमा कराना होगा.
उसके बाद जियोस्पेशल आंकड़े पर सुरक्षा जांच समिति विचार करेगी और तय करेगी कि आवेदन करने वाले को लाइसेंस दिया जाए या नहीं.
एक बार इस तरह की सामग्री को हरी झंडी मिल जाने के बाद, इस पर वाटरमार्क लगवाना ज़रूरी होगा, जिसमें सुरक्षा अधिकारी का निशान बना होगा.

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भारत के गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने एक ट्विट किया है, "फिलहाल यह देश के सामने एक प्रस्ताव है और मैं अपील करूंगा कि लोग जल्दबाज़ी में फ़ैसला न सुनाएं, बल्कि अपना सुझाव रखें.''
'इकोनॉमिक टाइम्स' अख़बार से बातचीत में उन्होंने कहा, "ऐसी एक आम चिंता जताई जा रही है कि एक ज़िम्मेदार देश होने के नाते भारत में अपनी सीमा और अपने इलाक़े को महफ़ूज़ रखने का प्रावधान होना चाहिए, इसलिए ऐसे विधेयक की ज़रूरत है."
उन्होंने कहा, "यह किसी फ़र्म या कंपनी को मैसेज देने का सवाल नहीं है, बल्कि यह हमारी अपनी सुरक्षा की चिंता से जुड़ा सवाल है."
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