एकनाथ शिंदे बोले, 'उद्धव ठाकरे ने कहा वापस आ जाओ, लेकिन...'

- Author, प्राजक्ता पोल
- पदनाम, बीबीसी मराठी
शिव सेना में उठापटक के बाद उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया
इसके बाद बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे के नाम की घोषणा की.
एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में और देवेंद्र फडणवीस ने उप- मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
बीबीसी ने एकनाथ शिंदे से लंबी बात की. यह उसी साक्षात्कार के संपादित अंश है.

जब आपको पता चला कि आप मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
लगभग 50 विधायकों द्वारा लिया गया निर्णय महाराष्ट्र राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक बड़ी घटना है.
विपक्ष के नेता सरकार में आने को बेताब हैं. लेकिन यहां सरकार में नेता पद छोड़ रहे हैं.
हमने बाला साहेब के हिंदुत्व के एजेंडे को अपनाया है. उन्होंने हमें अन्याय के ख़िलाफ खड़े होने के लिए कहा.
हमने वही किया. मैंने मुख्यमंत्री पद की लालसा में यह फैसला नहीं लिया. क्योंकि शुरुआत में उद्धव ठाकरे ने मुझसे कहा था कि मैं तुम्हें मौका देता हूं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
हालांकि बीजेपी के पास हमसे ज़्यादा विधायक हैं, लेकिन मुझे यह पद देने के लिए मैं बीजेपी नेताओं का शुक्रगुज़ार हूं.

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आपके मन में उद्धव ठाकरे की सरकार छोड़ने का विचार कब आया?
यह सब महाविकास अघाड़ी सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद शुरू हुआ.
मैंने रोज़ाना 25-30 विधायकों के अनुभव के आधार पर यह फैसला किया. क्योंकि दूसरे घटक चुनाव में हारे उम्मीदवारों को ताकत देने लगे और हमारे शिवसैनिकों को परेशान करने लगे, शिवसैनिकों के ख़िलाफ़ झूठे केस करने लगे.
तो इस सत्ता से शिवसेना को क्या मिला, क्या फायदा हुआ?
मैं अक्सर इस घटनाक्रम पर विचार करता था और पार्टी के बाक़ी नेताओं को सूचित करता था. नगर निकाय चुनाव में शिवसेना चौथे स्थान पर रही. ऐसे में विधायकों ने मुझसे कहा कि अब आपको कुछ तय करना है. यदि आप नहीं करते हैं, तो हम ही कुछ तय कर लेंगे.
तो यह एक दिन की घटना नहीं है. यह कहानी हमने बार-बार सुनाई. दुर्भाग्य से हम सफल नहीं हुए, इसलिए हमें यह निर्णय लेना पड़ा.

आप कहते हैं कि आप शिवसेना में हैं, उद्धव ठाकरे कहते हैं कि वह शिवसेना प्रमुख हैं. आपकी शिवसेना का मुखिया कौन है?
हमें कुछ नहीं कहना है. लोकतंत्र में बहुमत का सम्मान होता है. और वह हमारे पास है.

क्या आप धनुष-बाण चिह्न के लिए चुनाव आयोग जा रहे हैं?
हमने बहुमत साबित किया है. अब हम अपने विधायकों से चर्चा करेंगे और फिर आगे बढ़ेंगे.

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क्या उद्धव ठाकरे को आपकी बगावत के बारे में कोई जानकारी थी ?
मैंने उन्हें बताया था. मैंने उनसे कहा कि मैं जा रहा हूँ, तो उन्होंने कहा कि वापस आ जाओ.
मैंने उनसे कहा कि मुझे नहीं मालूम कि मैं वापस आऊंगा या नहीं. अगर उन्होंने तब सही कदम उठाए होते तो आज का यह समय नहीं देखना पड़ता.

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अगर उद्धव ठाकरे फिर एक बार साथ आने की तत्परता दिखाएंगे तो क्या आप जाएंगे?
जिस तरह से वे हम पर आरोप लगाते हैं, हमारी आलोचना करते हैं, हमें गुट के नेता पद से हटाते हैं, हमारा बहिष्कार करते हैं. मुझे नहीं लगता कि उनसे कोई उम्मीद है.

इस सरकार का रिमोट कंट्रोल किसके पास होगा? आपके पास या फिर देवेंद्र फडणवीस को?
देवेंद्र फडणवीस और मैं बहुत अच्छे दोस्त हैं. हम दोनों का कोई निजी एजेंडा नहीं है. इस राज्य का समग्र विकास हमारा एजेंडा है.

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एकनाथ शिंदे का राजनीतिक सफ़र

- 18 साल की उम्र में शिवसेना से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया.
- पार्टी में क़रीब डेढ़ दशक तक काम करने के बाद 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को ठाणे नगर निगम के चुनाव में पार्षद का टिकट दिया.
- पहली ही कोशिश में शिंदे ने न केवल नगर निगम का यह चुनाव जीता, बल्कि वे ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बन गए.
- उसके बाद 2004 में उन्होंने ठाणे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां भी पहली ही कोशिश में जीतने में कामयाब रहे.
- इसके बाद 2009 से वो लगातार कोपरी-पाचपाखाडी विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने गए हैं.
- 2015 से 2019 तक राज्य के लोक निर्माण मंत्री रहे.
- फ़िलहाल राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के साथ ठाणे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं.

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