एकनाथ शिंदे: जो कभी ऑटोरिक्शा चलाते थे अब मुख्यमंत्री हैं

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एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ये तय हो गया था कि शक्ति परीक्षण होगा. लेकिन अदालत के फ़ैसले के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
सबकी नज़रें शिदें पर थीं कि वो आगे क्या करने वाले हैं.
लग रहा था कि बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस वापस मुख्यमंत्री बन सकते हैं लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे के नाम की घोषणा कर दी.

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सियासी संकट
महाराष्ट्र में ताज़ा सियासी संकट उस समय शुरू हुआ था जब शिवसेना के वरिष्ठ नेता और विधायक एकनाथ शिंदे ने बग़ावत कर दी थी.
शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे कई विधायकों को लेकर रातोंरात गुजरात के शहर सूरत पहुंच गए, जिससे पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में जैसे भूचाल आ गया. शिंदे कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ 50 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे थे.
गुवाहाटी पहुँचने पर उनके खेमे में शिवसेना के और भी विधायक शामिल हुए.
इस बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे को 30 जून को विश्वास मत हासिल करने को कहा. शिवसेना ने इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट से उद्धव ठाकरे को कोई राहत नहीं मिली. और बुधवार रात उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
बगावत के सुर
महाराष्ट्र में हाल में हुए विधान परिषद चुनाव के बाद शिवसेना और महाविकास अघाड़ी के भीतर विवाद पैदा हो गया. इससे पहले कि इस विवाद की सही वजह पता चलती, शिवसेना के विधायकों ने बग़ावत कर दी.
एकनाथ शिंदे न केवल ठाणे की कोपरी-पचपाखड़ी सीट से विधायक हैं, बल्कि कई दशकों तक वे पार्टी के अहम नेता भी रहे हैं. उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण लोकसभा क्षेत्र से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं.
एकनाथ शिंदे कई सालों से शिवसेना के सदस्य रहे हैं. ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करने के बाद वे 2004 में पहली बार विधायक बने थे. हालांकि उनके करियर की शुरुआत एक ऑटोरिक्शा चालक के रूप में हुई थी.

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ठाणे वैभव नामक अख़बार के संपादक मिलिंद बल्लाल की नज़र में एकनाथ शिंदे की राजनीतिक यात्रा 'आक्रामक शिवसैनिक से शाखा प्रमुख और फिर ज़िम्मेदार मंत्री' की रही है.
एकनाथ शिंदे के बारे में मिलिंद बल्लाल कहते हैं, "सतारा एकनाथ शिंदे का गृहनगर है. वे अपनी पढ़ाई के लिए ठाणे आए थे, जहां वे आनंद दिघे के संपर्क में आए."

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एकनाथ शिंदे का राजनीतिक सफ़र

- 18 साल की उम्र में शिवसेना से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया.
- पार्टी में क़रीब डेढ़ दशक तक काम करने के बाद 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को ठाणे नगर निगम के चुनाव में पार्षद का टिकट दिया.
- पहली ही कोशिश में शिंदे ने न केवल नगर निगम का यह चुनाव जीता, बल्कि वे ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बन गए.
- उसके बाद 2004 में उन्होंने ठाणे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां भी पहली ही कोशिश में जीतने में कामयाब रहे.
- इसके बाद 2009 से वो लगातार कोपरी-पचपाखड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने गए हैं.
- 2015 से 2019 तक राज्य के लोक निर्माण मंत्री रहे.
- फ़िलहाल राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के साथ ठाणे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं.

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