सोनाली फोगाट के परिवार का दावा, रेप के बाद हुई हत्या- प्रेस रिव्यू

सोनाली फोगाट

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बीजेपी नेता और टिक टॉक स्टार सोनाली फोगाट की मौत को लेकर तेज़ी से बदले घटनाक्रम और उनके परिवार की ओर से किए जा रहे गंभीर दावों को आज कई अख़बारों ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. प्रेस रिव्यू में आज सबसे पहले यही ख़बर पढ़िए.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि सोनाली की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चोट के निशानों की पुष्टि हुई है. इसके अलावा सोनाली के परिवारवालों ने गुरुवार को ये भी आरोप लगाया है कि सोनाली फोगाट की हत्या की गई है और इससे पहले उनके साथ कथित तौर पर बलात्कार हुआ.

अख़बार ने सोनाली फोगाट के भाई रिंकू की ओर से लगाए आरोपों का ज़िक्र किया है. सोनाली के भाई ने दावा किया है कि बीजेपी नेता को गोवा में 24 अगस्त को शूटिंग करनी थी. लेकिन होटल के कमरे 21 और 22 अगस्त के लिए बुक कराए गए. सोनाली फोगाट की 22 अगस्त को उत्तरी गोवा के अंजुना में मौत हो गई थी.

सोनाली का शव दिल्ली पहुँच गया है जिसके बाद हरियाणा के हिसार में उनकी अंत्येष्टि होगी जहाँ उनका घर है.

पहले सोनाली फोगाट की मौत की वजह हार्ट अटैक को बताया गया था लेकिन अब गोवा पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) भी जोड़ी है.

सोनाली फोगाट के दो निजी सहयोगियों को गिरफ़्तार भी किया गया है. उनके जिन सहयोगियों की गिरफ़्तारी हुई है उनके नाम सुधीर सागवान और सुखविंदर वासी हैं. ये दोनों सोनाली फोगाट के साथ 22 अगस्त को गोवा में मौजूद थे.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार सोनाली फोगाट के भाई, भतीजे मोनिंदर फोगाट और जीजा अमन पूनिया ने अंजुना पुलिस थाने में लिखित में शिकायत थी, जिसमें सांगवान और सुखविंदर पर सोनाली की हत्या का आरोप लगाया गया है.

चार पन्नों में दी गई इस शिकायत पर सोनाली के भाई ने हस्ताक्षर किए हैं और कहा है कि उनकी बहन की संपत्ति हड़पने के इरादे से सुखविंदर और सांगवान ने बीजेपी नेता की हत्या की.

'रसोइए को हटाया, पूर्व-नियोजित साज़िश'

अंजुना पुलिस को दी गई शिकायत में ये भी दावा किया गया है कि करीब तीन महीने पहले फोगाट ने अपने परिवार के सदस्यों को बताया था कि अक्सर रात का खाना खाने के बाद उन्हें अपने पैरों में कुछ तकलीफ़ महसूस होती है, जिससे उन्हें चलने तक में दिक़्क़त हो जाती है.

सोनाली के भाई रिंकू ढाका ने आरोप लगाया, "उनके (सोनाली फोगाट) के पीए ने ख़ाना बनाने वाले को नौकरी से हटाया और कहा कि वो ख़ुद ये ज़िम्मेदारी संभाल लेंगे." उन्होंने बताया कि परिवार को सोनाली ने अपने चंडीगढ़ दौरे के बारे में बताया था लेकिन उस समय गोवा उनकी योजना में शामिल नहीं था.

रिंकू ढाका ने ये भी आरोप लगाया है कि सोनाली को ये पता लग गया था कि बीते साल हिसार में उनके घर से हुई 40 लाख रुपयों की चोरी के पीछे सांगवान का हाथ था. इसलिए वो घर लौटते ही उनके ख़िलाफ़ शिकायत करने वाली थीं.

ढाका ने कहा, "इस हत्या में संपत्ति का भी एंगल है. जब हमने सांगवान से हिसार के घर की चाबी मांगी तो उन्होंने कहा कि वो उनकी गाड़ी में है और वापस आने पर चाबी देंगे. सोनाली का गुरुग्राम में भी एक घर था और जब हमने उसकी चाबी मांगी तो सांगवान ने उस घर को अपना बताया."

वहीं हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सोनाली फोगाट के शव का पोस्टमॉर्टम चार घंटे चला और डॉक्टरों को उनके शरीर पर कई 'गुम चोट' (ऐसी चोट जो दिखाई न दे) के निशान मिले.

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इमेज कैप्शन, सोनाली फोगाट के शव को गुरुवार रात दिल्ली से हिसार भेजा गया

सोनाली की जेठानी ने लगाए पीए पर गंभीर आरोप

हिंदी अख़बार अमर उजाला लिखता है कि सोनाली फोगाट की जेठानी ने बताया है कि घटना वाले दिन शाम को उन्होंने सोनाली को कॉल किया था. हालाँकि, फोन उनके पीए सुधीर ने उठाया. सुधीर ने उन्हें उस वक़्त ही बताया कि वो लोग मुंबई में हैं और सुबह सोनाली की मौत की ख़बर मिली.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि साल 2019 में आदमपुर चुनाव से पहले सुधीर सांगवान सोनाली के प्रचार अभियान में लगे थे. परिवार ने सुधीर सांगवान पर सोनाली को फंसाकर उनका पीए बनने का भी आरोप लगाया है.

आरोप ये भी लगाया जा रहा है कि सोनाली को मौत से पहले वाली रात गोवा के मशहूर 'कर्लीज़' रेस्तरां ले जाया गया था. अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने रेस्तरां के मालिक एडविन नन्स के हवाले से इसकी पुष्टि की है. हालाँकि, रेस्तरां ने कहा है कि वहाँ सोनाली फोगाट को कोई जानता नहीं था और वो बाकी ग्राहकों की तरह ही आई थीं.

दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सोनाली को कर्लीज़ रेस्तरां में ड्रग्स दी गई थी या नहीं और तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रेस्तरां के वॉशरूम ले जाया गया या नहीं, इन सब पर तफ़्तीश जारी है.

राहुल गांधी मान नहीं रहे, गहलोत भी नहीं तैयार, फिर टल सकता है कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव

राहुल गांधी और अशोक गहलोत

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बीते काफ़ी समय से लंबित कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव एक बार फिर से कुछ सप्ताह के लिए टल सकता है.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अध्यक्ष पद की कुर्स़ी पर लौटने के लिए राहुल गांधी की अनिच्छा और राजस्थान सीएम अशोक गहलोत का भी पद के लिए जयपुर छोड़ने पर राज़ी न होने की वजह से ये चुनाव टल सकता है.

अशोक गहलोत ने कहा था कि पार्टी आख़िरी समय तक राहुल गांधी को मनाने की कोशिश करेगी.

कांग्रेस की कार्यकारी समिति आगामी रविवार को पार्टी अध्यक्ष के चुनाव की तारीख़ फ़ाइनल करने के लिए बैठक करने वाली है. पार्टी ने बुधवार को ही इस बारे में जानकारी दी थी.

पहले, 21 सितंबर तक कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना था लेकिन अब अख़बार ने पार्टी के जानकारों के हवाले से बताया कि इस प्रक्रिया को कुछ सप्ताह टाला जा सकता है.

अब अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए प्रक्रिया 28 सितंबर से शुरू होगी और ये 10 से 19 अक्टूबर के बीच पूरी होगी. इन तारीखों पर कांग्रेस कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान मंज़ूरी दी जा सकती है.

सात अगस्त से कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा भी शुरू होने वाली है. इस संबंध में सारी तैयारियां कर ली गई हैं और ड्राफ़्ट भी कांग्रेस अध्यक्ष के पास भेज दिया गया है.

कुछ पार्टी नेता सितंबर महीने में 'अशुभ दिनों' को चुनाव प्रक्रिया टालने के पीछे संभावित कारण मान रहे हैं, लेकिन अख़बर से कांग्रेस के एक वरिष्ठ सदस्य ने इस दावे को ख़ारिज किया है. उन्होंने कहा है कि कुछ ज़िलों में संगठन चुनाव ख़त्म नहीं होने की वजह से अध्यक्ष चुनाव में थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन बहुत से नेता इसके पीछे नेतृत्व को लेकर अनिश्चतता की स्थिति को ज़िम्मेदार बताते हैं.

अख़बार के अनुसार गैर-गाँधी अध्यक्ष की रेस में अशोक गहलोत का नाम सबसे आगे है लेकिन वो भी इस पद पर बैठने से हिचकिचा रहे हैं. कहा जा रहा है कि वो राजस्थान छोड़कर दिल्ली आने के पक्ष में नहीं है.

कुछ लोगों का मानना है कि अशोक गहलोत अपने किसी भरोसेमंद को सीएम बनाने की शर्त पर पद छोड़ सकते हैं. हालाँकि, ये स्थिति सचिन पायटल के समर्थकों को रास नहीं आएगी और इससे पार्टी में फूट बढ़ने की आशंका है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी अपने नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए विदेश गई हैं. राहुल और प्रियंका गांधी भी उनके साथ गए हैं.

किसान आंदोलन, कोरोना पर डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले पत्रकार को दिल्ली हवाईअड्डे से लौटाया गया

अंगद सिंह

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भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार अंगद सिंह को बुधवार को दिल्ली हवाई अड्डे से वापस भेज दिया गया. अंगद सिंह के परिवार ने गुरुवार को ये आरोप लगाया है और कहा है कि उन्हें वापस भेजे जाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कारण भी नहीं बताया गया.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने अंगद सिंह के परिवार के हवाले से बताया कि वो बुधवार रात साढ़े आठ बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचे थे और इसके तीन घंटे के भीतर उन्हें वापस भेज दिया गया. अंगद सिंह अमेरिकी वेबसाइट वाइस न्यूज़ के लिए काम करते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के सवाल पर अभी तक इमिग्रेशन अधिकारियों ने कोई टिप्पणी नहीं दी है. अंगद सिंह भारत में किसान आंदोलन और यहाँ कोरोना महामारी के दौरान प्रबंधन को लेकर कई डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं.

अंगद सिंह की माँ और पेशे से लेखक गुरमीत कौर ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा, "मेरा बेटा एक अमेरिकी नागरिक है, वह हमसे मिलने पंजाब आने वाला था लेकिन उसे दिल्ली से ही डिपोर्ट कर दिया गया. अंगद को कुछ देर तक एयरपोर्ट पर ही रोककर रखा गया और फिर न्यूयॉर्क जाने वाली अगली उड़ान में बैठाकर वापस भेज दिया गया. इसके पीछे कोई कारण नहीं बताया गया."

गुरमीत सिंह ने लिखा कि उनके बेटे की अवॉर्ड विनिंग पत्रकारिता से प्रशासन डरता है. उन्होंने जो कहानियां की हैं, या वो जो कहानियां करने में सक्षम हैं, उससे ज़ाहिर होता है कि अंगद सिंह को अपनी मातृभूमि से प्यार है, जो वो (सरकार) बर्दाश्त नहीं कर सकते.

गुरमीत सिंह ने ये भी लिखा है कि एक सिख, एक पत्रकार और सच-न्याय का सिपाही होना आसाा नहीं है. सच बोलने की कीमत होती है और हमें ये चुकानी होगी.

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