लिंचिंग को लेकर राजस्थान बीजेपी के नेता वीडियो में बोलते दिखे- हमने पांच लोगों को मारा- प्रेस रिव्यू

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राजस्थान में बीजेपी के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहुजा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो गौ तस्करी करने वाले पांच लोगों की लिंचिंग करवाने का दावा कर रहे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में ख़बर है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद ज्ञानदेव आहुजा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.
ज्ञानदेव आहुजा का ये बयान उस दौरान का है जब वो शुक्रवार को सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए एक शख़्स के परिवार से मिलने गोविंदगढ़ गए थे. यहां चिरंजी लाल नाम के शख़्स की विक्रम ख़ान और अन्य लोगों ने हत्या कर दी है. पुलिस का मानना है कि ट्रैक्टर चोरी को लेकर ये ग़लत पहचान का मामला है.
इस वीडियो में आहुजा किसी से कहते हुए दिख रहे हैं, ''पंडित जी, अब तक तो पांच हमने मारे हैं, लालवंडी में मारा, चाहे बहरोड़ में मारा, अब तक तो पांच हमने मारे हैं. इस इलाक़े में पहली बार हुआ है कि उन्होंने मारा है.''
लालवंडी से उनका मतलब 2018 के रकबर ख़ान और बहरोड़ से मतलब 2017 के पहलू ख़ान से था.
वीडियो में आहुजा कहते हैं, ''मैंने खुल्लम खुल्ला छूट दे रखी है कार्यकर्ताओं को, मारो... जो गौकशी करे... बरी भी करवाएंगे, ज़मानत भी करवा देंगे.''
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अलवर पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने संडे एक्सप्रेस को बताया कि मौके पर मौजूद बीट कॉन्स्टेबल की शिकायत पर आहुजा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.
राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह दोतासरा ने ये वीडियो ट्विटर पर शेयर किया था जो वायरल हो गया. उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि बीजेपी का असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने आ गया है.
वहीं, बीजेपी ने खुद को आहुजा के बयान से अलग कर लिया है. बीजेपी राजस्थान के मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा, ''बीजेपी लोकतंत्र और संविधान पर भरोसा करती है. उसका ये मानना नहीं है कि क़ानून अपने हाथों में लिया जाए. अगर कोई अपराध करता है तो उसे क़ानून के तहत सज़ा दी जानी चाहिए. ज्ञानदेव जी ने जो कहा वो उनका निजी बयान था. वो ही स्पष्ट कर सकते हैं कि वो किस संदर्भ में बात कह रहे थे.''

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बिलकिस बानो मामले पर मानवाधिकार आयोग करेगा चर्चा
द इंडियन एक्सप्रेस की ही एक ख़बर बिलकिस बानो मामले से जुड़ी हुई है. ख़बर के मुताबिक इस मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे 11 लोगों को बरी किए जाने के मसले पर मानवाधिकार आयोग सोमवार को चर्चा कर सकता है. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने इसकी पुष्टि की है.
साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में 11 लोगों को उम्र-कैद की सज़ा सुनाई गई थी और वो गोधरा जेल में बंद थे.
15 अगस्त, 2022 को गोधरा जेल में सज़ा काट रहे इन 11 क़ैदियों को गुजरात सरकार की सज़ा माफ़ी की नीति के तहत रिहा कर दिया गया है.
साल 2003 में गुजरात पुलिस के मामला बंद करने के बाद मानवाधिकार आयोग के ही दख़ल से बिलकिस बानों को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए क़ानूनी मदद मिल पाई थी.

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महिला प्रोफ़ेसर को निकालने पर कुलपति का बयान
कोलकाता में सेंट ज़ेवियर्स विश्वविद्यालय के कुलपति फादर फेलिक्स राज ने इस बात से इनकार किया है कि महिला प्रोफ़ेसर को बिकनी में तस्वीरों के कारण नौकरी से निकाला गया है. अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इस ख़बर को प्रकाशित किया है.
कुलपति ने नौकरी से निकालने के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा, ''इस पर ध्यान दिया जाए कि सेंट जे़वियर्स विश्वविद्यालय, कोलकाता ने किसी शिक्षक को इस्तीफ़ा देने के लिए बाध्य नहीं किया है. संस्थान ऐसा करेगा ये सोचना अपमानजनक है.''
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, स्टाफ़ सदस्यों, विद्यार्थियों और उनसे जुड़े लोगों का सम्मान बनाए रखने पर विश्वास करता है.
सेंट ज़ेवियर्स विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफ़ेसर ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर बिकनी में तस्वीरें पोस्ट करने को लेकर उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए बाध्य किया गया था.
इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी छिड़ गई कि किसी के अकाउंट से उनकी तस्वीरें निकाल कर उस आधार पर उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कैसे किया जा सकता है? इसे निजता के हनन का मामला बताया जा रहा है.
इसकी वजह यह है कि महिला प्रोफ़ैसर की प्रोफ़ाइल लॉक्ड (बंद) थी यानी सार्वजनिक रूप से कोई उन तस्वीरों को नहीं देख सकता था.

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केरल के राज्यपाल विश्वविद्यालयों में कराएंगे परिवारवाद की जांच
केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा है कि वो विश्वविद्यालयों में परिवारवाद की शिकायतों को लेकर जल्द ही जांच के आदेश देंगे.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, उन्हें शिकायतें मिली हैं कि पिछले कुछ सालों में राज्य के विश्वविद्यालयों में सत्ताधारी सीपीएम से जुड़े लोगों को योग्यता को ध्यान में ना रखते हुए नियुक्त किया गया है.
उन्होंने कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति गोपीनाथ रविंद्रन को लेकर कहा कि कुलपति सत्ताधारी पार्टी के कैडर की तरह व्यवहार कर रहे हैं.
आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा, ''पिछले दो-तीन सालों में ऐसी जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं मैं उनकी पूरी जांच कराऊंगा.'' राजभवन के सूत्रों के अनुसार वो इसके लिए हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन कर सकते हैं.
इससे केरल विधानसभा में स्पीकर एमबी राजेश की पत्नी की श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ़ संस्कृत में नियुक्ति और पूर्व सांसद पीके बीजू की पत्नी की केरल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति जांच के दायरे में आ जाएगी.
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