याकूब मेमन की कब्र को लेकर क्यों हो रहा है विवाद?

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साल 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट केस के अभियुक्त और फांसी पर लटकाए गए याकूब मेमन की कब्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
याकूब मेमन की मौत की सज़ा सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरक़रार रखने के बाद उन्हें 30 जुलाई, 2015 को फांसी दी गई थी.
उसके बाद, उनका शव उनके परिवार को सौंप दिया गया.
मेमन को दक्षिण मुंबई के बड़ा कब्रिस्तान में दफ़नाया गया था. क़रीब सात साल बाद उनकी कब्र को लेकर विवाद शुरू हो गया है.
आरोप है कि याकूब मेमन की कब्र के किनारे संगमरमर और टाइलों से एक मक़बरा जैसा बनाया गया है. इस मुद्दे पर बीजेपी ने आरोप लगाया है कि याकूब की कब्र को सजाया गया है. हालांकि बड़ा कब्रिस्तान ने इससे इनकार किया है.
बड़ा कब्रिस्तान समिति के अध्यक्ष शोहेब ख़तीब ने कहा, "याकूब देशद्रोही था. उसके लिए कोई सहानुभूति नहीं है. यहां कोई मज़ार नहीं बना है."
याकूब मेमन की कब्र के मामले के सामने के बाद कई सवाल लोगों के मन में आ रहे हैं जैसे- कब्रिस्तान में शवों को दफ़नाने के क्या नियम हैं? क्या कब्र के किनारे पत्थर से बनाये जा सकते हैं? बीबीसी मराठी की टीम ने मुस्लिम समुदाय के जानकारों से इन्हीं बातों को समझने की कोशिश की है.
याकूब की कब्र पर क्या विवाद है?
गुरुवार को याकूब की कब्र को लेकर विवाद शुरू हुआ. दरअसल इस कब्र के पास एक फर्श और संगमरमर की दीवार के चारों ओर बन रहे मकबरे की तस्वीरें वायरल हुई थीं. यहां दीप जलाने की तस्वीरें भी सामने आईं हैं.
इन तस्वीरों को ट्वीट करते हुए बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि याकूब की कब्र को सजाया गया है.
भाजपा विधायक राम कदम ने मांग की कि याकूब की कब्र को सजाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शरद पवार और राहुल गांधी को देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.
वहीं, शिवसेना प्रवक्ता अरविंद सावंत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा नेताओं से सवाल पूछा है, "उद्धव ठाकरे का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार ने याकूब का शव परिवार को क्यों सौंपा?"
वैसे याकूब की कब्र को लेकर हुए विवाद के बाद स्थानीय पुलिस बड़ा कब्रिस्तान पहुंचीं और वहां लगाई गई लाइटें हटा दी गई है. पुलिस उपायुक्त रैंक के एक अधिकारी को मामले की जांच करने को कहा गया है. पता चला है कि इस मामले की जांच के दौरान वक्फ बोर्ड और मुंबई नगर निगम से दस्तावेज मांगे जाएंगे.

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बड़ा कब्रिस्तान के ट्रस्टियों ने क्या कहा?
याकूब मेमन को दक्षिण मुंबई के बड़ा कब्रिस्तान में दफ़नाया गया था. बड़ा कब्रिस्तान के अध्यक्ष शोएब ख़तीब ने याकूब की कब्र के सौंदर्यीकरण करने के सभी आरोपों का खंडन किया है.
शोहेब ख़तीब ने कहा, "वह स्थान जहां याकूब को दफनाया गया है, वहां कोई मजार नहीं बना है. कब्र के चारों ओर की मिट्टी गिर रही थी, जिसके चलते किनारे पर एक ठोस संरचना बनाई गई है. यहाँ मेमन परिवार के अन्य सदस्यों की कब्रें हैं. सिर्फ़ याकूब की कब्र नहीं है."
दक्षिण मुंबई में बड़ा कब्रिस्तान, मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा कब्रिस्तान है.
शोहेब खतीब ने कहा, "शबे बारात के दौरान जगह-जगह रोशनी की गई थी. कोविड के बाद सभी कब्रिस्तानों में पहली बार यह सुविधा दी गई है."
याकूब मेमन को बम विस्फोट मामले में फांसी दी गई थी. तो उसकी कब्र के बगल में एक पत्थर क्यों बनाया गया? इस सवाल पर शोएब ख़तीब ने कहा, "याकूब देशद्रोही था, इसलिए हमें उससे कोई हमदर्दी नहीं."

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कब्रिस्तान में दफ़नाने के क्या नियम हैं?
कब्रिस्तान में शवों को दफ़नाने के लिए एक खुली जगह होती है. यहां कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य के शव को दफ़ना सकता है.
लेकिन कुछ कब्रिस्तानों में, एक ही परिवार के सदस्यों को एक विशिष्ट स्थान पर दफ़नाया जाता है. मुंबई पुलिस के एक सेवानिवृत्त अधिकारी शमशेर पठान कहते हैं, "वह स्थान जहां एक ही परिवार के लोगों के शवों को एक साथ दफ़नाया जाता है, उसे 'ओटा' कहा जाता है."
ऐसी जगह पहले से ही परिवारों को पट्टे पर दी गई है.
शमशेर पठान ने कहा, "अगर किसी परिवार के पास ऐसी ज़मीन पट्टे पर है तो परिवार इस ज़मीन पर कंक्रीट का निर्माण करता है. इस निर्माण को अवैध नहीं कहा जा सकता."
लेकिन 1984 के बाद कुछ कब्रिस्तानों में 'ओटा पद्धति' को बंद कर दिया गया. बॉम्बे ट्रस्ट की जामा मस्जिद ने कब्रिस्तान के बाहर ऐसा बोर्ड लगाया है.
इसमें लिखा है, "जनसंख्या में वृद्धि और शवों को दफ़नाने के लिए अपर्याप्त जगह के कारण, जामा ने 1984 से ओटा प्रणाली को बंद कर दिया है. यदि लोग इसे प्राप्त करने के लिए कोई पैसा देते हैं तो ट्रस्ट उत्तरदायी नहीं होगा."

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क्या याकूब की कब्र के चारों ओर पत्थर बनाना सही है?
इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं के अनुसार, हर कब्रिस्तान को समान माना जाता है. उर्दू साहित्य के विद्वान आबिद ख़ान के अनुसार इस्लाम कहता है कि कब्र साधारण होनी चाहिए न कि ठोस. तो क्या याकूब की कब्र के चारों ओर पत्थर बनाना सही है?
मुस्लिम ट्रुथ सीकर्स बोर्ड के एक बुद्धिजीवी शम्सुद्दीन तंबोली ने कहा, "इस्लाम मूल रूप से एक कब्र के चारों ओर दीवार बनाने का विरोध करता है."
विद्वानों के अनुसार भारत के लोग सूफ़ी संतों के प्रति सम्मान रखते थे. इसलिए इन संतों की कब्रों के चारों ओर दीवार बनानी शुरू की गई.
शम्सुद्दीन तंबोली ने यह भी बताया, "कुछ अमीर लोग व्यक्तिगत स्तर पर अपने परिवार के सदस्यों के लिए ऐसी दीवारें बनाते हैं. इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है. यह किसी के लिए कुछ करने की भावना के तहत लोग करते हैं."
क्या कब्रिस्तान में कब्र के चारों ओर दीवार बनाना गैर-क़ानूनी है? शम्सुद्दीन तंबोली कहते हैं, "दीवार बनाना गै़र-क़ानूनी नहीं है. लेकिन इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है."
उन्होंने यह भी बताया, "शबे बरात के दिन कब्रिस्तान में रोशनी की गई होगी, ताकि लोगों को फायदा हो. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह याकूब को महिमा मंडित करने के लिए किया गया था."
हालांकि उन्होंने यह भी कहा, "'मुस्लिम ट्रुथ सीकर्स बोर्ड' ऐसे किसी निर्माण का विरोध करेगा. शम्मुद्दीन तंबोली के मुताबिक़, ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जाता है.
अहमदनगर के पत्रकार और उर्दू साहित्य के विद्वान आबिद ख़ान ने कहा, "कुछ कब्रिस्तानों में, यह कहते हुए बोर्ड लगाए जाते हैं कि कंक्रीट की कब्रों का निर्माण और सौंदर्यीकरण नहीं किया जा सकता है. कुछ जगहों पर ये बोर्ड नहीं हैं और लोग ऐसी जगहों पर निर्माण करते हैं."
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