बिहार ने शराबबंदी पर नेपाल से मांगी मदद

- Author, उमाकांत खनाल
- पदनाम, बीबीसी नेपाली सेवा के लिए
शराबबंदी को सफ़ल बनाने के लिए बिहार ने पड़ोसी देश नेपाल से मदद मांगी है.
आशंका जताई जा रही है कि नेपाल में शराब की बिक्री आसान होने की वजह से सीमा पार से शराब ख़रीदकर बिहार लाई जा सकती है.
बिहार के अधिकारियों का कहना है कि नेपाल के अधिकारियों से इस तरह के व्यापार की कोई भी सूचना मिलने पर कार्रवाई करने में आसानी होगी.
बिहार से सटे नेपाल के झापा ज़िले और बिहार के किशंनगंज ज़िले की सीमा पर तैनात अधिकारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर बैठक भी हुई है.
बैठक में बिहार में शराब पर लागू प्रतिबंध और इसके नियमों पर चर्चा हुई.

इस बैठक में मौजूद 'झापा' के प्रमुख सहायक ज़िलाधिकारी गोविंद सापकोटा के मुताबिक़, "बिहार के अधिकारियों ने कहा कि इस नीति को लागू करने के लिए आपका सहयोग ज़रूरी है, और हमने भी इसमें सहयोग देने का वादा किया है."
बिहार में शराब के सेवन या इसकी बिक्री पर दस लाख रुपये तक ज़ुर्माना और उम्र क़ैद या इससे भी बड़ी सज़ा का प्रावधान है.
बिहार के किशनगंज़ ज़िले के ज़िलाधिकारी पंकज दीक्षित का कहना है कि नेपाल में शराब की बिक्री का नियम बहुत ही सरल है, इसलिए बिहार के लोग नेपाल से शराब ख़रीद सकते हैं. वो नेपाल से शराब की ऐसी किसी भी ख़रीद की सूचना चाहते हैं.

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नेपाल के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता यादव कोइराला का कहना है कि दोनों देशों में शराब के लिए अलग-अलग क़ानून होने से 'सूचना देने' के मुद्दे को आपस की बातचीत से सुलझाना होगा.
उनके मुताबिक़, यह विषय दोनों देशों के अधिकारों को आपसी समझदारी से सुलझाना होगा. यह बताना आसान नहीं है कि क़ानून या सरकार को क्या करना चाहिए.
बिहार की नीतीश सरकार ने 5 अप्रैल से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी है.
पहले सरकार ने एक अप्रैल से राज्य में देसी शराब की बिक्री और निर्माण पर पाबंदी लगाई थी.

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अब बिहार में देसी के साथ-साथ विदेशी शराब भी उपलब्ध नहीं होगी. राज्य में शराबबंदी नीतीश कुमार के चुनावी वादों में शामिल था.
बिहार सरकार ने यह भी कहा है कि सूबे में सेना की छावनियों को छोड़कर अब होटल, बार, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर भी शराब नहीं मिलेगी. इस संबंध में अब कोई लाइसेंस भी जारी नहीं किया जाएगा.
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