'जो पाक के क़रीब गया, राजनीति में नहीं टिका'

नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ़

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महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक हुई पाकिस्तान यात्रा की आलोचना की है.

अपने मुखपत्र 'सामना' में शिवसेना ने कहा है कि 'जो पाकिस्तान के क़रीब जाता है वो भारतीय राजनीति में लंबे समय तक नहीं टिक पाता.'

शिवसेना ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए ये बात कही है.

अटल बिहारी वाजपेयी और परवेज़ मुशर्रफ़

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शिवसेना ने सोमवार को कहा कि जो नेता पाकिस्तान के क़रीब गए उनका राजनीतिक करियर हशिए पर चला गया.

शिवसेना ने आरोप लगाया कि 'पड़ोसी देश की ज़मीन लाखों बेकसूर भारतीयों के ख़ून से सनी है.'

शिवसेना ने सामना में लिखा कि लालकृष्ण आडवाणी एक बार जिन्ना की मज़ार पर गए थे और उनकी तारीफ़ की थी, इसके बाद से उनके राजनीतिक करियर का ग्राफ़ गिरता चला गया और आज वो हाशिए पर हैं.

लाल कृष्ण आडवाणी

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लेख में कहा गया कि वाजपेयी ने लाहौर के लिए बस सेवा शुरू की और आगरा में मुशर्रफ़ का स्वागत किया. लेकिन इसके बाद वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा दोबारा सत्ता में नहीं आ सकी.

शिवसेना ने ये सवाल भी किया कि यदि कांग्रेस का कोई प्रधानमंत्री अचानक पाकिस्तान पहुँच जाता तो भाजपा की प्रतिक्रिया क्या होती?

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काबुल से नई दिल्ली लौटते हुए रास्ते में लाहौर में रुके थे और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से उनकी लंबी बातचीत हुई थी.

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