आरसीपी सिंह पर जदयू का 40 बीघा ज़मीन ख़रीदने का आरोप, क्या हैं दोनों पक्ष के दावे

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- Author, चंदन शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और हाल तक केंद्रीय मंत्री रहे रामचंद्र प्रसाद सिंह पर बेहिसाब संपत्ति और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा है.
आरसीपी सिंह पर उनकी ही पार्टी ने आरोप लगाया है कि जदयू में रहते हुए उन्होंने साल 2011 से 2022 के बीच करोड़ों रुपए की बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है.
इसे लेकर जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बताया है कि पार्टी ने आरसीपी सिंह को नोटिस भेजकर बेहिसाब संपत्तियों पर उनसे जवाब मांगा है.
उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया को बताया, "हमारी पार्टी भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है. ऐसी स्थिति में पार्टी और सरकार से जुड़े हुए किसी व्यक्ति के बारे में अगर किसी भी स्रोत से जानकारी आई है, तो स्वाभाविक रूप से पार्टी का ये दायित्व बनता है कि वो उस व्यक्ति से पूछे कि स्रोतों से मिली सूचना पर आपका क्या कहना है."
उन्होंने कहा, "इस सूचना की जानकारी संबंधित व्यक्ति को दे दी गई है. अब उनकी ओर से क्या कहा जाता है, क्या सफाई दी जाती है या नहीं दी जाती है, इस पर पार्टी का अगला कदम निर्भर करेगा. तब तक आप लोगों को इंतजार करना चाहिए."
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नोटिस भेजने के कारण को लेकर उन्होंने कहा, "कारण तो बिल्कुल स्पष्ट है कि कई स्रोतों से जानकारी मिली है कि सरकार में रहते हुए, पार्टी के शीर्ष पद पर रहते हुए पूर्व के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने जो भी संपत्ति अर्जित की, उसके बारे में उनका क्या कहना है, पार्टी ये जानना चाहती है. अब वो क्या बताएंगे, इस पर अपनी सफाई देंगे, इस बात का इंतजार हम करेंगे. इसके बाद पार्टी अगले कदम पर विचार करेगी."
उपेंद्र कुशवाहा ने बताया, "जानकारी में जो सच्चाई प्रतीत होती है, अगर वास्तव में सफाई के बाद भी वही सच्चाई सामने आएगी, तो ये बहुत ही आपत्तिजनक मामला होगा, लेकिन हम अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनकी ओर से क्या कहा जाता है, ये जानना चाहेंगे. जिस स्तर से भी जांच कराने की जरूरत होगी तो कार्रवाई की जाएगी."

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इन आरोपों पर क्या है आरसीपी धड़े कापक्ष
जदयू के इन आरोपों पर आरसीपी सिंह का पक्ष जानने के लिए बीबीसी हिंदी ने जब उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो किसी काल या मैसेज का जवाब उनकी ओर से नहीं आया.
आरसीपी सिंह समर्थक और जून में अनुशासनहीनता के आरोप में जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किए गए जीतेंद्र नीरज ने आरसीपी पर लगे आरोपों को लेकर कहा, "ये आरोप पूरी तरह से हास्यापद हैं. पार्टी ने एक बार भी आरसीपी सिंह का पक्ष जाने बगैर ये सभी आरोप लगाए हैं."
उन्होंने कहा, "पार्टी तो अब जांच एजेंसी भी बन गई है. मैं तो पहले यह कहना चाहूंगा कि यह रवैया केवल इन्हीं के लिए अपनाया गया. मीडिया में लगातार उनकी पार्टी के दो तीन मंत्रियों के बारे में साक्ष्य के आधार पर ख़बर वायरल होते रहे हैं, लेकिन उन आरोपों को संज्ञान में भी लेना उचित नहीं समझा गया."
पार्टी नेतृत्व पर तंज़ कसते हुए उन्होंने कहा, "एक व्यक्ति जिसने पार्टी के लिए क्या कुछ नहीं किया, उसे कितना अपमानित करेंगे आप? उन्हें छुटभैया लोगों और सड़क छाप नेताओं से लगातार अपमानित करवाया जा रहा है, गालियां दिलवाई जा रही है. और वो (आरसीपी सिंह) यह सब चुपचाप सहन कर रहे हैं."
उनके अनुसार, "हालत यह हो गई कि उन्हें उनके आवास से निकाल दिया, उन्हें राज्यसभा का टिकट नहीं दिया. चलो भाई पार्टी का निर्णय था नहीं दिया, कोई बात नहीं. लेकिन जो आदमी एक शब्द नहीं बोल रहा है, उसे इतना अपमानित कीजिएगा और इस हद तक गिर जाइएगा, तो ये काफी दुखद है."
उन्होंने कहा, "जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, उसके बारे में आरोप लगाने के पहले कोई साक्ष्य तो जुटा लो, लेकिन आपके और आपकी पार्टी के अंदर इतनी भी नैतिकता नहीं रही कि एक बार फोन करके या उनसे मिलकर पार्टी के नेताओं को बात कर लेना चाहिए था और सच्चाई समझ लेनी चाहिए थी. उसके बाद इस तरह से मामलों को सार्वजनिक किया जा सकता था. लेकिन उन्हें इस बारे में जानकारी तक नहीं दी गई."

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जीतेंद्र नीरज ने आगे कहा, "जिस जमीन की आप बात कर रहे हैं, अभी तो सर से हमारी बातचीत नहीं हुई है, लेकिन जो हमारी जानकारी में है, वो 9,000 रुपए डिसमिल वाली जमीन है. ये कोई दिल्ली, नोएडा या पटना की जमीन तो है नहीं. अगर सब जमीन का पैसा जोड़ लें तो इससे पटना में एक फ्लैट नहीं खरीदा जा सकता."
उन्होंने यह भी दावा किया है कि इनमें से 10 बीघा के आसपास ऐसी जमीन की रजिस्ट्री हुई है, जो दूसरे जमीन के बदले में एक्सचेंज किया गया है.
उनके अनुसार, "वो इसलिए कि वे वहां मंदिर, तालाब वगैरह बना रहे हैं. सूर्य मंदिर बन गया है, राम मंदिर बन रहा है. गांव मं शैक्षणिक संस्थान आदि भी बनाने की योजना है. इन सबके लिए एक जगह उतनी जमीन नहीं थी, जिसके लिए ये सब अदला-बदली की गई."
वो आगे कहते हैं, "आरसीपी सिंह ने एक भी कट्ठा जमीन अपने नाम से आज तक नहीं खरीदा. न उनके नाम से कोई जमीन है, न गाड़ी और न उनके नाम से कहीं कोई घर है. जब उन्होंने अपने नाम से एक कट्ठा भी जमीन नहीं खरीदा तो उन पर 40 बीघा जमीन खरीदने का आरोप लगाया जा रहा है."
उनके अनुसार, "रही बात उनकी बेटियों की, तो उनमें से एक बेटी तो आईपीएस अधिकारी हैं. वो जो भी रिटर्न भरती होंगी, वो वेबसाइट पर डाला जाता है, उनसे हमारी बात हुई भी है. उनसे मैंने पूछा भी तो उन्होंने कहा कि अगर कोई इंसान दो पैसे कमा भी रहा है और यदि खर्च करके कुछ पैसा बच जाता है तो ऐसा संविधान में कहां लिखा है कि उससे जमीन खरीदना अपराध है."

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'पार्टी से निकालने का आधार बनाया जा रहा'
आरसीपी समर्थक इन नेता ने उन पर लगाए गए आारोपों की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आखि़र जब उनके रिश्ते पार्टी से खराब हो गए, तब इन मसलों को क्यों उठाया गया. उनके अनुसार, जब उठाया गया तो भी बड़ी खोजबीन के बाद मामला 'ढाक के तीन पात' रहा है.
उन्होंने आगे बताया, "अगर उन्हें पार्टी से निकालना ही है, तो ये सब खेल क्यों किया जा रहा है? पार्टी से निकालना ही है तो निकाल दीजिए. उन्हें जलील क्यों किया जा रहा है? ऐसे घटिया आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं?"
जीतेंद्र नीरज के अनुसार, "अभी तक उन्हें कई तरीके से अपमानित किया गया, लेकिन आरसीपी सिंह ने वो जहर पी लिया. पार्टी का अगला कदम दिख रहा है. मुझे भी बिना 'कारण बताओ' नोटिस जारी किए हुए निकाल दिया गया. हमलोग छोटे कार्यकर्ता थे, लेकिन बड़े नेताओं को निकालने के लिए तो कोई ग्राउंड चाहिए न! तो ये घटिया ग्राउंड बनाया गया है."
2016 के हलफनामे में इन संपत्तियों का जिक्र क्यों नहीं? इस सवाल के जवाब में जीतेंद्र नीरज ने कहा, "यदि चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों का जिक्र नहीं है तो ये सवाल चुनाव आयोग उठाएगा न कि पार्टी उठाएगी? और हलफनामे में पति को अपनी पत्नी की संपत्तियों के बारे में जानकारी देनी होती है बालिग बच्चों की नहीं. इससे पता चलता है कि ये मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है."

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'आरसीपी पार्टी को नहीं देंगे जवाब'
जेडीयू की ओर से जारी 'कारण बताओ' नोटिस का जवाब देने के सवाल पर उनके समर्थक नेता ने दावा किया है कि वे इन लोगों के सामने तो अपना जवाब नहीं रखेंगे.
उन्होंने कहा, "ये लोग कौन होते हैं जिनके सामने वे अपना जवाब रखेंगे? पार्टी को तो पहले चाहिए था न कि उनसे इन आरोपों पर फोन से या मिलकर जवाब मांग लेते, लेकिन बिना उनका पक्ष जाने मीडिया के जरिए मामले को उठाया गया. उनसे कुछ भी नहीं पूछा गया."
हालांकि उन्होंने यह ज़रूर कहा कि यदि कोई सरकारी एजेंसी उनसे इस बारे में पूछताछ करेगी तो आरसीपी सिंह अपना पक्ष रखेंगे.
जीतेंद्र नीरज का दावा है कि ये सब कुछ नेताओं की पार्टी को कमजोर करने, उस पर कब्जा करने और उन्हें पार्टी से निकालने की सोची समझी साजिश है. लेकिन वे जब तक पार्टी में हैं लोग आंतरिक लोकतंत्र की लड़ाई लड़ते रहेंगे.
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