क्यों मुश्किल में हैं नवीन पटनायक?

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- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर, ओडिशा से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
चुनाव में भारी जीत के बाद अभी चार महीने भी नहीं हुए कि ओडिशा की सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) और इसके 'सुप्रीमो' नवीन पटनायक को कम से कम पांच बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
नवीन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है अपने अभी तक के बेदाग़ दामन को चिट फण्ड घोटाले के धब्बों से बचाना.
पिछले दो महीनों में जांच के दौरान सीबीआई ने बीजद के एक सांसद और एक पूर्व विधायक के घरों में छापे मारे.
सीबीआई बीजद के वरिष्ठ नेता प्रभात त्रिपाठी से पूछताछ करने के बाद कम से कम दो मंत्रियों, दो पूर्व मंत्रियों और लगभग एक दर्ज़न बीजद विधायकों से भी पूछताछ करने वाली है.
पढ़िए संदीप साहू की पूरी रिपोर्ट.
बीजद और नवीन के लिए दूसरी चुनौती है कैग की रिपोर्ट से सामने आया ज़मीन घोटाला है.

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इस रिपोर्ट के मुताबिक़ सत्तारूढ़ दल के मंत्रियों, विधायकों और अन्य नेताओं तथा सरकार के चहेते अधिकारियों और पुलिस अफ़सरों ने भुवनेश्वर, कटक और अन्य शहरों में सैकड़ों करोड़ रुपए की ज़मीन या घर पर ग़ैर क़ानूनी ढंग से कब्ज़ा कर रखा है.
चुनाव से पहले और बाद में पार्टी से दरकिनार किए गए वरिष्ठ नेताओं में व्याप्त गहरा असंतोष नवीन की तीसरी चुनौती है.
यह चुनौती कितनी गंभीर है इसका अंदाजा शनिवार को मिला जब पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व वित्त मंत्री प्रफुल्ल घड़ाई को नवीन के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी के बाद बीजद से निकाल दिया गया.
सीबीआई 'जांच की आंच'
नवीन के 14 साल से अधिक कार्यकाल में चिट फण्ड और ज़मीन घोटालों में हो रहे खुलासों के बाद शायद पहली बार स्थानीय मीडिया अपनी आवाज़ बुलंद कर रहा है.
इस कारण गुरुवार को एक आदेश जारी करके नवीन सरकार ने राज्य सचिवालय के मंत्रियों के कॉरिडोर में पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है.

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लेकिन नवीन और उनकी पार्टी के सामने सबसे मुश्किल चुनौती हज़ारों करोड़ रुपए के खनिज घोटाले में सीबीआई जांच की संभावना है.
अगर इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जांच का आदेश देती है तो यह तय है की यह जांच मंत्रियों या पार्टी के नेताओं से आगे बढ़कर ख़ुद नवीन पटनायक के दरवाज़े पर पहुँच सकती है.
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