मध्य प्रदेश: छोटे भाई का शव गोद में लेकर बैठे बच्चे का वायरल वीडियो, पूरा मामला क्या है

वायरल तस्वीर

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इमेज कैप्शन, मध्यप्रदेश के मुरैना में छोटे भाई का शव गोद में लिए बैठा बच्चा
    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी के लिए

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक आठ साल का बच्चा अपने भाई के शव को गोद में लेकर बैठा रहा और उसके पिता इस तलाश में भटकते रहे कि उन्हें सस्ते में कोई गाड़ी मिल जाए ताकि वो अपने बच्चे को घर ले जा सकें.

इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया.

वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जब इस पर पत्रकारों ने सवाल करने की कोशिश की तो वो कुछ भी कहे बगैर आगे बढ़ गए.

लेकिन प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अब इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

दिल को मायूस कर देने वाली इस घटना ने बहुत से लोगों को झकझोर कर रख दिया है.

वीडियो कैप्शन, मध्य प्रदेश: दो घंटे तक छोटे भाई का शव लेकर बैठा रहा 8 साल का बच्चा

भाई के शव के साथ गुलशन

आठ साल का एक बच्चा गुलशन अपने छोटे भाई की लाश को लेकर गोद में बैठा था.

भाई की उम्र मात्र दो साल है और वो सफेद कपड़े में ढंका हुआ है. पिता किसी गाड़ी की तलाश में चले गए थे ताकि वो अपने बच्चे का पार्थिव शरीर वापस अपने गांव ले जा सकें.

मौत के बाद पूजाराम जाटव ने बेटे को अस्पताल से अपने गांव ले जाने के लिए वाहन की बात की तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे मना कर दिया.

पूजाराम के मुताबिक़, उन्होंने कहा कि कोई गाड़ी उपलब्ध नहीं है और वो बाहर से इसका इंतज़ाम कर सकते हैं.

वहीं, जब पूजाराम ने बाहर खड़े एंबुलेंस वालों से बात की तो उन्होंने उनसे 1500 रुपये तक की मांग कर डाली.

उसके बाद वो अपने बेटे का शव लेकर बाहर आ गए लेकिन उन्हें अस्पताल के बाहर गाड़ी नहीं मिली तो वो नेहरू पार्क के करीब अपने बेटे के पास छोटे बेटे का शव छोड़ कर चले गए.

पूजाराम जाटव

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नरोत्तम मिश्रा का बयान

गुलशन का वीडियो अपने भाई को गोद में लेकर जब सामने आया तो मामले ने तूल पकड़ा. प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार को बताया कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा, "जब वो गांव से आए थे तो उस समय उनका बच्चा गंभीर स्थिति में था. डॉक्टरों ने जब उस बच्चे को मृत घोषित किया तो वो बच्चे का शव बड़े लड़के को सौंप कर किसी रिश्तेदार के घर चले गए. सरकार ने इस मामले को गंभीर माना है और सीईओ ज़िला पंचायत को जांच के आदेश दिए हैं. शाम तक जांच करने को कहा गया है."

वहीं, उन्होंने ये भी बताया कि सिविल सर्जन को शोकॉज (कारण बताओ) नोटिस दे दिया गया है. इसके साथ ही सरकार ने कई तरह की मदद उस परिवार को दी है.

वहीं, पिता पूजाराम जाटव ने बताया, "मैं बाज़ार में पंचर बना कर गुज़र बसर करता हूं. मुझे नहीं पता कि बच्चे की हालत कैसे ख़राब हुई. पहले करीब के डॉक्टर को दिखाया लेकिन फिर भी उसे फायदा नहीं हुआ तो फिर उसे यहां पर लेकर आया था."

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पूजाराम जाटव का परिवार

जिस एबुंलेंस से ये परिवार ज़िला अस्पताल आया था, वो उन्हें छोड़ कर वापस लौट गई थी.

पूजाराम जाटव को तीन लड़के और एक बेटी हैं. उनके अलावा पत्नी हैं जो उन्हें छोड़ कर काफी दिनों से अपने मायके में रह रही हैं. इन बच्चों का पालन पोषण वही कर रहे थे. लोगों का मानना है कि सही खाना-पीना नहीं मिलने की वजह से बच्चे की हालत बिगड़ी और ऐसी स्थिति में पहुंच गई कि उसकी मौत का कारण बन गई.

गुलशन को अपने भाई की लाश को गोद में लिए बैठा देखने के बाद जब ये ख़बर शहर के कोतवाली थाने के टाउन इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह जादौन के पास पहुंची तो वो उस स्थान पर गए और फिर उन्होंने उन दोनों को उठाकर ज़िला अस्पताल पहुंचाया. उसके बाद उन्होंने इंतज़ाम करके परिवार को एंबुलेंस की मदद से गांव भिजवाया.

वहीं, चीफ मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर (सीएमएचओ) डॉक्टर राकेश शर्मा ने बताया, "जब इस मामले के बारे में हमे पता लगा तो हमने एंबुलेंस का इंतेज़ाम करके उसे उसके गांव भिजवाया."

शिवराज सिंह चौहान

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भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

लेकिन, इस घटना ने एक बार फिर से प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा को आमने-सामने कर दिया है.

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले में सरकार को आड़े हाथों लिया और ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य और एंबुलेंस की समस्याओं पर कई ट्वीट किए.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में पत्रकारों के सवालों का जवाब नही दिया.

कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान पर कहा, "मीडिया से मुंह मोड़कर भागे, पत्रकारों ने मुरैना मामले पर किया था सवाल. शिवराज जी, कितना भागोगे, कहां-कहां भागोगे, अब हर तरफ जनता खड़ी है."

उन्होंने आगे ट्वीट में लिखा है कि चुनौतियों से भागने और सच्चाई को नकारने की आपकी और आपकी सरकार की यह प्रवृत्ति प्रदेश के पूरे चिकित्सा तंत्र को खोखला और संवेदनहीन करती जा रही है.

इसके बाद ही सरकार हरकत में आई और पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराई गई है.

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मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति

ये पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना प्रदेश में सामने आई है. इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाए हुई हैं जिसने इंसानियत को शर्मसार किया है.

एमपी मेडिकल कॉलेज काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति की बात करें तो प्रदेश में 77 हज़ार डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन उपलब्ध सिर्फ 22 हज़ार हैं. हर 3400 व्यक्ति पर एक डॉक्टर मौजूद है.

प्रदेश में डॉक्टरों की सही संख्या जानने के लिए काउंसिल ने इस साल फिर से पंजीकरण के निर्देश दिए थे. अंतिम तिथि तक मात्र 22,000 डॉक्टरों ने ही अपना पंजीकरण करवाया. हालांकि काउंसिल के दस्तावेज़ों में पहले 59,000 डॉक्टर दर्ज थे.

वहीं, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 3278 पदों में से विशेषज्ञों के मात्र 1029 पद भरे हुए हैं. वहीं, 1677 पद चिकित्सा अधिकारियों के भी ख़ाली हैं. ये आंकड़े प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की तस्वीर बयान करते हैं.

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