इंफ़ोसिस में चलेगा विशाल सिक्का का सिक्का?

विशाल सिक्का, इंफ़ोसिस के सीईओ

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इमेज कैप्शन, विशाल सिक्का के ऊपर कंपनी को नए रूप में ढालने की चुनौती है.
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बैंगलोर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति की पहचान इंफ़ोसिस में हुए नेतृत्व परिवर्तन को उद्योग जगत और बाज़ार में बहुत सतर्कता से देखा जा रहा है.

इंफ़ोसिस के नेतृत्व के लिए अब तक इसके संस्थापकों में से ही किसी को चुना जाता रहा था लेकिन कंपनी ने इस बार यह परिपाटी बदल दी है.

बहुराष्ट्रीय कंपनी एसएपी एजी के कार्यकारी बोर्ड से इंफ़ोसिस के सीईओ और एमडी बने विशाल सिक्का की अग्निपरीक्षा कंपनी के बंगलौर स्थित मुख्यालय में कुर्सी संभालते ही शुरू हो जाएगी.

सिक्का की नियुक्ति ने कंपनी के नेतृत्व को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को ख़त्म कर दिया है.

कंपनी के गिरते प्रदर्शन के मद्देनज़र एनआर नारायण मूर्ति को पिछले साल रिटायरमेंट से वापस आकर फिर से नेतृत्व संभालना पड़ा था. उसके बाद से तक़रीबन दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी कंपनी छोड़ कर जा चुके हैं.

इंफ़ोसिस के पूर्व सीएफओ वी बालकृष्णन ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "कंपनी के नेतृत्व को लेकर एक बड़ी चिंता थी. सिक्का एक बेहतर नाम हैं हालांकि वो प्रोडक्ट कंपनी का अनुभव रखते हैं लेकिन अभी कई चुनौतियाँ बाक़ी हैं."

बनानी होगी नई टीम

किसी सर्विस कंपनी में कर्मचारियों के साथ बेहतर संबंध बनाना काफ़ी महत्वपूर्ण होता है. बालकृष्णन कहते हैं, "यह किसी सर्विस कंपनी का सबसे प्रमुख पक्ष होता है. उन्हें फिर से एक नई टीम बनानी होगी क्योंकि ज़्यादातर लोग छोड़कर जा चुके हैं."

पोलारिस के पूर्व सीएफओ और डिप्टिश इनवेस्टमेंट के फंड मैंनेजर रह चुके प्रभाल रॉय कहते हैं, "यह आसान नहीं होने जा रहा."

रॉय कहते हैं, "बौद्धिक तौर पर वो इसमें सक्षम हैं. वो कभी भी सीईओ नहीं रहे हैं और इंफ़ोसिस जैसी बड़ी सर्विस कंपनी के प्रमुख के पद का संभालना चुनौतीपूर्ण होना ही है. असल सवाल है कि वो कितनी तेज़ी से नई ज़रूरतों के हिसाब से ढलते हैं. उद्योग जगत और बाज़ार के लोग उनके काम पर बारीक नज़र रखेंगे."

इंफ़ोसिस के नारायण मूर्ति

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सिक्का को लाने का कहीं यह मतलब तो नहीं कि अब इंफ़ोसिस धीरे-धीरे सर्विस कंपनी से प्रोडक्ट कंपनी बनने की तरफ़ बढ़ेगी?

प्रभुदास लीलाधर कंपनी में वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट शशि भूषण कहते हैं, "उपभोक्ताओं को दी जानी वाली सुविधाएँ अलग नहीं होतीं. विभिन्न तकनीकी के कनवर्जेंस ने पहले ही सॉफ़्टवेयर और सर्विस के बीच के भेद को धूमिल कर दिया है. इसलिए आईटी सर्विस को बेचना सॉफ़्टवेयर प्रोडक्ट बेचने से ज़्यादा अलग नहीं होना चाहिए."

बालकृष्णन भी भूषण की बात से सहमत हैं लेकिन वो मानते हैं कि "सर्विस कंपनी से प्रोडक्ट कंपनी में बदलने में काफ़ी लंबा वक़्त लगेगा."

मुश्किल होगी राह

लेकिन रॉय बालकृष्णन और भूषण दोनों से असहमति जताते हैं. उनका कहना है, "जिस तरह इंफ़ोसिस का गठन हुआ है उसे देखते हुए उसे बदलना आसान नहीं होगा. बाज़ार में उसकी साख एक सर्विस कंपनी की है. पूरी कंपनी को एक नए कलेवर में ढालना होगा."

रॉय कहते हैं, "इंफ़ोसिस की तकनीकी पृष्ठभूमि को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इसका ध्यान तकनीकी आधारित परामर्श सेवा शुरू कर सकती है. इसमें ज़्यादा मुनाफ़ा होता है. कंपनी इस काम के लिए फिट भी है लेकिन यह बड़ी चुनौती भी होगी."

भूषण कहते हैं कि "प्रोडक्ट, प्लेटफॉर्म और सॉल्यूशन" से इंफ़ोसिस की कुल आय का छह प्रतिशत हिस्सा आता है. लेकिन यह उम्मीद की जा सकती है कि इंफ़ोसिस अपना ध्यान <link type="page"><caption> इंफ़ोसिस 3.0 </caption><url href="http://www.infosys.com/investors/reports-filings/annual-report/annual/Documents/AR-2012/Accelerating_growth.html" platform="highweb"/></link>(कंपनी का नया आधुनिक स्वरूप) पर लगाएगी."

इंफ़ोसिस का कार्यालय

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इंफ़ोसिस के कारोबार में गहरी रुचि रखने वाले एक पेशेवर ने नाम न जाहिर करने की शर्त रखते हुए बीबीसी हिन्दी से कहा, "इंफ़ोसिस प्रोडक्ट के मामले में जोखिम उठाने से बचता रहा है. कंपनी के इसी रवैए को बदलने में ही सिक्का की असली क्षमता का दुनिया को पता चलेगा. यह एक पूरी तरह नई इंफ़ोसिस होगी."

रॉय कहते हैं, "किसी प्रमोटर के बिना किसी कंपनी में घुसना बेहतर होता है बशर्ते उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए."

नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही कंपनी में आने वाले बदलाव के बारे में नारायण मूर्ति ने ख़ुद ही इशारा किया है.

इस निर्णय की घोषणा करते हुए प्रेस वार्ता में नारायण मूर्ति ने बताया कि शिबु लाल कंपनी के सीईओ का पद और कृष गोपालकृष्णन भी कार्यकारी वाइस चेयरमैन का पद छोड़ेंगे और नारायण मूर्ति ख़ुद चेयरमैन इमेरिटस बनेंगे. उन्होंने कहा कि उनके बेटे रोहन मूर्ति भी उनके साथ ही कंपनी छोड़ेंगे. मूर्ति ने कहा, "मेरे दफ़्तर के लोग अब नई ज़िम्मेदारी निभाएँगे."

बदलाव की तरफ़ इशारा

नाम न बताने की शर्त पर इंफ़ोसिस के एक पूर्व कर्मचारी ने कहा, "सिक्का काफ़ी अधिकार के साथ आ रहे हैं. शनिवार को होने वाली सालाना आम बैठक के बाद मूल्यों में स्थिरता आएगी और 3200-3500 के बीच गंभीर ख़रीदारी होगी."

भूषण कहते हैं, "इंफ़ोसिस ने सीईओ का चुनाव करने में ग़ैर पारंपरिक क़दम उठाया है. संभव है कि ऊपरी प्रबंधन में नए सिरे से छंटनी हो."

लेकिन बाज़ार में सिक्का के नाम की घोषणा के बाद वैसा उत्साह नहीं दिखा जिसकी उम्मीद की जा रही थी. रॉय कहते हैं, "पिछले तीन दिनों में काफ़ी ज़्यादा क़यास लगाए जा रहे थे. इस दौरान कंपनी के बाज़ार भाव में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. लेकिन यह एक ऐसी कंपनी से जिसके महत्व को नकारा नहीं जा सकता."

सिक्का ने यह स्पष्ट किया कि नारायण मूर्ति का दिशा-निर्देश उन्हें हमेशा उपलब्ध रहेगा.

नारायण मूर्ति, इंफ़ोसिस

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प्रेस वार्ता का समापन करते हुए नरायाण मूर्ति ने कहा, "मुझे हिन्दी नहीं आती तो मैंने उनसे पूछा सिक्का का मतलब क्या होता है? हमारे सीएफओ ने कहा इसका अर्थ होता है क्वाइन (सिक्का). यानी विशाल सिक्का का मतलब हुआ ज़्यादा धन."

इंफ़ोसिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "उन्हें एक कंपनी में एक साल का हनीमून पीरियड मिलेगा."

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