महाराष्ट्र में उद्धव और एकनाथ आमने-सामने, दोनों ने एक-दूसरे को कहा ग़द्दार

दशहरे के मौके पर मुंबई के अलग-अलग मैदानों में हुई शिवसेना के दो धड़ों की रैलियों में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने एक-दूसरे को गद्दार कहा है.
एकनाथ शिंदे जून में शिवसेना में बग़ावत करके 40 से अधिक बाग़ी विधायकों के समर्थन और बीजेपी के सहयोग के साथ उद्धव ठाकरे को पद से हटाकर मुख्यमंत्री बन गए थे.
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, दोनों ने ही शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की विरासत पर अपना दावा ठोका और अपने आप को हिंदुत्व का असली सिपाही बताया.
शिवसेना पर किस धड़े का हक़ है इसे लेकर विवाद अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. दोनों ही धड़े अपने आप को असली शिवसेना बताते रहे हैं.
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में हुई विशाल रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ये विशाल जनसमूह इस बात का सबूत है कि शिवसैनिक किसके साथ हैं.

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उद्धव ठाकरे का वार
रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला.
उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को गद्दार कहते हुए कहा कि इस विशाल भीड़ को देखकर गद्दारों को डर लग रहा होगा.
उद्धव ठाकरे ने कहा, "इस साल का रावण अलग है, रावण के दस सिर हुआ करते थे, लेकिन इस रावण के 50 सिर हैं."
उनका इशारा दल बदलने के लिए विधायकों को दिए गए कथित 50 करोड़ रुपए के प्रस्ताव की तरफ़ था.

शिवाजी पार्क की रैली में पचास खोखे वाले रावण के पुतले को भी आग लगाई गई.
उद्धव ठाकरे ने उसी ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में रैली की जहां उनके पिता बाला साहेब ठाकरे दशहरा रैली को संबोधित करते रहे थे.
1966 में शिवसेना की स्थापना के बाद से ही शिवसेना इस मैदान में दशहरे के मौके पर अपनी रैली करती रही है.
उद्धव ठाकरे ने कहा कि एकनाथ शिंदे गुट परजीवी है और परजीवी की अपनी कोई पहचान या जड़ें नहीं होती हैं और परजीवी खुद के एक विशाल वृक्ष होने का दावा नहीं कर सकते हैं.
ठाकरे ने कहा, "एक विशाल वृक्ष की जड़ें ज़मीन से जुड़ी होती हैं. हम ऐसे ही हैं. मैं उन्हें परजीवी की सेना भी नहीं कहूंगा क्योंकि ये सेना शब्द का अपमान होगा. मैं उन्हें सिर्फ़ परजीवियों का समूह कहूंगा."
ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर अपने पिता की विरासत को चुराने का आरोप लगाते हुए कहा कि तुम दूसरों के पिता को चुराते हो. अगर तुममें हिम्मत है तो अपने पिता का नाम लेकर चुनाव लड़कर दिखाओ.
एकनाथ शिंदो को गद्दार कहते हुए ठाकरे ने कहा, "मैं उन्हें गद्दार कहता हूं. वो सब गद्दार ही हैं. ये मंत्री पद कुछ दिनों के लिए है, लेकिन गद्दार होने का ठप्पा जीवनभर लगा रहेगा."

उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे गुट को हिंदुत्व पर बोलने की चुनौती देते हुए कहा कि शिंदे गुट बिना बीजेपी की स्क्रिप्ट के हिंदुत्व पर बोलकर दिखाएं.
ठाकरे ने बीजेपी पर भी निशाना साधा और कहा, "देश तानाशाही और ग़ुलामी की तरफ़ बढ़ रहा है, क्या आप लोग इसके लिए तैयार हैं?"
उद्धव ठाकरे ने ये भी कहा कि बीजेपी गाय की बात तो करती है, लेकिन महंगाई की बात नहीं करती है.
उद्धव ठाकरे ने ये भी कहा कि उन्हें बीजेपी से हिंदुत्व पर सबक लेने की ज़रूरत नहीं है. ठाकरे ने कहा, "हमने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है, इसका मतलब ये नहीं है कि हमने हिंदुत्व को भी छोड़ दिया है. मैं आज भी हिंदू हूं और हमेशा हिंदू ही रहूंगा."

शिंदे का पलटवार
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में दशहरा रैली को संबोधित किया.
रैली को संबोधित करने से पहले एकनाथ शिंदे और शिवसेना के उनके धड़े के नेताओं ने बालासाहेब ठाकरे की कुर्सी के प्रति सम्मान प्रकट किया.
एकनाथ शिंदे ने 51 फिट लंबी विशेष तलवार की शस्त्र पूजा भी की.
एकनाथ शिंदे ने अपने भाषण में उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया और उन्हें जवाब देते हुए कहा कि जो उन्होंने किया वो गद्दारी नहीं है बल्कि गदर है. गदर यानी क्रांति.
शिंदे ने कहा, "आप हमें गद्दार कह रहे हो. हमने जो किया वो गद्दारी नहीं है, वो गदर है..गदर. गदर का मतलब होता है क्रांति. हमने क्रांति की है."
शिंदे ने कहा, "शिवसेना ना उद्धव ठाकरे की है ना एकनाथ शिंदे की है. ये शिवसेना सिर्फ और सिर्फ बाला साहेब ठाकरे के विचारों की है. विरासत विचारों की होती है. हम बालासाहेब ठाकरे के विचारों के वारिस हैं."
शिंदे ने कहा, "पिछले दो महीने में हमारे लिए गद्दार और खोखे शब्द का इस्तेमाल किया गया. गद्दारी हुई है लेकिन वो गद्दारी 2019 में हुई थी. जो चुनाव हमने लड़ा था, आपने नतीजों के बाद बीजेपी को छोड़कर महाविकास अघाड़ी गठबंधन बना लिया, वो गद्दारी थी. उस समय बाला साहेब ठाकरे के विचारों के साथ आपने गद्दारी की थी. जिन लोगों ने शिवसेना-बीजेपी को वोट किया था उनके साथ गद्दारी की गई."
उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, "एक तरफ बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की तस्वीर चुनाव से पहले लगाई थी. लोगों ने गठबंधन के नाम पर वोट दिया था. लोग चाहते थे कि शिवसेना-बीजेपी गठबंधन की सरकार बनेगी. आपने वोटरों के साथ विश्वासघात किया है. महाराष्ट्र की जनता के साथ गद्दारी की है."
उद्धव ठाकरे के अपने पिता की विरासत को चुराने के आरोप पर पलटवार करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, "आपने बालासाहेब ठाकरे के विचारों को बेच दिया. हम पर आरोप लगाया कि बाप चुराने वाली टोली पैदा हो गई है. आपने तो बालासाहेब ठाकरे के विचारों को बेच दिया. आपने उन्हें बेचने का काम किया."
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शिंदे के मंच पर ठाकरे के बड़े भाई

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मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स मैदान में हो रही एकनाथ शिंदे गुट की दशहरा रैली में बालासाहेब ठाकरे के बेटे जयदेव ठाकरे भी पहुंचे. उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के साथ मंच साझा किया.
जयदेव ठाकरे के अलावा स्मिता ठाकरे भी शिंदे गुट की रैली में पहुंचीं.
दरअसल मंच पर भाषण चल रहा था, एकनाथ शिंदे मंच पर बैठे हुए थे, उनकी नज़र सामने पड़ी और कहा कि स्मिता भाभी और निहार ठाकरे सामने नजर आ रहे हैं.
एकनाथ शिंदे ने कहा कि दो मंत्री नीचे जाएं और दोनों को सम्मान पूर्वक मंच पर लाएं जिसके बाद शंभू देसाई और प्रताप सरनाईक नीचे आए और दोनों को अपने साथ मंच पर लेकर गए.
स्मिता ठाकरे, उद्धव ठाकरे के भाई जयदेव की दूसरी पत्नी थीं. दोनों के बीच अब तलाक हो चुका है.
मंच पर एकनाथ शिंदे के बाईं तरफ़ कुछ कुर्सियां छोड़कर मंच पर स्मिता ठाकरे बैठी हुई हैं.
शिवसेना के दोनों ही गुट शिवाजी पार्क में रैली करना चाहते थे. ये मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में पहुंचा जहां से उद्धव ठाकरे गुट को शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करने की अनुमति मिली.
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