'यह अन्ना के ख़िलाफ़ राजनीतिक षड्यंत्र है'

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भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने वाले अन्ना हज़ारे के संगठन 'भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन न्यास' के ट्रस्टियों को पुणे क्षेत्र के ज्वाइंट चैरिटी कमिश्नर ने निलंबित कर दिया है.
न्यास के नाम से 'भ्रष्टाचार' शब्द न हटाने पर यह कार्रवाई की गई है.
ज्वाइंट कमिश्नर ने तीन महीने पहले न्यास को नोटिस देकर कहा था कि भ्रष्टाचार ख़त्म करना सरकार का काम है.
इस कार्रवाई और पूरे मामले को लेकर बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने न्यास के वकील मिलिंद पवार से बात की.
उन्होेंने बताया कि ज्वाइंट कमिश्नर ने नोटिस जारी किया और कहा कि ट्रस्ट के नाम भ्रष्टाचार शब्द जुड़ा है, इसे हटाएं क्योंकि भ्रष्टाचार मिटाना सरकार का काम है. इसलिए आप इस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकते.
नोटिस के बाद पवार ने जवाब दिया कि ये सभी ट्रस्टी मीटिंग में बैठकर फ़ैसला करेंगे. जब तक मीटिंग में फ़ैसला नहीं होता, हम ट्रस्ट का नाम नहीं बदल सकते.

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पवार ने कहा कि इस संगठन ने महाराष्ट्र में छह मंत्रियों का भ्रष्टाचार उजागर किया और उसके बाद वे बर्खास्त हुए. संगठन के इस तरह के काम समाज हित में हैं. इसलिए हमने आवेदन दिया कि हम इतनी जल्दबाज़ी में नाम नहीं हटा सकते.
मगर ज्वाइंट कमिश्नर ने हमारे आवेदन को ठुकरा दिया.
अन्ना हज़ारे ने चैरिटी कमिश्नर से कहा है कि 'भ्रष्टाचार' शब्द का इस्तेमाल करने वाली जितनी संस्थाएं हैं, उनमें से कितनी संस्थाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है?
पवार ने कहा कि यह अन्ना के ख़िलाफ़ राजनीतिक साज़िश है. ट्रस्ट इसके ख़िलाफ़ अादलत में याचिका दायर करेगा.
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