चेन्नईः लोगों को खाना और कंबल नहीं चाहिए

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, चेन्नई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

पिछले चार हफ़्तों से लगातार बारिश का क़हर झेल रहे चेन्नई और पड़ोस के प्रभावित ज़िलों में सभी तरह की राहत सामग्री भेजी जा रही है.

लेकिन इस राहत सामग्री में से ज़्यादातर चीज़ों की प्रभावित लोगों को ज़रूरत नहीं है.

चेन्नई में बाढ़ से प्रभावित लोगों को इतना भोजन और अन्य खाद्य सामग्री मिल गई है कि अब वे उसे लेने से इंकार कर रहे हैं.

सुब्रमनि दफ़्तर के बाद बारिश के पानी में घिरे लोगों को खाना पहुंचाने जाती हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "लोग कह रहे हैं कि उन्हें खाना नहीं चाहिए. स्वयंसेवकों और ग़ैर सरकारी संगठनों समेत बहुत से लोग भोजन पहुंचा रहे हैं. इसलिए वो खाने की सामग्री लेने से इंकार करते हैं. उन्हें मोमबत्ती, पीने का पानी और चादरें चाहिए क्योंकि वे लगभग अपने घरों से बाहर रह रहे हैं."

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बैंगलुरु, हैदराबाद और कोच्चि जैसे शहरों के लोग राहत सामग्री में कंबल और गर्म कपड़े भी जुटा रहे हैं.

लेकिन चेन्नई जैसे तटवर्ती शहर के गर्मी और उमस भरे मौसम में इनकी ज़रूरत नहीं पड़ती.

ग्यारह वर्ष पहले जब तमिलनाडु में सूनामी आई थी तब भी वहां टनों राहत सामग्री पहुंची थी.

उस वक़्त भी टीवी चैनलों में कन्याकुमारी के ज़िला प्रशासन के दफ़्तर के बाहर हज़ारों कंबलों का ढेर लगा हुआ दिखाया गया था, जिससे यहीं बात ज़ाहिर होती थी कि सूनामी प्रभावित लोगों को इस इलाक़े में कंबल की ज़रूरत नहीं थी.

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वसंत और मलकोंडैया ग्यारह अपार्टमेंट वाली एक इमारत में रहते हैं. दो दिनों से वो हरेक अपार्टमेंट से पैसा इकट्ठा कर रहे हैं.

मलकोंडैया ने बताया, "आज हमने 25,000 रुपए जमा किए. दस हज़ार रुपए खाना बनाने में ख़र्च हुए और छह हज़ार पानी में, 2,500 रुपए के बिस्किट ख़रीदे गए. बाक़ी पैसों से हम एक वाहन किराए पर लेंगे और ये सामान बांटने जाएंगे."

विजय एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं और स्वयंसेवकों के एक दल का हिस्सा हैं जो लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रहा है.

विजय ने भी कहा, "हमसे भी लोगों ने कहा कि उन्हें खाना नहीं चाहिए क्योंकि सभी वहां खाने की चीज़ें बांट रहे हैं. उन्हें मोमबत्ती और चादरें चाहिए. तो आज हम मोमबत्ती ले आए. कल हम चादरें ले आएंगे."

निर्मल नाम के एक और राहतकर्मी, जो पेशे से इंजीनियर हैं, उन्होंने बताया कि तीन चार दिन में ट्रांसफॉर्मर ठीक हो जाएगा और बिजली सेवा बहाल हो जाएगी. तब तक लोगों को मोमबत्ती और चादरों की ज़रूरत है.

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