'पानी नहीं बरसा तो हम ख़त्म हो जाएंगे'

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बैंगलौर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत के राज्य तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में गर्मी दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन दोनों राज्यों में गर्मी की वजह से 500 लोग दम तोड़ चुके हैं.
तेलंगाना के नलगोंडा ज़िले में सबसे अधिक लोगों की मौत हुई है. यहां गर्मियों में तापमान आमतौर पर 44 या 45 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच जाता है.
लेकिन इस बार यहां गर्मी अपने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है. इसकी वजह से लोग घरों के भीतर रहना ही पसंद कर रहे हैं.
'चमगादड़ पेड़ से टपक रहे हैं'

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गर्मी में घर के भीतर रहना पसंद करने वालों में से रवींद्र रेड्डी भी एक हैं.
रवींद्र रेड्डी कहते हैं, ''लू लगने की वजह से मेरे दो कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हैं. 18 लोगों में से तीन या चार ही काम पर आ रहे हैं. वो भी इसलिए कि उनके घर मेरे कारखाने से ज्यादा दूर नहीं हैं. गर्मी इतनी है कि मैं खुद भी घर से निकल नहीं पाता हूं.''
रवींद्र बताते हैं कि गर्मी और लू के कारण उनके कारखानों में उत्पादन कम हो गया है.
जीव-जंतु भी बेहाल हैं. रवींद्र कहते हैं, ''चमगादड़ पेड़ से ऐसे टपक रहे हैं जैसे पत्तियां झरती हैं. पता चला है कि 15-20 मोर भी गर्मी से मारे गए हैं. पानी की कमी है. जलस्तर गिर गया है.''
'हम तो ख़त्म हो जाएंगे'

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खेती-किसानी करने वाले अहमद पाशा धान उगाते हैं, लेकिन भीषण गर्मी की वजह से इस बार फसल के लिए अपने खेत को तैयार नहीं कर पा रहे हैं.
वे कहते हैं, ''बोरवेल और कुंए में पानी नहीं है. पानी सूखने से मवेशियों को खिलाने के लिए जो चारा उगाया था, वो भी सूख गया है. मवेशी कम दूध दे रहे हैं.''

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उनका कहना है, ''गर्मी के कारण कोई कुछ काम नहीं कर पा रहा है. मजदूरों ने खेतों पर आना बंद कर दिया है. पीने के पानी की भी किल्लत है. अगले एक-दो हफ़्ते में पानी नहीं बरसा तो हम ख़त्म हो जाएंगे.''
ऐसे में पाशा और उन जैसे तमाम लोग बस यही दुआ कर रहे हैं कि गर्मी से जल्दी निजात मिले.
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