मिलिए एमबीबीएस वाले 'मुन्ना भाइयों' से

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
संजय दत्त की फ़िल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस याद है आपको? छत्तीसगढ़ में ऐसे मुन्ना भाइयों और बहनों की भरमार है.
पिछले साल भर में पुलिस ने कम से कम 45 ऐसे मेडिकल छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, जिन पर शक़ है कि इनकी जगह मेडिकल प्रवेश परीक्षा किसी और ने दी थी.
ऐसे लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया और कई मेडिकल छात्र तो ज़ेल की हवा भी खा चुके हैं.
कुछ फ़रार हैं तो कुछ जमानत पर. कुछ छात्र अभी भी पढ़ाई कर रहे हैं और इन सब के बीच पुलिस की कार्रवाई जारी है.
आलोक पुतुल की रिपोर्ट
रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉक्टर विनीत जैन कहते हैं, "अदालत से जमानत ले कर आने के बाद हमारे पास ऐसा कोई नियम नहीं है कि हम इन्हें पढ़ाई से रोकें. इसलिए ऐसे तीन दर्जन से अधिक छात्र महाविद्यालय में अभी भी पढ़ाई कर रहे हैं."
ज़ाहिर है, मुन्नाभाई होने के आरोपों का सामना कर रहे ऐसे छात्र पिछले कई साल से फ़र्स्ट ईयर की परीक्षा भी पास नहीं कर पाए हैं.
साल 2008 में छत्तीसगढ़ के प्री-मेडिकल टेस्ट के टॉपर फज़ल मसीह को ही लें.
रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में दाखिला लिए छह साल से अधिक का समय हो चुका है.

क़ायदे से उन्हें अब तक डॉक्टर बन जाना चाहिए था. लेकिन वे इन छह सालों में एक भी परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं.
जेल से लौट कर फ़ज़ल मसीह इन दिनों छुट्टियां मनाने राज्य से बाहर हैं. उनकी मां कहती हैं, "इस बारे में हमें कोई बात नहीं करनी."
फर्स्ट इयर में ही कई साल गुजार देने वालों में फ़ज़ल अकेले नहीं हैं. रायपुर के चिकित्सा महाविद्यालय के आंकड़ों को देखें तो कम से कम 28 छात्र ऐसे हैं, जो अब तक फर्स्ट इयर में ही अटके हुए हैं.
जांच

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मेडिकल कॉलेज के डीन अशोक चंद्राकर का कहना है कि इस तरह से फेल होने वाले छात्र 'मुन्ना भाई' ही हैं, वरना फर्स्ट सेमेस्टर में ही कोई अटका नहीं रह सकता.
हालांकि रायपुर मेडिकल कॉलेज में ऐसे भी छात्र हैं, जिन्होंने अलग-अलग कारणों से अपनी पढ़ाई पूरी करने में कई-कई साल लगा दिए.
साल 1999 में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा देने वाले सागर ठाकुर को इस साल जा कर डिग्री मिलेगी.
मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता विनीत जैन बताते हैं कि एक छात्र गोकुल बंजारे को दाखिला लेने से लेकर एमबीबीएस की डिग्री लेने में पूरे 18 साल लग गए.
राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमर अग्रवाल कहते हैं, "फर्जी तरीके से चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश लेने वाले किसी भी छात्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यही कारण है कि पूरे मामले की जांच सीआईडी कर रही है और कई के ख़िलाफ़ तो अदालतों में आरोप पत्र भी पेश किए जा चुके हैं."
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