नीतीश कुमार को विपक्ष बना सकता है राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार- प्रेस रिव्यू

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राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज़ हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी पार्टियों के राष्ट्रपति उम्मीदवार हो सकते हैं. भारत में राष्ट्रपति का चुनाव जुलाई में होना है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. हालांकि नीतीश कुमार ने इन अटकलों को ख़ारिज कर दिया है.
द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बिहार की राजनीति में यह चर्चा गर्म है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने नीतीश कुमार को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने की संभावनाओं पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं से बैठकें शुरू कर दी हैं. प्रशांत किशोर नीतीश कुमार के विश्वासपात्र रहे हैं.
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द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, 21 फ़रवरी को दिल्ली में प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के साथ लंबी बैठक की थी. हालांकि दोनों ने इसे शिष्टाचार भेंट कहा था. इस महीने प्रशांत किशोर ने हैदराबाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री से भी मुलाक़ात की थी. इसके अलावा चंद्रशेखर राव की मुलाक़ात हैदराबाद में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव से भी हुई थी. तेजस्वी और केसीआर की मुलाक़ात को काफ़ी अहम माना जा रहा है.
इसके अलावा केसीआर ने हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार से भी मुलाक़ात की थी. कहा जा रहा है कि केसीआर समान विचारधारा वाली पार्टियों को बीजेपी के ख़िलाफ़ एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं.
द हिन्दू से बिहार कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ''शायद योजना यह है कि आरजेडी विपक्षी पार्टियों के राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर नीतीश कुमार का समर्थन करे और तेजस्वी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया जाए. लेकिन इसके लिए नीतीश कुमार को पहले बीजेपी से गठबंधन तोड़ना होगा. हालाँकि राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से इलेक्टोरल कॉलेज के ज़रिए होता है और इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य हिस्सा लेते हैं. मैं इस बात को लेकर निश्चित नहीं हूँ कि विपक्ष के पास इतना समर्थन है.''

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महाराष्ट्र के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने मुंबई में कहा है कि नीतीश कुमार के नाम पर तभी चर्चा हो सकती है जब वह पहले बीजेपी से गठबंधन तोड़ेंगे. नवाब मलिक ने कहा कि कोई भी फ़ैसला राजनीतिक पार्टियां सामूहिक रूप से ही लेंगी.
आरजेरडी नेता और विधायक शक्ति यादव ने कहा है कि अगर नीतीश कुमार को बीजेपी राष्ट्रपति बनाती है तो यह उनकी पार्टी के लिए ख़ुशी की बात होगी. हालाँकि जब नीतीश कुमार से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में कुछ सोचते भी नहीं हैं. नीतीश कुमार ने यह बात भागलपुर में मंगलवार को मीडिया से कही थी.
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टफ़ टाइम में टफ़ लीडर चाहिए होता है- मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बहराइच में मंगलवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा है दुनिया में हलचल है और भारत को मज़बूत रहने की ज़रूरत है. पीएम मोदी ने कहा कि न केवल अपने लिए बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टफ़ टाइम में टफ़ नेता की ज़रूरत होती है.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि पीएम मोदी ने यूक्रेन और रूस संकट का ज़िक्र किए बिना यह बात कही है, लेकिन उनका इशारा इसी तरफ़ था. प्रधानमंत्री मोदी ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले की सरकार आतंकवादियों से मुक़दमे वापस ले लेती थी.
पीएम मोदी ने कहा, ''जिन लोगों पर यूपी में कई बम धमाकों का आरोप था, ये लोग उन आतंकवादियों को जेल से रिहा करने का पक्का निर्णय करके बैठै थे. सपा सरकार आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के ख़िलाफ़ थी.
जो लोग देश की सुरक्षा को ताक पर रखते हैं, वो यूपी का कभी भला नहीं कर सकते.''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''जो यूपी के लोगों पर भय बनाकर बैठे थे, जिनकी वजह से माताएं-बहनें परेशान थीं, वो सब आज काबू में हैं. लेकिन अभी भी वो मौक़े की तलाश में हैं. ये अभी भी बदले का भाव लिए बैठे हैं. भाजपा सरकार के प्रयासों की वजह से अब उत्तर प्रदेश में डर का माहौल दूर हो रहा है.''

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यूक्रेन-रूस संकट से भारत की बढ़ी चिंता
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि रूस-यूक्रेन तनाव का असर अभी भारतीय व्यापार पर नहीं पड़ा है. लेकिन इस वैश्विक तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बढ़ती क़ीमत भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण है. हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है.
अख़बार के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद की मंगलवार को होने वाली बैठक में सभी वित्तीय नियामकों से रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनाव पर लगातार नज़र बनाए रखने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि कई वैश्विक वजहों से वित्तीय स्थिरता के मामले में यह कहना कठिन है कि आगे क्या होगा. कच्चे तेल की क़ीमत भी उन वजहों में से एक हैं जिसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. मंगलवार को कच्चे तेल की क़ीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के क़रीब पहुँच गई.
(कॉपी - रजनीश कुमार)

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