इरोम शर्मिला को रिहा करने का आदेश

इरोम शर्मीला

मंगलवार को मणिपुर की एक अदालत ने इरोम शर्मिला को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है.

मणिपुर पूर्व की सत्र अदालत में केएच मणि और वाई देवदत्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश गुनेश्वर शर्मा ने कहा कि 'आत्महत्या की कोशिश की मंशा का आरोप साबित नहीं होता'.

आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार उनकी सेहत को लेकर उचित उपाय कर सकती है.

इरोम शर्मिला के वक़ील खैदाम मणि ने बीबीसी को बताया, "सेक्शन 309 के तहत इरोम के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की गई है लेकिन प्रतिपक्ष के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित किया जा सके कि इरोम ने आत्महत्या को कोशिश की है. राज्य सरकार के पास उच्च न्यायलय में जाने का विकल्प है देखना होगा कि आगे क्या होता है."

खैदाम मणि का कहना है कि इरोम की भूख हड़ताल जारी रखने का फ़ैसला उनका अपना है लेकिन कोर्ट ऑर्डर में कहा गया है कि राज्य इरोम की सेहत और सुरक्षा के लिए ज़रूरी क़दम उठा सकती है और गिरफ़्तारी इसके लिए ज़रूरी क़दम नहीं है.

सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (आफ़्स्पा) हटाए जाने की मांग को लेकर क़रीब 14 साल से इरोम शर्मिला मणिपुर में भूख हड़ताल कर रही हैं.

वह 13 साल से मणिपुर के एक अस्पताल में न्यायिक हिरासत में थीं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>