वो पांच बड़े मुक़दमे जिससे मशहूर हुए उज्ज्वल निकम

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साल 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अदालतों की दुनिया में फौजदारी के जो सबसे बड़े वकील उभरे, उनमें एक नाम पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम का भी लिया जाता है.
उज्ज्वल डिफेंस लॉयर नहीं हैं, वे क्रिमिनल मामलों में राज्य का पक्ष रखते हैं. उन्होंने अपना करियर महाराष्ट्र के जलगांव से शुरू किया था और वे महाराष्ट्र सरकार की तरफ़ से हाई प्रोफाइल मामलों में सरकारी वकील की ज़िम्मेदारी निभाते हैं.
यानी वो ये सुनिश्चित करते हैं कि अपराधियों और आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमों में सरकार का पक्ष कमज़ोर न पड़े.
जिन मामलों में निकम ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ़ से पैरवी की है, उनकी फेहरिस्त निकम की उपलब्धियों के जबर्दस्त रिकॉर्ड की तस्दीक करते हैं.
2016 में भारत सरकार ने उज्ज्वल निकम को पद्म श्री से सम्मानित किया था.
पांच बड़े मुक़दमे
1993 मुंबई बम ब्लास्ट केस: उज्ज्वल निकम की कामयाबी का सफ़र इसी मुक़दमे से शुरू हुआ था. 1993 में मुंबई बम धमाकों के मामले की सुनवाई कर रही टाडा अदालत ने अबू सलेम और करीमुल्लाह शेख़ को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. निकम इस केस से शुरुआत में ही स्पेशल प्रॉसिक्यूटर के तौर पर जुड़े थे.
गुलशन कुमार मर्डर केस: 12 अगस्त, 1997 को बॉलीवुड फ़िल्म प्रोड्यूसर गुलशन कुमार की हत्या मुंबई में गोली मारकर दी गई थी. पुलिस ने इस मामले में संगीतकार नदीम को अभियुक्त बनाया था.
प्रमोद महाजन की हत्या: हत्याकांड भाजपा के सीनियर लीडर और पूर्व रक्षा मंत्री प्रमोद महाजन की हत्या 22 अप्रैल, 2006 को उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने कर दी थी. इस मामले में प्रवीण को उम्र कैद की सज़ा हुई थी.
क़साब केस: नवंबर, 2008 में मुंबई शहर पर एक बड़ा चरमपंथी हमला हुआ. ये संघर्ष तीन दिनों तक चला और इसमें अजमल क़साब नाम का एकमात्र चरमंपथी जीवित पकड़ा गया. क़साब को इस मामले में फांसी की सजा दी गई.
शक्ति मिल्स गैंग रेप केस: साल 2013 के अगस्त महीने में 22 साल की एक फ़ोटो पत्रकार का पांच लोगों ने गैंग रेप किया था. इस मामले में कोर्ट ने तीन अभियुक्तों को मौत की सज़ा सुनाई थी.
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