तेजस्वी यादव पर ट्वीट कर घिरे गिरिराज सिंह, पीएम मोदी को भी उलाहना

तेजस्वी यादव और गिरिराज सिंह

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राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव पाँच साल बाद फिर बिहार की सत्ता के केंद्र में हैं. उनके उपमुख्यमंत्री बनने के बाद बेरोज़गारी को लेकर किए गए उनके उस वादे की ख़ूब चर्चा हो रही है जिसे लेकर उन्होंने विधानसभा चुनाव में जनता से वोट माँगा था.

2020 में रोज़गार और बेरोज़गारी के मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतरे तेजस्वी ने बिहार के लिए '10 लाख सरकारी नौकरी' का वादा किया था.

बुधवार को डिप्टी सीएम बनने के बाद से ही तेजस्वी से रोज़गार को लेकर बड़ी घोषणा की उम्मीद की जा रही थी मगर उन्होंने तत्काल कोई स्पष्ट एलान नहीं किया है.

लेकिन इस बीच तेजस्वी का एक बयान सामने आया है जिसकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा है.

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इस वीडियो क्लिप में तेजस्वी ऐसा कहते दिखते हैं कि इस वादे को उन्होंने तब पूरा करने की बात की थी जब वो मुख्यमंत्री होते.

ये वीडियो क्लिप एक टीवी चैनल के इंटरव्यू का हिस्सा है जिसमें 10 लाख नौकरियों को लेकर किए गए उनके वादे पर सवाल पूछा गया.

तेजस्वी यादव ने इसके जवाब में कहा, "देखिए, 2020 में यह हमारा मुद्दा रहा और अभी भी यह हमारा मुद्दा है क्योंकि बेरोज़गारी वास्तव में सबसे बड़ी समस्या है, ना केवल बिहार की बल्कि पूरे देश की है. केंद्र सरकार तो नौकरियां खा गई. कारखाने बंद हो गए. कुछ नहीं मिल रहा लोगों को.तो आप यह कह सकते हैं कि वो जो दस लाख का वादा हमने किया था, उस कमिटमेंट को हम पूरा करेंगे.

"वादा जब हमने किया था तब कहा था कि जब मुख्यमंत्री बनेंगे तब करेंगे. अभी तो हम उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने हमसे चर्चा की है और वो इस मामले पर गंभीर हैं. उन्होंने अधिकारियों को ज़्यादा से ज़्यादा नौकरियां देने के लिए निर्देशित किया है."

"अभी तो विश्वास मत तक नहीं हुआ है. एक बार विश्वास मत हो जाए, सरकार बन जाए, उसके बाद लोगों के लिए यह काम होगा. ज़रूर होगा. हमारे हाथों नहीं तो नीतीश कुमार जी के हाथों होगा. उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. मुख्यमंत्री जी करेंगे तो हमें और ख़ुशी होगी कि जिन नौजवानों का सवाल था, उन्हें हम नौकरी दे पाए."

डिप्टी सीएम

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बयान की चर्चा क्यों

तेजस्वी यादव का ये बयान अचानक से चर्चा में तब आ गया, जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस वीडियो का एक हिस्सा ट्वीट करते हुए तेजस्वी यादव पर तंज़ किया.

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गिरिराज सिंह ने वीडियो का 21 सेकंड का हिस्सा पोस्ट करते हुए तेजस्वी पर चुटकी ली थी. उन्होंने 21 सेकंड के इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा था, "10 लाख रोज़गार देने का जो हमने वादा किया था वह हम मुख्यमंत्री बनने पर पूरा करेंगे अभी तो हम उप-मुख्यमंत्री हैं."

हालांकि वीडियो के एक सिर्फ़ एक हिस्से को पोस्ट करने को लेकर गिरिराज ट्विटर-यूज़र्स के निशाने पर आ गए.

ख़ुद तेजस्वी ने इस पर उन्हें आड़े हाथों लिया. तेजस्वी ने गिरिराज वाले ट्वीट को री-ट्वीट करके हुए अपना पूरा इंटरव्यू शेयर किया और लिखा, "श्रीमान जी, इतना बेशर्म मत बनिए. एक फुट लंबी चोटी रखने से कोई ज्ञानी नहीं बन जाता, जैसे आप रखते हैं. आप लोगों की इन चिरकुट हरकतों, एडिटेड वीडियो व सड़क छाप बयानों की बदौलत ही भाजपा की यह दुर्दशा है. इन बेचारों का बिहार में कोई चेहरा ही नहीं."

तेजस्वी ने गिरिराज सिंह को पूरा इंटरव्यू सुनने के लिए भी लिखा है.

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आरजेडी के कई विधायकों ने भी गिरिराज सिंह को आधा-अधूरा वीडियो शेयर करने के लिए निशाने पर लिया.

नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव

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सोशल मीडिया यूज़र्स ने पूछा सवाल

गिरिराज सिंह के ट्वीट पर बहुत से लोगों ने उन्हें आधा वीडियो पोस्ट करने के लिए ट्रोल किया.

शोएब नाम के ट्विटर यूज़र ने लिखा है कि वो दिन गए जब जनता को आप लोग आधे वीडियोज़ दिखाकर के पागल भक्त बनाया करते थे.

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शशिकांत कुमार लिखते हैं, "आप भी तो 19 लाख रोज़गार देने का वादा किए थे क्या हुआ उस रोज़गार का ? मोदी जी बोले थे 2 करोड़ रोज़गार देंगे मिला क्या? 15-15 लाख रुपये सबके बैंक अकाउंट में आएगा, कहां आया?"

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जयराम शर्मा ने लिखा है, "दो करोड़ बेरोज़गारों को हर साल नौकरी देना और हर हिंदुस्तानी के खाते में पंद्रह लाख रुपये देने का वादा जो मोदी जी ने किया था, पहले उसका क्या हुआ गिरिराज जी? तेजस्वी तो ख़ुद बेरोज़गार हैं, उनके वादे का क्या भरोसा?"

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जिज्ञेश लिखते हैं, "अगर अगर मुख्यमंत्री होते तो 10 लाख रोज़गार देते, अभी आप उप-मुख्यमंत्री हैं, उस हिसाब से कम-से-कम 5 लाख लोगों को तो रोज़गार दे ही सकते हो. सही कहा ना? इतना तो आप पढ़े लिखे हो ही."

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रामसागर तिवारी ने ट्वीट किया है, "नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद त्याग कर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का पद अति शीघ्र दे देना चाहिए ताकि बिहार में बेरोज़गारी दूर हो सके."

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ललित शर्मा नाम के यूज़र ने लिखा है, "आपके मालिक देश को 2 करोड़ रोज़गार देने वाले थे और बिहार में आपकी सरकार 19 लाख रोज़गार देने वाली थी न! 2 करोड़ दे पाए न 19 लाख. उसके बारे में भी दो शब्द बोल दीजिए."

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तेजस्वी यादव ने क्या वादा किया था

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए महागठबंधन ने साझा घोषणापत्र जारी किया था. इसका नाम 'प्रण हमारा, संकल्प बदलाव का' दिया गया था. घोषणा पत्र में 25 सूत्रीय साझा कार्यक्रम तय किया गया था.

महागठबंधन पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव, बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत कई नेताओं ने इसे जारी किया था.

घोषणापत्र जारी करने के दौरान रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था कि अगर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार में सरकार बनती है तो महागठबंधन तीन कृषि विरोधी क़ानूनों को समाप्त करने के लिए पहले विधानसभा सत्र में एक विधेयक पारित करेगा.

"प्रण हमारा, संकल्प बदलाव का "

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इमेज कैप्शन, महागठबंधन का घोषणा पत्र

इस घोषणापत्र में 10 लाख स्थाई नौकरियों की समय पर बहाली की प्रक्रिया को पहली ही कैबिनेट बैठक से शुरू करने का वादा किया गया था.

वादा किया गया था कि शिक्षा क्षेत्र पर ध्यान देते हुए बजट का 12 प्रतिशत इस पर खर्च किया जाएगा. प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों और माध्यमिक स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होंगे.

वादा किया गया था कि मनरेगा के तहत प्रति परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति को 100 से बढ़ाकर 200 दिन प्रतिवर्ष काम दिया जाएगा. मनरेगा की ही तर्ज पर राज्य की रोज़गार योजना बनाने का भी आश्वासन दिया गया था.

इस संकल्प पत्र में समान काम और समान वेतन के वादे को दोहराया गया था.

पीएम नरेंद्र मोदी

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पीएम मोदी के वादे का क्या

साल 2013 में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी पार्टी अगर सत्ता में आती है तो एक करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा करेगी.

इसके एक साल बाद ही उनकी पार्टी दिल्ली की सत्ता पर भारी बहुमत से काबिज़ हो गई और बतौर पीएम यह उनका दूसरा कार्यकाल है.

हालांकि साल 2017 में एक अध्ययन में कहा गया कि अध्ययन में कहा गया है कि 2012 और 2016 के बीच भारत में रोज़गार वृद्धि में बेतहाशा कमी आई है.

इस अध्ययन के अनुसार, सबसे चिंताजनक बात है कि 2013-14 और 2015-16 के बीच देश में मौजूदा रोज़गार में भी भारी कमी आई है. आज़ाद भारत में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है.

भारत का आर्थिक सर्वे कहता है कि रोज़गार सृजन भारत की 'एक मुख्य चुनौती' है. साल 2030 तक हर साल 1.2 करोड़ भारतीय नौकरी पाने की क़तार में खड़े होने लगेंगे.

इस साल मॉनसून सत्र में लोकसभा में सरकार ने नौकरी से जुड़े जो आंकड़े पेश किए उससे स्थिति और स्पष्ट हो जाती है.

हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि अप्रैल 2014 से मार्च 2022 के बीच आठ सालों में विभिन्न केंद्र सरकार के विभागों में स्थायी नौकरी पाने के लिए क़रीब 22 करोड़ लोगों ने आवेदन किया.

इसी अवधि में जिन लोगों को अंततः केंद्र सरकार में स्थायी नौकरी मिली उनकी संख्या क़रीब 7.22 लाख थी.

आसान शब्दों में कहा जाए तो जितने लोगों ने नौकरी के लिए आवेदन किया उसमें से केवल 0.32 प्रतिशत लोगों को नौकरी मिली.

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(कॉपीः भूमिका राय)

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