संजय राउत को ज़मानत देने वाली अदालत ने ईडी से क्या-क्या कहा

इमेज स्रोत, Getty Images
शिवसेना नेता संजय राउत को मुंबई की एक अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में ज़मानत दे दी है. लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी ज़मानत का विरोध किया है.
संजय राउत को राहत देते हुए मुंबई की सत्र अदालत ने ईडी पर कुछ सख़्त टिप्पणियां कीं और जांच एजेंसी की मंशा पर भी सवाल उठाए.
जेल से बाहर आने के बाद संजय राउत ने कहा कि "मैंने कुछ ग़लत नहीं किया. मैं किसी से नाराज़ नहीं हूं. मैंने सौ से ज़्यादा दिन जेल में बिताए हैं, मेरा गुनाह क्या था?"
उन्होंने कहा कि गणतंत्र में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
उद्धव ठाकरे क्या बोले
जेल से बाहर आने के बाद संजय राउत ने शिव सेना नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात की.
उद्धव ठाकरे के संजय राउत की तारीफ़ की और कहा, "दोस्त मुसीबत के समय ना सिर्फ़ साथ खड़ा होता है बल्कि लड़ता भी है. संजय राउत ऐसे ही लड़ रहे हैं."
उन्होंने कहा, "आज तक केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर कई पार्टियों को तोड़ा जा चुका है. कई पार्टियों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट की फटकार के बाद भी संजय राउत को दूसरे झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश हो सकती है."
वहीं संजय राउत ने कहा कि वो एनसीपी नेता शरद पवार से भी मुलाक़ात करेंगे और कुछ लोगों के कामों के लिए प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से भी मुलाक़ात करेंगे.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2

न्यायालय ने क्या कहा?
- पूरे मामले को देखते हुए ये स्पष्ट होता है कि दोनों अभियुक्तों को अवैध रूप से गिरफ़्तार किया गया था.
- ज़रूरी होने पर गिरफ़्तारी की कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन ईडी की ओर से पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अधिनियम की धारा 19 के तहत की गई कार्रवाई अवैध है.
- सिविल मामलों को मनी लॉन्ड्रिंग या आर्थिक अपराध का नाम दे देने से उसे वो स्टेटस नहीं मिलता. गिरफ़्तारी से निर्दोष लोगों को बहुत तकलीफ़ होती है. कोर्ट के सामने कोई भी हो, उसका काम उचित न्याय देना है.
- कोर्ट के सामने मौजूद रिकॉर्ड और दलीलों से साफ़ है कि प्रवीण राउत को दीवानी मामले में गिरफ़्तार किया गया था और संजय राउत को बेवजह गिरफ़्तार किया गया. ये तथ्य हैरान करने वाला है.
- इस मामले में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचएडीए) के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध थी. ईडी भी उनसे सहमत हो गया. लेकिन एमएचएडीए के अधिकारियों पर आरोप नहीं लगाया.
- सारंग और राकेश वाधावन मुख्य अभियुक्त थे, लेकिन उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया. पर उसी समय प्रवीण राउत को एक दीवानी मामले में गिरफ़्तार कर लिया गया और संजय राउत को बिना कारण अरेस्ट किया गया. ये दिखाता है कि ईडी ने अपनी सुविधा के हिसाब से बर्ताव किया.
- अगर कोर्ट ईडी की दलील मानकर बेल ख़ारिज करती है तो इससे ईडी के अवसरवादी व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा. अगर ऐसा हुआ तो आम लोगों का अदालत से भरोसा उठ जाएगा.

ये भी पढ़ें:-

इमेज स्रोत, Getty Images
ईडी को कोर्ट की फटकार
पीएमएलए कोर्ट के जज एम.जी देशपांडे ने अपने आदेश में ईडी पर कड़ी टिप्पणियां कीं और कुछ सवाल भी उठाए.
- पीएमएलए कोर्ट के बनने के बाद से अब तक किसी भी मामले में ईडी ठोस सबूत नहीं पेश कर सका है. यहां तक कि बीते एक दशक में कोर्ट ने भी किसी मामले में फ़ैसला नहीं सुनाया है.
- पीएमएलए कोर्ट ने इस संबंध में सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को विस्तृत रिपोर्ट दी है. इसमें ईडी द्वारा अभियोजन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया के बारे में लिखा गया है.
- हमेशा यही वजह दी जाती है कि व्यक्ति के ख़िलाफ़ और सबूत जुटाए जा रहे हैं. जिस मामले में आरोप लगाए गए हैं, उसमें कोर्ट के पास एक या दो पन्नों से ज़्यादा सबूत नहीं दिए गए हैं.
- ईडी अभियुक्त को बहुत जल्दी गिरफ़्तार कर लेती है, लेकिन सुनवाई बहुत धीमी रफ़्तार से शुरू होती है.
- कोर्ट में एक भी केस का निपटारा नहीं हुआ है. क्या मामले को शुरू करने और ख़त्म करने के लिए ईडी का कोई कर्तव्य नहीं है?

कोर्ट ने संजय राउत को इन शर्तों पर दी ज़मानत
- गवाहों पर दबाव न डालें.
- अदालत की सुनवाई के दौरान अहम तारीखों पर हाज़िर हों.
- बिना कोर्ट के आदेश के देश से बाहर न जाएं.
- 2 लाख रुपये के मुचलके पर ज़मानत मिली.


इमेज स्रोत, Getty Images
क्या है पत्रा चॉल केस?
मुंबई के गोरेगांव में सिद्धार्थ नगर के एक चॉल में 672 फ़्लैटों के पुनर्निमाण के लिए साल 2008 में एमएचएडीए ने गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ समझौता किया.
इस समझौते के तहत कुल 13 एकड़ में से साढ़े चार एकड़ ज़मीन मूल निवासियों को दी जानी थी और बाकी एमएचएडीए तथा बिल्डर बेच सकते थे.
लेकिन बाद में ये पता चला कि इस ज़मीन को गुरुआशीष बिल्डर और अधिकारियों ने निजी बिल्डरों को बेच दिया और ये परियोजना ठप हो गई. इस मामले में बिल्डर के ख़िलाफ़ एक हज़ार 34 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई.
पत्रा चॉल के निवासियों ने एमएचएडीए से इस संबंध में शिकायत की. खेरवाड़ी पुलिस और एमएचएडीए ने जाँच शुरू की.
इस मामले में 2 फ़रवरी, 2022 को गिरफ़्तार किए गए प्रवीण राउत, गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी के पूर्व निदेशक हैं.
पेशे से पत्रकार और पत्रा चॉल हाउसिंग सोसायटी के पदाधिकारी पंकज दलवी कहते हैं, "हमें अब तक वो घर नहीं मिले हैं. इस बीच गुरुआशीष की कंपनी एचडीआईएल ने इस पर क़ब्ज़ा कर लिया है. घर खड़े हो गए हैं और ज़मीन दूसरे बिल्डरों को बेच दी गई है."
ये भी पढ़ें:-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















