अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर राहुल गांधी के जाने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में तक़रार क्यों- प्रेस रिव्यू

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राहुल गांधी के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद बीजेपी और कांग्रेस की तक़रार की खब़र आज लगभग हर अख़बार के पहले पन्ने पर है.
'इंडियन एक्सप्रेस' ने राहुल के इस क़दम पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तक़रार का ज़िक्र किया है.
अख़बार के मुताबिक़, कांग्रेस ने वाजपेयी की समाधि पर राहुल गांधी के जाने को बड़े दिल की राजनीति कहा, जबकि बीजेपी ने इसे 'ड्रामा' क़रार दिया.
अख़बार ने कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के बयान का ज़िक्र किया है. इसमें उन्होंने कहा है,''हमें ये बात दिमाग़ में रखनी होगी कि राहुल गांधी उस शख़्स की समाधि पर गए, जिन्होंने 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री को राजधर्म निभाने की सीख दी थी. आज वही मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री हैं.
मेरा मानना है कि राहुल को उनकी समाधि पर देख कर प्रधानमंत्री ज़रूर उस सीख को याद करेंगे. राजनीति बड़े दिल से की जाती है.आज राहुल जी ने वही किया.''
अखब़ार लिखता है कि कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा, ''राहुल की ये यात्रा भारत जोड़ो की भावना के मुताबिक़ है.''

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दूसरी और बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि अगर कांग्रेस सच्चे दिल से वाजपेयी का सम्मान करती है तो उसे कांग्रेस कार्यकर्ता गौरव पांधी को पार्टी से निकाल देना चाहिए.
वहीं एक और प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल ड्रामा कर रहे हैं. एक तरफ़ वे अटल जी की समाधि पर श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं. दूसरी ओर, उनकी पार्टी के नेता उनके ख़िलाफ़ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
पूनावाला कांग्रेस कार्यकर्ता गौरव पांधी के उस ट्वीट का हवाला दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान वाजपेयी ने अंग्रेजों का साथ दिया था. पांधी कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ़्तर में को-ऑर्डिनेटर हैं.
' द टेलीग्राफ' ने लिखा है कि अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर यात्रा के बाद कांग्रेस ने बीजेपी को उनकी दी गई 'सीख' की याद दिलाई है.
अख़बार ने लिखा है कि कांग्रेस वाजपेयी सरकार और नरेंद्र मोदी सरकार के अंतर को दिखाना चाहती थी. कांग्रेस ने अपने इस मक़सद को शायद ही छिपाने की कोशिश की.
राहुल के इस क़दम से वो दिखाना चाहती थी कि पूर्व प्रधानमंत्री संविधान के शासन को ख़त्म करने के एजेंडे से प्रेरित नहीं थे.
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अख़बार के मुताबिक़, शायद इसलिए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, '' हम आज उम्मीद और प्रार्थना करते हैं कि राहुल गांधी को अटल जी की समाधि पर देख कर प्रधानमंत्री मोदी को यह एहसास हुआ होगा कि उनका सबसे पहला काम संविधान की रक्षा करना और अपने नाम पर हो रही हिंसा को रोकना है. मुझे लगता है कि श्री राहुल गांधी यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं.''
'द हिंदू' ने भी अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर राहुल गांधी के जाने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच हुई तक़रार की ख़बर छापी है.
अख़बार ने कांग्रेस की ओर से इसे 'भारत जोड़ो यात्रा' की भावना से जोड़ने और बीजेपी की ओर से ड्रामा बताने के बाद दोनों पार्टियों के बीच जारी विवाद का ज़िक्र किया है.
अख़बार के मुताबिक़, इस ज़ुबानी जंग के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार राहुल को बदनाम करने और भारत जोड़ो यात्रा को रोकने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि बीजेपी राहुल और इस यात्रा के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार अभियान चला रही है. उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी को अब राहुल गांधी ट्रोल मंत्रालय बना कर इसका ज़िम्मा केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को दे देना चाहिए.

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गुजरात में नाबालिग बेटी का वीडियो अपलोड करने से मना करने पर बीएसएफ हवलदार की पीट-पीट कर हत्या
'इंडियन एक्सप्रेस' ने गुजरात के खेड़ा में बीएसएफ़ के एक हवलदार को पीट-पीट कर मार डालने की घटना की ख़बर छापी है.
अख़बार के मुताबिक़, बीएसएफ़ के एक हवलदार को 24 दिसंबर को उस वक्त पीट-पीट कर मार डाला गया, जब उनका एक युवक और उसके परिवार से झगड़ा हो गया था.
अख़बार के मुताबिक़, बीएसएफ़ के इस हवलदार ने युवक को अपनी नाबालिग बेटी का वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करने से मना किया था.
अख़बार ने इस मामले में दर्ज एफ़आईआर का हवाला देते हुए लिखा है कि गुजरात के खेड़ा ज़िले के नाडियाड तालुके में रहने वाले 45 साल के बीएसएफ़ हवलदार मेलाजी वाघेला अपनी पत्नी, बेटे और कुछ रिश्तेदारों के साथ 20 साल के शैलेश उर्फ़ सुनील जाधव के घर पहुंचे थे.
उन्होंने कथित तौर पर सुनील जाधव को अपनी 15 साल की बेटी का वीडियो ऑनलाइन अपलोड करने की शिकायत की थी.
इसके बाद जाधव के परिवार वालों से उनका झगड़ा हो गया. बात बढ़ गई और सुनील के पिता दिनेश जाधव ने मेलाजी वाघेला को डंडे से पीटना शुरू कर दिया. उन पर हथियारों से भी हमला हुआ. बाद में उन्हें नाडियाड सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
इस हमले में उनकी पत्नी और बेटे को भी चोट पहुंची है. मामले में सुनील जाधव के परिवार के सभी सात सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. उन पर हत्या और दंगा करने का आरोप है. सभी अभियुक्त न्यायिक हिरासत में हैं.

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आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन लोन घोटाला: चंदा कोचर और धूत ने इसे कैसे दिया अंजाम
'अमर उजाला' ने अपनी एक ख़बर में बताया है कि वीडियोकॉन लोन घोटाले को आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर और उद्योगपति वेणुगोपाल धूत ने कैसे अंजाम दिया.
अख़बार लिखता है वीडियोकॉन लोन घोटाले में सीबीआई जांच के बाद पता चला कि एक-दूसरे को नहीं जानने का दावा करने वाले परिवारों ने इस हाई प्रोफ़ाइल ठगी को अंजाम दिया.
3,520 करोड़ के आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन लोन घोटाले में सीबीआई ने बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को गिरफ़्तार किया.
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जबकि, शुरुआत में वीडियोकॉन के संस्थापक वेणुगोपाल धूत दावा कर रहे थे कि वे कोचर को नहीं जानते.
जब सीबीआई ने जांच शुरू की तो पता चला कि दोनों ने एक-दूसरे के फ़ायदे के लिए साज़िशन बैंक को चूना लगाया.
इस मामले में सीबीआई की तरफ़ से दायर आरोप पत्र के मुताबिक़, आईसीआईसीआई बैंक की तरफ़ से वीडियोकॉन को क्विड-प्रो-क्यो यानी परस्पर लाभ की साज़िश के तहत लोन दिया गया था.
वेणुगोपाल धूत और दीपक कोचर ने 2008 में नूपावर नाम से एक कंपनी बनाई जिसमें दोनों बराबर के हिस्सेदार थे. धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी ने 2010 में नूपावर में 64 करोड़ रुपये का निवेश किया. इसके बाद कई बार धूत ने नूपावर में निवेश किया.
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यह खेल 2008 में शुरू हुआ, जब चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ नहीं बनी थीं, लेकिन उनके ऊंचे ओहदे को ध्यान में रखकर यह साज़िश रची गई और जब वे सीईओ बनीं, तो 2012 में इसे अंजाम दिया गया.
आख़िर में वीडियोकॉन को दिया गया लोन एनपीए में बदल गया जिससे बैंक को 3,520 करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ, लेकिन कोचर परिवार को इससे 64 करोड़ रुपये से ज़्यादा का लाभ हुआ.
वीडियोकॉन समूह ने आईसीआईसीआई बैंक को 28 प्रस्ताव दिए थे जिनमें से लगभग आठ को मंज़ूरी दी गई थी. इन प्रस्तावों को मंज़ूरी देने वाली चार समितियों में चंदा कोचर शामिल थीं.
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