दिल्ली में लड़कों से कम लड़कियां

- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत की 15वीं जनगणना के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक राजधानी दिल्ली में बच्चों का लिंगानुपात बहुत कम है.
यानि दिल्ली में छह साल की उम्र तक के बच्चों में हर 1000 लड़कों के मुकाबले 866 लड़कियां हैं.
जनगणना के मुताबिक पूरे देश में बच्चों का लिंगानुपात पिछले 50 सालों में अपने सबसे निचले स्तर पर है.
देश में ये अनुपात 914 है लेकिन राजधानी का स्तर इससे भी काफ़ी कम है.
पंजाब, हरियाणा जैसा हाल
भारत सरकार ने 17 साल पहले एक क़ानून पारित किया था जिसके तहत पैदा होने से पहले बच्चे का लिंग मालूम करना गैरका़नूनी है.
लेकिन पिछले सालों में बढ़ती साक्षरता और विकास के बावजूद लिंगानुपात बिगड़ा है.
विकास का प्रतीक माने जाने वाले भारत के समृद्ध उत्तरी राज्यों, पंजाब और हरियाणा में बच्चों का लिंगानुपात सबसे कम पाया गया है.
देश के सबसे उन्नत शहर माने जाने वाले दिल्ली के सबसे धनाढ्य ज़िले, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में लिंगानुपात 836 है.
ये हरियाणा (830) से कुछ ही ज़्यादा है. दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में वसन्त विहार, दिल्ली कैन्ट और नज़फगढ़ इलाके शामिल हैं.
दिल्ली में सेंटर फॉर वुमेन डेवलपमेंट स्टडीज़ की निदेशक मेरी जॉन के मुताबिक, "बच्चियां बड़ा करना अब और खर्चीला है क्योंकि पढ़ी-लिखी होने की वजह से वो अपने अधिकार, यानि अच्छी परवरिश, जायदाद में हक और एक बेहतर जीवन मांग सकती हैं."
मेरी कहती हैं कि समृद्ध परिवार भी बच्चियों पर खर्च नहीं करना चाहता, क्योंकि वो यही समझते हैं कि लड़कियां शादी के बाद अपने मां-बाप का ख्याल नहीं रख पातीं और इसलिए बोझ हैं.
दिल्ली में महिलाएं ज़्यादा
जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या में इज़ाफा हुआ है.
साल 2001 की जनगणना में हर 1000 पुरुषों के मुकाबले 821 महिलाएं थी. इस गणना में महिलाओं की संख्या बढ़कर 866 हो गई है.
दिल्ली की जनगणना आयुक्त वर्षा जोशी के अनुमान के मुताबिक, "इसकी वजह है पिछले दस सालों में देशभर से रोज़गार की तलाश में दिल्ली आने वाले पुरुषों का अपने साथ अपनी पत्नी समेत पूरे परिवार को लेकर आने का बढ़ता चलन."
हालांकि दिल्ली में लिंगानुपात का ये आंकड़ा भी राष्ट्रीय स्तर (940) से काफ़ी कम है.












