पीएम मोदी ने लाल किले से भ्रष्टाचार और परिवारवाद की बात क्यों की?

नरेंद्र मोदी

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

आज़ादी के 75 साल बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सामने जो दो सबसे बड़ी चुनौती नज़र आती है. वो हैं भ्रष्टाचार और परिवारवाद.

लाल किले के प्राचीर से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, " भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है. उससे देश को लड़ना ही होगा. हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटाना भी पड़े, हम इसकी कोशिश कर रहे हैं.

जब मैं भाई-भतीजावाद और परिवारवाद की बात करता हूं, तो लोगों को लगता है कि मैं सिर्फ़ राजनीति की बात कर रहा हूँ. जी नहीं, दुर्भाग्य से राजनीतिक क्षेत्र की उस बुराई ने हिंदुस्तान के हर संस्थान में परिवारवाद को पोषित कर दिया है."

उन्होंने आगे कहा, "जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफ़रत का भाव पैदा नहीं होता, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक ये मानसिकता ख़त्म नहीं होने वाली है."

पीएम मोदी के भाषण के इस अंश की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों पर ख़ूब हो रही है.

राजनीति के कुछ जानकार पीएम मोदी के इस बयान को विपक्ष पर हमले के रूप में देख रहे हैं. तो कुछ का कहना है कि उनके इस बयान से बीजेपी के नेताओं में भी खलबली है. परिवारवाद और भ्रष्टाचार के उदाहरण बीजेपी में भी हैं.

कुछ जानकार इसे 2024 की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं.

कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शायद मोदी अपने मंत्रियों के बारे में ये बातें कह रहे थे.

पीएम मोदी

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लाल किले से कहना कितना अहम

वरिष्ठ पत्रकार निस्तुला हेब्बार कहती हैं, "पीएम मोदी, भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों, दोनों के ख़िलाफ़ लोगों की मानसिकता में बदलाव की बात कर रहे हैं. वो समाज का नज़रिया बदलने की बात कह रहे हैं. जब लोगों की मानसिकता बदलेगी तो उससे राजनीतिक बदलाव आएगा, वो बदलाव सालों तक रहेगा. इससे राजनीतिक तौर-तरीका बदलेगा. भ्रष्टाचार के ज़िक्र से उनका इशारा केवल राहुल सोनिया पर ही नहीं बल्कि लालू यादव पर भी था. भ्रष्टाचार के आरोप में सज़ा पाने वाले राजनीतिक शख्सियतों में लालू यादव सबसे बड़ा चेहरा हैं.

निस्तुला आगे कहती हैं, "परिवारवाद का ज़िक्र उन्होंने केवल राजनीति के लिए नहीं किया, बल्कि बाकी संस्थानों के लिए भी कहा. ये बेहद महत्वपूर्ण बात है. पीएम के मुताबिक ज़रूरी है कि परिवारवाद को पनाह देने वाले और भ्रष्ट लोग पावर में ना आ जाएं क्योंकि फिर वो देशहित की जगह अपना हित देखेंगे."

ऐसा नहीं कि भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर पीएम मोदी ने पहली बार बोला है.

इस साल मार्च में पाँच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद भी बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि 'अगर आपके बच्चों को टिकट नहीं मिला तो उसकी वजह मैं हूं. मेरा मानना है कि परिवारवाद लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.'

पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से पहले भी न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने परिवारवाद पर जम कर हल्ला बोला था.

इस बार उन्होंने लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में इसे दोहराया है. इससे पहले रैलियों में और दूसरे पब्लिक फ़ंक्शन में ऐसा कहने को राजनीति से जोड़ा जाता था. लेकिन लाल किले से बोलने का मतलब है कि वो पूरे देश को इस बारे में संबोधित कर रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी का मानना है कि 15 अगस्त, आज़ादी के 75वें साल, लाल किला और पीएम मोदी का ये कहना - निश्चित तौर पर ये बातें उनके संदेश को और महत्वपूर्ण बना देती हैं.

नीरजा के मुताबिक़ पीएम मोदी के आज के भाषण में तीन राजनीतिक पंचलाइन थी - भ्रष्टाचार, परिवारवाद और को-ऑपरेटिव कॉम्पिटीटिव फ़ेडरलिज़्म.

भ्रष्टाचार पर उनकी बात इसलिए अहमियत रखती है कि क्योंकि इस वक़्त विपक्ष के नेताओं पर ईडी और दूसरी एजेंसियों की कार्रवाई रोज़ सुर्ख़ियां बटोर रही हैं. पार्थ चटर्जी, संजय राउत, राहुल गांधी या फिर सोनिया गांधी सब ईडी के निशाने पर हैं.

विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि मोदी सरकार की नीतियों से जो लोग इत्तेफ़ाक नहीं रखते, ईडी का इस्तेमाल उन्हीं विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है.

लाल किले पर मोदी

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2024 चुनाव का नैरेटिव

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार के मामले को एक नया स्पिन दिया.

नीरजा कहती हैं, "पीएम मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उनकी इस लड़ाई में वो देशवासियों का सहयोग चाहते हैं. संदेश साफ़ है कि 2024 के चुनाव में भ्रष्टाचार एक अहम मुद्दा होगा. ईडी का इस्तेमाल आगे भी जारी रहेगा. इसमें किसी को आगे झिझक नहीं होगी. आज के भाषण के बाद ऐसा मुझे लगता है."

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी यहाँ एक और बात याद दिलाते हैं.

बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि पीएम मोदी नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी 2024 में विपक्ष को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कॉर्नर करना चाहती है. 2012 में भी यूपीए सरकार को बीजेपी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही घेरना शुरू किया था. 2014 के चुनाव आते आते, यूपीए 2 को सबसे भ्रष्ट सरकार के रूप में बीजेपी ने जनता के सामने पेश किया और लोगों को ये संदेश दिया कि इस भ्रष्ट सरकार को हटाना है.

अब यही काम बीजेपी ने 2022 में शुरू किया है. आज जितने भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं वो विपक्षी पार्टियों के सामने आ रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी फ़िलहाल अपनी इमेज बनाने की कवायद में जुटी है. भ्रष्टाचार और परिवारवाद दोनों ही 2024 में अहम मुद्दे होने वाले हैं. इसके ज़रिए उन्होंने अपनी पार्टी को भी एक संदेश दिया है. 2024 की लड़ाई इन्हीं मुद्दों पर लड़ी जाएगी. उनकी पार्टी के नेता इन दोनों बातों से बचें ताकि इस लड़ाई को उनकी पार्टी मज़बूती से लड़ सके."

तेजस्वी सूर्या

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बीजेपी का परिवारवाद

विजय त्रिवेदी कहते हैं भारत में तमाम राजनीतिक दल परिवारवाद की राजनीति में इस वक़्त उलझे नज़र आते हैं. लेकिन लाल किले से भाषण देते हुए पीएम ने किसी पार्टी विशेष का नाम नहीं लिया. उन्होंने इसे देश के लिए एक चुनौती के रूप में पेश किया.

कांग्रेस की भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि पीएम मोदी का ये हमला अपने ही मंत्रियों और उनके बेटों पर है.

हाल ही में बीजेपी नेता तेजस्वी सूर्या और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले के बीच परिवारवाद की राजनीति को लेकर संसद में नोंकझोंक भी हुई थी.

सुप्रिया सुले ने तेजस्वी सूर्या से पूछा था कि 'क्या वो रवि सुब्रमण्यम को जानते हैं जो कर्नाटक से एमएलए हैं.' दरअसल तेजस्वी सूर्या के चाचा रवि सुब्रमण्यम कर्नाटक के बासावानागुड़ी से बीजेपी एमएलए हैं.

सुप्रिया सुले ने उसी भाषण में बीजेपी के उन नेताओं की लिस्ट गिनाई थी जो राजनीतिक घरानों में पैदा हुए.

इस सूची में उन्होंने पंकजा मुंडे, पूनम महाजन, रक्षा खडसे, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान का ज़िक्र करते हुए कहा था, ये तमाम नेता भी राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जैसा मैं रखती हूं. लेकिन इस सच के लिए मैं शर्मिंदा नहीं हूं. मुझे इस बात पर गर्व है.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव के पहले चरण के वोटिंग से ठीक पहले बीजेपी में परिवारवाद की राजनीति पर खुल कर अपनी बात रखी थी.

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''बीजेपी में परिवारवाद' के विपक्ष के झूठ का सच मैं दुनिया के सामने लाना चाहता हूं. एक परिवार से अनेक लोग जनता के बीच में जाएं और जनता उनको चुन कर भेजे, वो राजनीति का एक पहलू है. लेकिन एक दूसरा पहलू भी है.

एक ही परिवार के लोग उस पार्टी के अध्यक्ष बनें, ट्रेजरार बनें, उस पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड में शामिल हों. पिताजी अगर नहीं कर सकते तो बेटा अध्यक्ष बने, ये जो वंशवाद चल रहा है, जिसकी बारिश हो रही है, जिसमें पार्टी परिवार की बन जाती है. ये वंशवाद का दूसरा पहलू है."

राहुल और अखिलेश

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परिवारवाद और क्षेत्रीय दल

इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने वशंवाद के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु का ज़िक्ऱ भी किया था. इस लिस्ट में बिहार का नाम तब उन्होंने नहीं लिया था. लेकिन आज वहां भी नीतीश और तेजस्वी की पार्टी सत्ता में आ गई है.

नीरजा कहती हैं, "परिवारवाद के ख़िलाफ़ पीएम मोदी ने जो कहा वो 2024 के चुनाव में अहम मुद्दा होने वाला हैं, आज उस नैरेटिव की एक झलक उन्होंने पेश की थी."

वो आगे कहती हैं, "परिवारवाद पर पीएम मोदी का बयान एक तरह से क्षेत्रीय पार्टियों पर धावा बोलने जैसा भी है. इस समय परिवारवाद क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे ज़्यादा है. चाहे पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को देख लीजिए या बिहार में तेजस्वी को, एमके स्टालिन, जगन मोहन रेड्डी, केसीआर, नवीन पटनायक - किसी को देख लीजिए - सब क्षेत्रीय पार्टियां परिवार की पार्टियां हैं. नीतीश कुमार और केजरीवाल को छोड़ कर."

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी हाल ही में बिहार में रीजनल पार्टियों के अस्तित्व को लेकर बड़ी बात कही थी.

नीरजा जेपी नड्डा के बयान को और पीएम मोदी के आज के बयान को जोड़ कर देखती हैं.

तेजस्वी और अखिलेश

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नीरजा कहती हैं, "परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर दिया गया पीएम मोदी का बयान क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने का काम करेगा."

हालांकि पीएम मोदी के आज के भाषण को नीरजा बहुत अच्छा मानती हैं. उनका कहना है कि ''आज का भाषण फ़ॉरवर्ड लुकिंग भाषण था. पाँच कर्तव्य, महिला सशक्तीकरण की बात, आने वाली समस्याओं का ज़िक्ऱ, लोगों को पानी बचाने के कर्तव्य की याद दिलाना, अनुसंधान पर फ़ोकस सब बातें ऐसी थीं जिससे कोई भी व्यक्ति इत्तेफ़ाक ही रखेगा, कोई विरोध नहीं करेगा.''

विजय त्रिवेदी कहते हैं कि ''जनता को उम्मीद थी कि पीएम मोदी आज के ऐतिहासिक दिन कोई बड़ा एलान करेंगे. लेकिन उन्होंने कोई एलान नहीं किया बल्कि 25 सालों का रोड मैप दिया है.''

वहीं निस्तुला कहती हैं कि ''नारी शक्ति को लेकर उन्होंने जो बात की उससे ज़ाहिर होता है कि आने वाले दिनों में बीजेपी महिलाओं को एक बड़े वोट बैंक के तौर पर देख रही है, जो जाति और धर्म आधारित वोट बैंक से भी ज़्यादा बड़ा और अहम होगा.''

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