असम: हिंसा की डर से कार्यकर्ताओं के बीमे का ऐलान

लोकसभा सांसद सिराजुद्दीन अज़मल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ.

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इमेज कैप्शन, लोकसभा सांसद सिराजुद्दीन अज़मल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ.
    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

असम में विधानसभा चुनाव लड़ रही ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के लोकसभा सांसद सिराजुद्दीन अज़मल ने यहां के चुनाव में व्यापक पैमाने पर चुनावी हिंसा की आशंका को देखते हुए अपनी पार्टी के समर्थकों के लिए बीमा करवाने का ऐलान किया है.

लेकिन उनकी इस घोषणा के बाद प्रदेश में कई जगह विरोध भी हुआ है. कथित तौर पर ऐसे भड़काऊ भाषण के लिए सांसद अज़मल के ख़िलाफ़ हाल ही में चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का एक मामला भी दर्ज किया गया है. जिला निर्वाचन अधिकारी प्रशांत बरूआ ने सांसद के खिलाफ जमुनामुख थाने में आईपीसी की धारा 153 (ए) / 171 (एफ) के अधीन एक मामला (सं- 30/16) पंजीकृत करवाया है.

असम में 4 और 11 अप्रैल को विधानसभा के लिए मतदान होने है. ऐसे में अल्पसंखयक नेता एंव मौलाना बदरूद्दीन अज़मल के छोटे भाई सिराजुद्दीन के बीमा करवाने वाले बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है.

बरपेटा से सांसद सिराजुद्दीन अज़मल ने जमुनामुख इलाके में पार्टी कार्यक्रताओं की बैठक में कहा कि चुनावी हिंसा में मारे जाने वाले पार्टी के प्रत्येक समर्थक और कार्यकर्ता के लिए पांच लाख तथा हाथ-पैर टूटने की हालत में दो लाख रुपए का बीमा करवाया जाएगा.

एक चुनावी रैली को संबोधित करते एआईयूडीएफ़ के मुखिया बदरूद्दीन अज़मल.

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सांसद सिराजुद्दीन ने अपने भाषण में कहा कि बाकी सारी पार्टियों को भी अपने गरीब कार्यकर्ताओं के लिए ऐसी पहल करनी चाहिए. उन्होंने पिछले चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि मतदान के आगे-पीछे बेशुमार हिंसा की घटनाएं होती आई हैं. इसलिए सभी कार्यकर्ता बीमा करवा लें.

सांसद ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि इस तरह के बीमा के लिए 716 रुपए की किश्त जमा करनी होती है, लेकिन जो गरीब कार्यकर्ता यह राशि जमा नहीं करवा सकते उनकी तरफ से सांसद यह रकम जमा करवा देंगे.

अज़मल की पार्टी इस बार के विधानसभा चुनाव में किंग मेकर की भूमिका निभाने का दावा कर रही है. मौजूदा विधानसभा में सत्ताधारी कांग्रेस के बाद एआईयूडीएफ़ के सबसे अधिक 18 विधायक हैं.

कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा और एआईयूडीएफ़ की तरफ से राज्य में वोटों के ध्रुवीकरण की चेष्टा का प्रमाण बताया है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस पर संज्ञान लेने का अनुरोध भी किया.

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असम कांग्रेस मीडिया सेल के सचिव रितुपर्ण कुंवर ने बीबीसी से कहा, "अज़मल भाईयों के पास सकरात्मक राजनीतिक सोच का अभाव है. इसलिए वे सबकुछ व्यवसायिक तरीके से सोचते है. उनका अपना फ़ायदा होना चाहिए, अगर पार्टी कार्यकर्ता मरते है तो मरे. बीमा करवा देंगे और मरने पर पैसा दे देंगे."

जबकि अन्ना हजारे टीम के सदस्य अखिल गोगोई के संगठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति ने सांसद के इस बयान को भड़काऊ बयान करार देते हुए उनका पुतला जलाकर अपना विरोध जताया है.

भाजपा ने अज़मल भाईयों को हिंसा का प्रतीक बताया है. प्रदेश भाजपा के महासचिव विजय गुप्ता कहना है, "जिसकी जैसी सोच होती है वह वही बात करता है. अज़मल भाईयों की सोच में हमेशा सांम्प्रदायिक हिंसा की बात रहती है और इसी का प्रमाण है कि सांसद अज़मल अपने कार्यकर्ताओं को बीमा करवाने की बात कह रहें है. ऐसी हिंसात्मक बात करने वाले अज़मल भाईयों के लिए असम में कोई स्थान नहीं है, वे जहां से आए है वहीं चले जाएं."

अभी कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में राजनीतिक दलों द्वारा अपने कार्यकर्ताओं के जीवन बीमा करवाने की घटना सामने आई थी.

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एआईयूडीएफ़ के महासचिव चंपक कलिता ने अपने एक बयान में कहा है कि सांसद सिराजुद्दीन ने सभी राजनीतिक कर्मियों को जीवन बीमा करा लेने की सलाह मात्र दी है. उन्होंने किसी तरह से राजनीतिक हिंसा की संभावना का इशारा नहीं किया है.

अज़मल फांउडेशन का काम देख रहे ख़सरूल इस्लाम का कहना है कि सांसद ने पिछले चुनाव मे कांग्रेस-भाजपा की गुंडागर्दी को ध्यान में रखते हुए इस बार कार्यकर्ताओं को बीमा का महज एक सुझाव दिया है और यह उनका व्यक्तिगत सुझाव है.

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