नए अंतरराष्ट्रीय बैंक का मुखिया चीन

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चीन की अगुआई में स्थापित वर्ल्ड बैंक की प्रतिद्वंद्वी एक नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्था एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेन्ट बैंक (एआईआईबी) के लिए हस्ताक्षर 50 देशों ने हस्ताक्षर किए.
बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में जमा हुए 50 देशों के प्रतिनिधियों ने उस अनुच्छेद पर हस्ताक्षर किए जिससे एआईआईबी का कानूनी ढांचा तय होगा.
यूके, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया संस्थापक सदस्य हैं.
ज़्यादातर एशियाई देशों और मध्य-पूर्वी देश औऱ लातिन अमरीकी देश इससे जुड़े हैं.
चीन पहला औऱ भारत दूसरा बड़ा शेयरधारक

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चीन के वित्त मंत्रालय के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया है कि 30.34 प्रतिशत के साथ चीन बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक है.
जबकि भारत 10-15 प्रतिशत शेयरों के साथ दूसरा सबसे बड़ा शेयर धारक है. जबकि रूस और जर्मनी तीसरे औऱ चौथे बड़े शेयरधारक हैं.
अमरीका कर रहा है नए बैंक का विरोध

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जापान औऱ अमरीका एआईआईबी का विरोध करने वाले दो बड़े देश हैं.
अमरीका इसे चीन का प्रभाव बढ़ने की दिशा में उठाया गया कदम मानता है.
क्या है चीन का फायदा?

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बीबीसी की चीन की संपादक कैरी ग्रेसी के मुताबिक यह केवल चीन की कूटनीतिक जीत नहीं है, इससे चीन के आर्थिक लक्ष्यों की भी पूर्ति होगी.
चीन अपना आर्थिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए कई नए आर्थिक संस्थानों पर ज़ोर देता रहा है. बीजिंग में बीबीसी के मार्टिन पेशन्स के मुताबिक वर्ल्ड बैंक जैसी बड़ी आर्थिक संस्थाओं में वर्चस्व की कमी से चीन बौखलाया हुआ है.
चीन वित्त मंत्री लू जिवेई ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि उन्हें भरोसा गै कि इस साल के अंत तक एआईआईबी काम करना शुरू करेगा.
इस साल के अंत तक सात अन्य देश भी इससे जुड़ेंगे.
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