ईडी के साये में आज रायपुर में हो रहा कांग्रेस का अधिवेशन

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के जिस मेलास्थल पर शुक्रवार से कांग्रेस पार्टी का तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हो रहा है, उसी इलाक़े में राज्य सरकार के श्रम, पर्यावरण और जीएसटी विभाग के दफ़्तरों में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की अलग-अलग टीमें फ़ाइलों और कंप्यूटरों को खंगालने और अफ़सरों से पूछताछ करने का काम कर रही हैं.
ईडी के अधिकारियों-कर्मचारियों का दल, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के साथ इन दफ़्तरों में बुधवार को पहुंचा था.
इससे पहले सोमवार को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और चंद्रदेव राय समेत आधा दर्जन कांग्रेस नेताओं के घर-दफ़्तर पर ईडी ने छापा मारा था.
इधर गुरुवार को ही असम में दर्ज एक शिकायत का हवाला देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को दिल्ली में हवाई जहाज से उतार कर गिरफ़्तार कर लिया गया.
पवन खेड़ा को भले कुछ ही घंटों के भीतर अंतरिम जमानत मिल गई लेकिन दिल्ली से रायपुर तक, कांग्रेस पार्टी हमलावर बनी रही कि रायपुर मे होने वाले कांग्रेस के 85वें महाधिवेशन को विफल करने के लिए केंद्र सरकार के इशारे पर ये सारी कार्रवाइयां हो रही हैं.
कांग्रेस अधिवेशन में शामिल होने रायपुर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कोशिश कर रही है कि किसी तरह कांग्रेस अधिवेशन न हो पाए.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "छत्तीसगढ़ की जनता और चीफ़ मिनिस्टर, कांग्रेस अध्यक्ष और तमाम उनके साथी मिनिस्टर्स, सभी लोग एक हो कर (केंद्र) सरकार का भी मुक़ाबला कर रहे हैं और ये हमारे प्लेनरी सेशन को कामयाब बनाने के लिए पूरा-पूरा काम कर रहे हैं."
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हालांकि भाजपा इन आरोपों को ख़ारिज कर रही है.
भाजपा के कोर ग्रूप के सदस्य और रायपुर के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, "अगर कोई अपराधी होगा तो उसे तो सज़ा मिलेगी, उसको पुलिस गिरफ़्तार करेगी, उसको रोकेगी. कांग्रेस के पास आज के समय में एक ही काम रह गया है- आरोप लगाना. दूसरा कोई काम नहीं है."
रायपुर से लेकर नवा रायपुर में कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन स्थल तक, तरह-तरह के होर्डिंग, पोस्टर और कांग्रेस पार्टी के झंडों से पटी हुई सड़कों पर लोगों का रेला उमड़ा पड़ा है.
इस अधिवेशन में देशभर से लगभग 20 हज़ार लोगों के शामिल होने का अनुमान है, जिनके लिए विशाल रसोईघर बनाया गया है.
अधिवेशन के लिए दर्जन भर वातानूकुलित विशाल डोम बनाए गए हैं. नेताओं के बैठने का मंच ही लगभग आधा एकड़ में बनाया गया है.
अधिवेशन स्थल पर लोगों को टटोलने की कोशिश करें तो विधानसभा चुनाव, भारत जोड़ो यात्रा, अधिवेशन में होने वाला खर्च, नेताओं के बीच होर्डिंग वार जैसे मुद्दों से सरकते हुए बातचीत केंद्रीय एजेंसियों पर ज़रुर पहुंचती है. छत्तीसगढ़ के लोगों के बीच तो ईडी, जैसे बातचीत का केंद्रीय विषय है.

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छापामारी और पूछताछ के 136 दिन
छत्तीसगढ़ में फरवरी 2020 में पहली बार आयकर विभाग ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के क़रीबी अफ़सरों और नेताओं के घर छापा मारा था.
उसी छापे में मिले कथित बातचीत के सबूतों के आधार पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया था कि 36,000 करोड़ रुपये के कथित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले के जिन दो आरोपी आईएएस अफ़सरों अनिल टूटेजा और आलोक शुक्ला को जेल भेजने की मांग करते हुए तब के विपक्षी नेता भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, प्रदर्शन किए थे, अदालत में याचिका दायर की थी, मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश बघेल उन्हीं दो अफ़सरों को इस मामले से बचाने के लिए न्यायिक अधिकारियों के साथ मिल कर षड्यंत्र कर रहे हैं.
यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने समय-समय पर छत्तीसगढ़ में कई कार्रवाई की.
यह पिछले साल अक्टूबर की 11 तारीख़ थी, जब ईडी ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के क़रीबी अफ़सरों और नेताओं के घर पर छापा मारा था. तब से से ईडी की कार्रवाई लगातार जारी है.
सरकार से जुड़े अफ़सरों और नेताओं पर छापामारी की यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है, जब इस साल राज्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं.
पिछले 136 दिनों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में ईडी की टीम ने कितनी जगहों पर, कितनी बार छापा मारा और कितने लोगों से पूछताछ की, इसका सार्वजनिक तौर पर कोई हिसाब-क़िताब नहीं है.
हर दिन सच-झूठ और अफ़वाह की शक़्ल में ख़बरें मीडियाकर्मियों के बीच तैरती रहती हैं. मीडियाकर्मियों के एक बड़े हिस्से को हर दिन ईडी के छापे और कार्रवाई से जुड़ी ख़बरों की प्रतीक्षा ज़रुर रहती है लेकिन अब ऐसी ख़बरों से कोई चौंकता नहीं है.

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रायपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "ईडी की कार्रवाई इतनी लंबी चल गई है कि अब कम से कम छापा-वापा में किसी की दिलचस्पी नहीं बची है."
"यह भी साफ़ नज़र आता है कि देर-सवेर ईडी की जांच की आंच कांग्रेस के दिग्गज नेताओं तक भी पहुंचेगी ज़रुर. लेकिन कब, बस इसकी प्रतीक्षा बनी हुई है. यह कांग्रेस के अधिवेशन के बीच भी हो सकता है और विधानसभा चुनाव की घोषणा के बीच भी."
ईडी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में नेताओं और अफ़सरों द्वारा परिवहन होने वाले कोयले पर प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी. यह रकम कई सौ करोड़ रुपये की है.
इस मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया, कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, लक्ष्मीकांत तिवारी और सुनील अग्रवाल समेत नौ लोगों को ईडी ने अब तक गिरफ़्तार किया है और ये सभी अभी जेल में हैं.
ईडी द्वारा अदालत में दायर आरोपपत्र में कई आईएएस, आईपीएस, नेता, अफ़सरों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप हैं.
एक आरोप पत्र में 277 करोड़ रुपये का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए दावा किया गया है कि एक राजनीतिक दल के वरिष्ठ राजनेता को 52 करोड़ रुपये दिए गए. इसी तरह छत्तीसगढ़ के विधायकों को 4 करोड़ रुपये तो पूर्व विधायकों और राजनेताओं को 6 करोड़ रुपये दिए गए.
ईडी के हवाले से राज्य के कई पुलिस व दूसरे अफ़सरों और उनके बच्चों के कथित वाट्सऐप चैट के कई सौ पन्ने सार्वजनिक हुए हैं, जिससे राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं.

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सफाई और पलटवार
हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले भी कई मौक़ों पर कह चुके हैं कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और ईडी की कार्रवाई महज राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए है.
सोमवार को कांग्रेस नेताओं के घर पर छापामारी के बाद कांग्रेस पार्टी ने ईडी दफ़्तर का घेराव किया, वहीं छापामारी करने वाली टीम को भी घेरा.
कांग्रेस पार्टी ने फ़ैसला किया है कि अब किसी भी कांग्रेसी के घर ईडी ने छापामारी की तो कांग्रेस पार्टी मौक़े पर पहुंच कर तब तक प्रदर्शन करेगी, जब तक ईडी की टीम वहां से चली न जाए.
इसके अलावा ईडी के ख़िलाफ़ कुछ मामले भी दर्ज़ कराए गए हैं.
कांग्रेस पार्टी की ओर से अलग-अलग राज्यों के चुनाव प्रभारी रह चुके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि जब वे और उनके मंत्रीमंडल के साथी झारखंड के चुनाव में सक्रिय हुए और उसके बाद जैसे ही परिणाम आए, छत्तीसगढ़ में आईटी ने छापामारी की. जब वो और उनकी टीम क्रमशः असम, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में सक्रिय हुई, तब केंद्रीय एजेंसियों ने छत्तीसगढ़ में सरकार से जुड़े लोगों पर छापा मारा.
भूपेश बघेल ने एक प्रेस कांफ्रेस में कहा, "अभी राष्ट्रीय अधिवेशन के समय भी लोग शंका कर रहे थे कि हो सकता है कि छापा पड़े और छापा पड़ ही गया... छत्तीसगढ़ में जो राष्ट्रीय महाधिवेशन होने वाला है, सब लोगों की निगाह यहां लगी हुई है और इस अधिवेशन में रोड मैप तैयार होगा 2024 का, 2023 के विधानसभाओं का. उससे भारतीय जनता पार्टी घबराई हुई है."

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लेकिन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह इन आरोपों को हास्यास्पद बताते हैं.
रमन सिंह कहते हैं, "ईडी की जांच एक सामान्य प्रक्रिया है, इसे लेकर भूपेश बघेल को दुखी नहीं होना चाहिए. ईडी की कार्रवाई सबूतों के आधार पर होती है. भूपेश बघेल विपक्ष में रहते हुए खुद ही ईडी पर भरोसा जताते हुए, प्रधानमंत्री को ईडी जांच के लिए चिट्ठी लिखते थे. अब जब ईडी जांच कर रही है तो वे इससे भागने की कोशिश कर रहे हैं."
कांग्रेस के अधिवेशन पर तंज कसते हुए रमन सिंह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में केवल ईडी और सीडी की ही चर्चा होगी. कहां कितनी छापेमारी हुई, कहां कितना पैसा मिला, तीन दिन के महाधिवेशन में केवल इसी बात पर चर्चा होगी.
रमन सिंह का बयान भले राजनीतिक तंज भर हो लेकिन यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि कांग्रेस का अधिवेशन इस 'ईडी चर्चा' से मुक्त तो नहीं ही होगा.
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