13 महीने के बच्चे को फ़ुट पंप के ज़रिए सांस देने की कोशिश करते परिवार की कहानी

13 महीने के बच्चे को फ़ुट पंप के ज़रिए सांस देने की कोशिश करती उसकी मां

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इमेज कैप्शन, 13 महीने के बच्चे को फ़ुट पंप के ज़रिए सांस देने की कोशिश करती उसकी मां
    • Author, सोमेश पटेल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान 'एम्स' के बाहर एक मां का 13 महीने के बच्चे को फ़ुट पंप के ज़रिए सांस देने की कोशिश करने वाला वीडियो चर्चा में है.

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर लोग हैरान हैं. लेकिन एम्स, रायपुर के गेट के बाहर के फ़ुटपाथ पर पिछले कुछ महीनों से कमोबेश कुछ घंटों पर रह- रह कर यह स्थिति उभर रही थी.

छत्तीसगढ़ के कवर्धा का डहरे परिवार मजबूरी में यहां ठहरा है. परिवार की कोशिश बस यही है कि कलेजे के टुकड़े की ज़िंदगी को किसी तरह से बचा लिया जाए.

रायपुर के एम्स में बच्चे का इलाज मुफ़्त में हो रहा है. लेकिन परिवार फ़ुटपाथ पर ही रहने को मजबूर है.

13 महीने के बच्चे को ब्रेन ट्यूमर और कैंसर दोनों है और सांस लेने में भी तकलीफ़ हो रही है. फ़ुटपाथ पर मां फ़ुट पंप के ज़रिए बच्चे के गले का कफ़ साफ़ करती है और सांसें देने की कोशिश करती है.

बच्चे के पिता बालक दास डहरे बताते हैं, "हम लोग पिछले पांच महीने से एम्स के बाहर फ़ुटपाथ पर ज़िंदगी बिता रहे हैं. शुरुआत में सब कुछ ठीक था मगर जैसे-जैसे बच्चे के शरीर का विकास होने लगा, परेशानियां आने लगीं. उसकी बॉडी का आधा भाग काम करना बंद कर चुका है. उसे देखने में परेशानी भी आ रही है. सांस लेने में परेशानी हो रही है."

बालक दास

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इमेज कैप्शन, बच्चे के पिता बालक दास डहरे

उनका दावा है, "प्राइवेट अस्पतालों में इलाज भी करवाया. महंगे इलाज और आर्थिक परेशानी ने अब फ़ुटपाथ पर ला पटका है. मैं अपने बच्चे के इलाज के लिए अपनी किडनी तक बेच दूंगा क्योंकि दवाइयां काफ़ी महंगी हैं. लेकिन मुझे अपने बच्चे की जान बचानी है. मैं लोगों से अपील करना चाहता हूँ कि मेरे बच्चे की जान बचा लीजिए."

घर-ज़मीन बेचने पड़े

बालक दास ने बताया कि कवर्धा ज़िले के ठकुराइन टोला गांव में उनका घर और खेत था. बच्चे के इलाज के लिए यह सब बेचना पड़ा. कुछ पैसे थे तो किराए का मकान लेकर प्राइवेट अस्पतालों में बच्चे का इलाज कराया, जो अब ख़त्म हो चुके हैं,

फुट पंप

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पिता ने लगाया चाय का ठेला

क्या किसी ने रायपुर एम्स आकर बच्चे का इलाज कराने की सलाह दी थे. वो कहते हैं कि एम्स में बच्चे का इलाज तो मुफ़्त हो रहा है, मगर उसकी दवाओं के लिए पैसे और रहने के लिए जगह नहीं है. बालक दास को सरकार और समाज के लोगों से मदद की आस है.

बालक दास और उनकी पत्नी को पास के ही गुरुद्वारे में लंगर मिल जाता है, लेकिन किसी रोज़ अगर बच्चे की वजह से पहुंचने में देर होती है तो भूखे पेट सोना पड़ता है.

अस्पताल के बाहर एक पान का ठेला लगाने वाली सुशीलाबाई योगी ने बालक दास की कुछ मदद की है. उन्होंने बालक दास को एक किराए का ठेला दिलवाया जिस पर चाय बनाकर बच्चे के पिता रोज़ी का जुगाड़ कर रहे हैं.

रायपुर का एम्स

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एम्स कर रहा है मुफ़्त इलाज

सुशीला ने बताया, "ये बेहद ज़रूरतमंद लोग हैं, शुरुआत में जब यहां आए तो ज़िंदगी से बहुत हताश थे. मरने की बात करते थे, मैंने कहा कि मरकर अपने ही शरीर का नुक़सान करोगे, मैंने समझाया और किराया का ठेला दिलवा दिया."

बालक दास कहते हैं कि अगर वो एम्स के गेट के पास ये सब कुछ ना करें तो बेटा बचेगा नहीं. वो कहते हैं कि हर रोज़ पत्नी अस्पताल के भीतर जाकर कीमोथेरेपी करवाती है ताकि बच्चे को बचाया जा सके.

डॉक्टर दिवाकर साहू एम्स के उप चिकित्सा ऑफिसर हैं. वो कहते हैं कि ''बालक दास के बेटे की ब्रेन की सर्जरी हुई थी. ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित था बच्चा. ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हो चुका है.''

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रंजना गायकवाड़

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ऑपरेशन के बाद 'कीमोथेरेपी' चल रही है. हम अपने अस्पताल में उनका मुफ़्त इलाज कर रहे हैं."

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग की शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रंजना गायकवाड़ का कहना है कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद स्वास्थ्य विभाग को भेजा गया है. अब वो कहती हैं कि स्वास्थ्य विभाग की टीम परिवार के रहने की व्यवस्था कर रही है.

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने फ़ोन पर बातचीत में बताया, "पूरा मामला मेरी जानकारी में है. मैंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को वहां पर जांच करने के लिए भेजा है और जो भी मदद होगी, मैं उस परिवार की मदद करूंगा."

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