मंत्री के ख़िलाफ़ आरोप पत्र, पार्टी बचाव में उतरी

गुजरात के गृह राज्यमंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में आरोप पत्र दाख़िल किया है. अमित शाह की अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी ख़ारिज हो चुकी है.
लेकिन सीबीआई के सामने पेश होने का वादा करने के बाद, अपनी बात से पलटे गुजरात के गृह राज्यमंत्री सार्वजनिक तौर अपना पक्ष ख़ुद रखने से बच रहे हैं.
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुप हैं लेकिन गुजरात सरकार के मंत्री और प्रवक्ता जयनारायण व्यास ने उनका बचाव करते हुए कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया से सहयोग के तरीक़े अलग-अलग हो सकते हैं.
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अभियुक्त मंत्री का ये कहते हुए बचाव करने की कोशिश की है कि सीबीआई का दुरुपयोग हो रहा है.
वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे और दावा किया गया था कि वे गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ हुए मुठभेड़ में मारे गए हैं. इसके बाद उनकी पत्नी कौसर बी और मामले के एक प्रत्यक्षदर्शी तुलसी प्रजापति को एक बस स्टैंड से अगवा किया गया था.
जहाँ कौसर बी का अब तक कोई अता-पता नहीं है और न ही उनका शव बरामद हुआ है, वहीं तुलसी प्रजापति के बारे में कहा गया कि वे एक मुठभेड़ में मारे गए लेकिन जिसके बारे में कई तरह के सवाल उठे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में इस पूरे मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी थी.
'तरीक़े अलग-अलग हो सकते हैं'
गांधीनगर से स्थानीय पत्रकार अजय उम्मट ने बीबीसी को बताया कि पिछले चार हफ़्ते से अमित शाह किसी केबिनेट बैठक में नही आ रहे थे क्योंकि उन्हें डर था कि सीबीआई किसी भी समय उन्हें पकड़ सकती है.
उनका कहना है कि आरोप पत्र दाख़िल होने के बाद अमित शाह पर इस्तीफ़ा देने का राजनीति दबाव बढ़ गया है.
उधर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने पहुँच रहे हैं.
दूसरी और गुजरात सरकार के मंत्री और प्रवक्ता जयनारायण व्यास ने बीबीसी संवाददाता अनुराधा प्रीतम के साथ बातचीत में अमित शाह का बचाव करने की कोशिश की है.
जब उनसे अमित शाह के सीबीआई के सामने न पेश होने के बारे में पूछा गया तो व्यास का कहना था, "मुझे इस शब्द का प्रयोग कि सीबीआई अमित शाह को ढूँढ रही है, ग़लत लगता है. वे ख़ुद सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए लेकिन उन्होंने अपने वकील को भेजा था. आदमी ख़ुद न्याया प्रक्रिया में शामिल हो सकता है या फिर अपने वकील को भेज सकता है."
जब उनसे बार-बार पूछा गया कि मंत्री ख़ुद कहाँ हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचने का प्रयास किया.

गुजरात सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास बोले, "कोई भी व्यक्ति पहले नागरिक है और फिर गृह मंत्री है. जो नागरिक के मौलिक अधिकार हैं, उनके तहत जो क़ानूनी प्रक्रिया करने की ज़रूरत है, अमित शाह वो कर रहे होंगे. तरीक़े अलग-अलग हो सकते हैं. अनुपस्थिति की वजह – ये उनका स्वतंत्र निर्णय हो सकता है. यदि व्यक्तिगत हैसियत से मुझे उनसे बात करने की ज़रूरत होगी तो मैं संपर्क कर लूँगा."
पंद्रह लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार में गृह राज्यमंत्री अमित शाह के अलावा कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और दो बैंक अधिकारियों सहित 15 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किया है और गंभीर आरोप लगाए हैं.
सीबीआई ने दो सिपाहियों और एक इंस्पेक्टर को इस मामले से मुक्त करते हुए उनके नाम आरोप पत्र से हटा लिए हैं.
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आरोप पत्र दाख़िल होने के बाद सीबीआई द्वारा अमित शाह की गिरफ़्तारी की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि उनकी अग्रम ज़मानत याचिका भी ख़ारिज हो चुकी है.
इससे पहले सीबीआई ने दो बार अमित शाह को पूछताछ के लिए तलब किया था लेकिन वे पेश नहीं हुए थे.












