'पीएम मोदी ने किया आचार संहिता का उल्लंघन, चुनाव आयोग बना मूकदर्शक', कांग्रेस का आरोप: प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, ANI
कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुजरात में मतदान के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
इसके साथ ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर इस मामले में मूकदर्शक बने रहने का आरोप भी लगाया है.
अंग्रेजी अख़बार द टेलीग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी की ओर से वोट डालने और उसके बाद अपने भाई के घर पैदल चलकर जाने को 'रोड शो' क़रार दिया है.
कांग्रेस ने कहा है कि पीएम मोदी ने मतदान के दिन किसी सार्वजनिक कार्यक्रम जैसा माहौल तैयार किया जबकि उस दिन किसी भी तरह का प्रचार प्रतिबंधित होता है.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, "मोदी ने मतदान के दौरान ढाई घंटे का रोड शो किया. मीडिया उसे लाइव दिखाने के लिए मजबूर है. लेकिन क्या चुनाव आयोग भी मजबूर है?"
हालांकि, बीजेपी ने इस पर सफ़ाई देते हुए कहा है कि पीएम मोदी अहमदाबाद में मतदान के लिए सिर्फ़ सात से दस मिनट तक पैदल चले होंगे.
खेड़ा ने कहा, "चुनाव आयोग न कुछ सुनता है और न कुछ देखता है. जब पहले चरण का मतदान हो रहा था, तब मोदी का रोड शो सभी चैनलों पर लाइव दिखाया जा रहा था.
और जब दूसरे चरण का मतदान हो रहा था तब उन्होंने एक रोड शो किया. चुनाव आयोग पर इन सब चीज़ों का कोई असर नहीं पड़ता है. हमारी आने वाली पीढ़ियां चुनाव आयोग को इन उल्लंघनों के सामने मूक दर्शक बने रहने के लिए माफ़ नहीं कर पाएंगी."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
कांग्रेस ने ये भी कहा है कि पिछले कुछ दिनों में उसने चुनाव आयोग में आचार संहिता के उल्लंघन की कई शिकायतें दर्ज कराई हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया है.
ममता बनर्जी ने कहा, "प्रधानमंत्री अगर चुनाव के दिन रैली करते हैं तो आप क्या उम्मीद करते हैं? उन्हें शायद सौ में से सौ (अंक) मिल जाएं. लेकिन क्या ये उचित है?"
इसके साथ ही उन्होंने कहा, "ये (चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन रोकना) चुनाव आयोग का काम है. राजनीतिक दलों के रूप में हम सभी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करते हैं. लेकिन मैं सुप्रीम कोर्ट की इस बात से सौ फ़ीसद सहमत हूं कि चुनाव आयुक्तों के चयन में नामांकन प्रक्रिया होनी चाहिए."
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इन दिनों कुछ याचिकाओं की सुनवाई कर रही है जिनमें चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए कॉलेजियम जैसी व्यवस्था तैयार करने की मांग की गयी है.
चुनाव आयोग ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि 'ये साबित नहीं किया जा सका है कि यह एक रोड शो था.'
अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी कुलदीप आर्य ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने पीएम के मतदान केंद्र तक जाने को लेकर शिकायत की थी. हमने अहमदाबाद में तैनात चुनाव अधिकारी से इस मामले में त्वरित रिपोर्ट मांगी. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, ये साबित नहीं हो सका है कि यह एक रोड शो था और भीड़ मौके पर अपने आप जुटी थी."
ये भी पढ़ें:-

इमेज स्रोत, ANI
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को दी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को ड्रग्स और अवैध शराब के बढ़ते सेवन पर सख़्त लहजे में चेतावनी दी है.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, सर्वोच्च अदालत ने पंजाब सरकार से कहा है कि ड्रग्स और शराब के सेवन में बढ़ोतरी रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए.
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने पंजाब सरकार से कहा - 'ड्रग्स का सेवन बढ़ रहा है...इससे युवा बर्बाद हो जाएंगे. किसी को ये देश ख़त्म करना हो तो ये सीमावर्ती राज्य है.
इस दिशा में सभी क़दम उठाए जाने चाहिए, नहीं तो युवाओं को ड्रग्स और शराब से बर्बाद करना काफ़ी आसान हो जाएगा. और उसके बाद देश को...'
पंजाब सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अजित कुमार सिन्हा ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया.
इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस बारे में मौखिक निर्देश देने का आग्रह किया. इस पर अदालत ने कहा कि पंजाब में सरकार शासन कर रही है, अदालत नहीं.
जस्टिस एमआर शाह ने कहा, "कड़े क़दम उठाए जाने चाहिए. दो सालों में ही 34,000 से ज़्यादा एफ़आईआर दर्ज की गयी हैं. लेकिन सिर्फ़ एफ़आईआर ही दर्ज हुई है. चार्जशीट कहां हैं? अवैध शराब और उसके ट्रांसपोर्टेशन पर रोक लगाने की ज़रूरत है. इसे रोकना ही होगा."
अदालत ने कहा कि 'इससे ग़रीब लोगों का नुक़सान होता है, उनकी मौत होती है, समृद्ध लोग इससे प्रभावित नहीं होते जो मनोरंजन के लिए ब्रांडेड शराब पीते हैं.'
इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार को सर्कुलर जारी करके स्थानीय पुलिसकर्मियों को अवैध शराब कारोबार चलते देने के लिए ज़िम्मेदार ठहराना होगा.
ये भी पढ़ें:-

इमेज स्रोत, ANI
महाकालेश्वर मंदिर की महिला गार्ड्स ने बनाई रील, गई नौकरी
मध्य प्रदेश में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में तैनात दो महिला सुरक्षाकर्मियों को कथित रूप से रील बनाने की वजह से बर्ख़ास्त कर दिया गया है.
जनसत्ता में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इन दोनों महिला सुरक्षाकर्मियों ने बॉलीवुड के एक गाने पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया था.
ये मामला चर्चा में आने के बाद स्थानीय एडीएम संतोष टैगोर ने महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक संदीप सोनी को वीडियो भेजकर जांच के निर्देश दिए.
इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधिक महिला कर्मचारियों को बर्ख़ास्त कर दिया गया है.
संदीप सोनी ने अख़बार को बताया है कि 'मंदिर परिसर के अंदर क़रीब साढ़े तीन सौ कर्मचारी काम करते हैं. इनमें पुलिसकर्मी, अन्य सुरक्षा एजेंसी के अलावा निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं.'
उन्होंने कहा कि सभी को सख़्ती से कहा गया है कि दोबारा इस तरह की ग़लती ना हो. इसके साथ ही नंदी कक्ष और गर्भगृह में पहले से ही मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां मौजूद रहने वाले कर्मचारियों को भी मोबाइल फ़ोन रखने की इजाज़त नहीं है. महाकालेश्वर मंदिर के नंदी कक्ष और गर्भगृह में फ़ोटो लेने पर प्रतिबंध है.
ये भी पढ़ें -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














