कार्तिकेय सिंह: बिहार के नए क़ानून मंत्री के ख़िलाफ़ विपक्ष हमलावर क्यों

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- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से
बिहार और देश की राजनीति के लिहाज से बीता पखवाड़ा खासा उथल-पुथल भरा रहा. नीतीश कुमार अब एनडीए के बजाय महागठबंधन का हिस्सा हैं. महागठबंधन का हिस्सा बनने के बाद मंगलवार (16 अगस्त) को नए मंत्रिमंडल का विस्तार देखने को मिला. कई पुराने तो कई नए नामों को मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली, लेकिन उन नए नामों में से एक ऐसा नाम भी है जिनके नाम को लेकर बड़ा विवाद हो गया है.
ये नाम है कार्तिकेय सिंह उर्फ़ कार्तिकेय मास्टर का. कार्तिकेय सिंह ने 'नीतीश सरकार' में बतौर 'विधि मंत्री' शपथ ली है.
कार्तिकेय सिंह के मंत्री के तौर पर शपथ लेते ही सोशल मीडिया समेत तमाम जगहों पर ऐसी ख़बरें चलने लगीं कि उनके ख़िलाफ़ वारंट जारी किया जा चुका है. कोर्ट की नज़रों में वो फ़रार हैं, और फ़रार होते हुए उन्होंने बतौर विधि मंत्री शपथ ले ली.

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क्या है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन पर पटना ज़िले के बिहटा थाने में अपहरण का मामला दर्ज है. मामला आईपीसी की 363, 365, 364 और 34 धाराओं के तहत दर्ज है.
यह मामला साल 2014 में दर्ज किया गया था. इस मामले में उनके साथ 17 और लोग अभियुक्त हैं. अन्य अभियुक्तों में पूर्व विधायक अनंत सिंह और बंटू सिंह के नाम शामिल हैं. हाईकोर्ट इस मामले में उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज भी कर चुका है.
हालांकि इस बीच दानापुर सिविल कोर्ट के एक और आदेश को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.
दानापुर सिविल कोर्ट की ओर से जारी किए गए इस आदेश में उन्हें 1 सितंबर, 2022 तक राहत दी गई है. इस आदेश में ऐसा लिखा गया है कि 1 सितंबर तक कार्तिकेय मास्टर के ख़िलाफ़ कोई ज़ोर-ज़बर्दस्ती न की जाए.
यह आदेश 12 अगस्त को जारी किया गया है. जबकि शपथग्रहण 16 अगस्त को हुआ.
कार्तिकेय सिंह के वकीलों के मुताबिक उन पर लगे आरोप मिथ्या हैं, "उनमें कोई तथ्य नहीं. विपक्ष अपनी राजनीति के तहत ऐसे आरोप लगा रहा है. पुलिस की ओर से सौंपी गई डायरी के हिसाब से कार्तिकेय सिंह निर्दोष हैं. वहीं जारी वारंट पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया है."
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सीएम को जानकारी नहीं, विपक्ष हमलावर
क़ानून मंत्री के ख़िलाफ़ जारी वारंट के संदर्भ में जब मीडियाकर्मियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल किए तो उनका कहना था कि इस संदर्भ में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, उन्हें कुछ पता नहीं है.
वहीं क़ानून मंत्री ने चुनाव लड़ते वक्त पेश किए गए हलफ़नामे के हवाले से ऐसा कहा कि वे सारी जानकारी पहले ही साझा कर चुके हैं.
बीजेपी के राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, "अगर कार्तिकेय सिंह के ख़िलाफ़ वारंट है तो उन्हें सरेंडर करना चाहिए. लेकिन उन्होंने क़ानून मंत्री के रूप में शपथ ली है. मैं नीतीश कुमार से पूछता हूं कि क्या वो बिहार को लालू के समय में वापस ले जाना चाहते हैं? कार्तिकेय सिंह को तुरंत बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए."
सुशील कुमार मोदी के आरोपों पर जब पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने तमाम आरोपों को सिरे से नकार दिया और कहा कि "सुशील मोदी ऐसे ही अनर्गल आरोप लगाते रहते हैं."
उधर जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने कहा, "क़ानून मंत्री के पद से कार्तिकेय जी को ख़ुद इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. मैं नीतीश कुमार जी को अपनी राय से आज ही अवगत करा दूंगा. सरकार के सम्मान में इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. आग्रह करना चाहूंगा लालू जी से कि 90 के बाद आप सत्ता में आए हैं तो आपको ऐसे लोगों को हटा देना चाहिए. जिस तरह के लोगों को मंत्रिमंडल में लाए हैं उन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं."
हालांकि भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता निखिल आनंद क़ानून मंत्री पर दर्ज किए गए मामले के संदर्भ में कहते हैं, "यह कम आश्चर्य की बात नहीं कि आरजेडी ने जिस व्यक्ति को बिहार का क़ानून मंत्री बनाने का काम किया है, जब वे शपथ ले रहे थे. ठीक उसी वक़्त उन्हें अपहरण कांड में कोर्ट में पेश होना था, लेकिन इन तथ्यों को नज़रअंदाज करते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. ऐसे लोग बिहार की जनता के मान-सम्मान की कभी भी हिफ़ाजत नहीं कर सकते. महागठबंधन सरकार का नया मंत्रिमंडल भयावह तस्वीर पेश करता है."

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कौन हैं कार्तिकेय सिंह?
कार्तिकेय सिंह उर्फ़ कार्तिकेय मास्टर राजद (राष्ट्रीय जनता दल) के एमएलसी हैं. वो पटना निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे. तब उनकी आमने-सामने की लड़ाई सत्तारूढ़ दल जद (यू) से थी.
कार्तिकेय सिंह को बाहुबली नेता अनंत सिंह के खेमे का व्यक्ति माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि अनंत सिंह के जेल में रहने के बावजूद उनके मंत्री बनने के पीछे भी अनंत सिंह की अहम भूमिका है.
राजद और जदयू का क्या कहना है
क़ानून मंत्री पर लगे आरोप के बचाव में राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव कहते हैं, "इस मामले में स्टे ऑर्डर लगा हुआ है, और 20-25 लोगों के भी नाम हैं. किसी पर भी आरोप लगा देने से वह दोषी हो जाएगा क्या? आरोप तो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर भी लगे थे. एक बात तय है कि क़ानून तोड़ने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा."
"क़ानून अपना काम करेगा. हम अपनों को बचाने और ग़ैरों को फंसाने वाले नहीं हैं."
वहीं जद (यू) के प्रवक्ता अभिषेक झा ने सीएम नीतीश कुमार की बात को ही आगे बढ़ाते हुए कहा कि 'सीएम इस संदर्भ में पहले ही बोल चुके हैं कि उन्हें जानकारी नहीं, लेकिन एक बात तो तय है कि हमारी सरकार में किसी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा. उचित कार्रवाई होगी.
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