1 जुलाई: नए श्रम क़ानूनों से वेतन, कामकाजी घंटे और पेंशन पर कितना पड़ेगा असर?

नए श्रम क़ानून

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    • Author, पद्मा मीनाक्षी
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगू

भारत सरकार एक जुलाई, 2022 यानी शुक्रवार से नए श्रम क़ानूनों को लागू करने जा रही है. इसके तहत चार वर्गों में 29 क़ानूनों को लागू किया जाएगा.

इन 29 क़ानूनों में चार क़ानून वेतन और पारिश्रमिक वाले प्रावधानों से संबंधित हैं. नौ क़ानून सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों से और 13 क़ानून पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी सुविधाओं से जुड़े हैं. बाक़ी बचे तीन क़ानूनी प्रावधान उद्योग धंधों से संबंधित हैं.

सरकार का दावा है कि इन बदलावों से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कामगारों को फ़ायदा होगा. हालांकि कामगार यूनियन के नेताओं का कहना है कि इससे श्रमिकों का नुक़सान होगा.

वैसे ये बदलाव राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे. इन बदलावों के बाद आपके वेतन, कामकाजी घंटे और पेंशन की सुविधाओं पर क्या असर होगा, जानिए.

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वेतन

नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों के कुल वेतन का आधा हिस्सा यानी 50 प्रतिशत बेसिक वेतन होगा. इसके चलते, कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड में जाने वाली राशि में बढ़ोत्तरी होगी. श्रमिक यूनियन के नेताओं का कहना है कि इसके चलते निजी सेक्टर में काम करने वाले कामगारों को हर महीने कम वेतन मिलेगा.

वहीं सरकार का कहना है कि इसके चलते पेंशन फंड और ग्रैच्युटी में ज़्यादा रकम जमा होगी और सेवानिवृति के बाद लोगों को गुणवत्ता पूर्ण जीवनयापन में मदद मिलेगी.

इन प्रवाधानों में यह भी कहा गया है कि महिला और पुरुष कर्मचारियों को वेतन एकसमान होगा. कर्मचारियों के संगठन सीटू के राष्ट्रीय सचिव सिंधु ने बीबीसी से बताया कि इन बदलावों से केवल सरकार और नियोक्ताओं को फ़ायदा होगा, कर्मचारियों को नहीं.

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कामकाजी घंटे

नए प्रावधानों के प्रभाव में आने से कर्मचारियों के काम के घंटे बदल जाएंगे. अभी अधिकांश जगहों पर कर्मचारियों को आठ से नौ घंटे काम करने होते हैं. श्रमिक संगठन सीटू के आंध्र प्रदेश यूनिट के अध्यक्ष नरसिंग राव के मुताबिक़, नए प्रावधानों के तहत कामकाजी घंटे को 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है.

हैदराबाद स्थित फ़ाइनेंशियल एनालिस्ट के. नगेंद्र साई ने बताया, "लोगों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि प्रति सप्ताह कामकाजी घंटों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. नए प्रावधानों के तहत भी सप्ताह में 48 घंटे से ज़्यादा काम नहीं करना है.

अगर नियोक्ता प्रतिदिन 12 घंटे की ड्यूटी लगाएंगे तो उन्हें कर्मचारियों को सप्ताह में तीन अवकाश देने होंगे. ये 48 घंटे चार दिन में भी पूरे किए जा सकते हैं, पांच दिन में भी और छह दिन में भी. लेकिन इसका असर लोगों के निजी ज़िंदगी से लेकर कामकाजी ज़िंदगी पर ज़रूर पड़ेगा और संभव है कि कोई फ़ायदा भी नहीं हो."

श्रम क़ानूनों के सेक्शन 25 (1) में कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी स्थितियों की चर्चा है, जिसके तहत कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी को प्रतिदिन आठ घंटे से ज़्यादा काम नहीं लिया जा सकता. लेकिन सेक्शन 25 (1) (बी) के तहत कहा गया है कि नियोक्ता अपने कर्मचारी से एक दिन में 12 घंटे तक काम करा सकते हैं.

इसी तरह सेक्शन 26 (1) में कहा गया है कि कर्मचारियों को सप्ताह में छह दिन से अधिक काम नहीं लिया जा सकता. लेकिन सेक्शन 26 (2) में इस प्रावधानों में छूट देने का अधिकार सरकार को दिया गया है.

नए श्रम क़ानूनों के तहत अगर कर्मचारी को सप्ताहिक अवकाश नहीं दिया गया, तो इसके बदले उसे दो महीने के अंदर अवकाश दिया जा सकता है.

ओवर टाइम

ओवर टाइम

पहले के प्रावधानों के तहत कर्मचारी प्रति तिमाही 50 घंटे तक ओवर टाइम कर सकते थे. नए प्रावधानों के मुताबिक कर्मचारी तीन महीने में 125 घंटे तक ओवरटाइम कर सकते थे.

यूनियन के नेताओ का कहना है कि ओवर टाइम के घंटों को लेकर नए क़ानूनों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है.

हालांकि नियोक्ताओं या प्रबंधकों को पूरा अधिकार है कि वे अपने कर्मचारियों से ओवरटाइम करा सकें. श्रमिक नेता नरसिंग राव कहते हैं कि नए प्रावधानों में ओवरटाइम के भुगतान पर कुछ नहीं कहा गया है.

अवकाश

सालाना अवकाश लेने के लिए कर्मचारियों को अब 180 दिन तक काम करना होगा, पहले के प्रावधानों के तहत उन्हें 240 दिन काम करने होते थे. हालांकि कर्मचारियों के लिए अवकाश के दिनों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है.

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महिला कर्मचारी

सभी सेक्टर में महिलाओं को काम करने का अधिकार है. महिला कर्मचारी अपनी इच्छा से नाइट शिफ्ट भी कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए ज़रूरी सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं की व्यवस्था नियोक्ता को करनी होगी.

पेंशन फंड

भारत में अधिकांश संस्थाएं अपने कर्मचारियों के लिए बेसिक वेतन के 12 प्रतिशत हिस्से का योगदान पेंशन फंड में करती हैं. नए प्रावधानों के मुताबिक़ बेसिक वेतन बढ़ जाएगा.

फ़ाइनेंशियल एनालिस्ट के. नगेंद्र साई ने बताया, "कुल वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा बेसिक वेतन होने पर कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों की पेंशन फंड में हिस्सेदारी बढ़ जाएगा. इससे नियोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ेगा. हालांकि कर्मचारियों को सेवानिवृति के बाद फ़ायदा मिलेगा. पेंशन फंड में ज़्यादा राशि जमा होने से सरकार के पास पैसा ज़्यादा जमा होगा."

नए प्रावधानों के तहत ग्रैच्युटी की रकम भी ज़्यादा मिलेगी और नए प्रावधानों के तहत इसका आकलन किया जाएगा. ग्रैच्युटी के लिए न्यूतनम सेवा की शर्त को भी हटा दिया गया है.

यह फिक्स्ड टर्म के लिए नियुक्त कर्मचारियों को भी देने का प्रावधान किया गया है. इन कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों वाली सारी सुविधाएं मिलेंगी.

स्वास्थ्य बीमा

संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम के अस्पतालों और क्लिनिक में मुफ़्त इलाज मिलेगा. इन अस्पताल की शाखाएं ज़िला स्तर तक पर मौजूद हैं. ईएसआई और पीएफ के लिए एक यूनिवर्सल एकाउंट नंबर होगा जो आधार से लिंक होगा.

साड़ी की दुकान

फ़िक्स्ड टर्म की नौकरियां

इंडस्ट्रियल रिलेशन संबंधी प्रावाधनों के सेक्शन 2 के मुताबिक फ़िक्स्ड टर्म की नौकरियां क़ानूनी हैं. नियोक्ता तय समय के लिए कर्मचारी को रख सकेंगे और समय पूरा होने के बाद बिना किसी पूर्व नोटिस और मुआवजे के कर्मचारी को नौकरी से हटाया जा सकता है. एक साल तक काम करने की स्थिति में भी इन्हें ग्रैच्युटी मिलगी.

सीटू के राष्ट्रीय सचिव सिंधु ने कहा, "लेकिन अगर कंपनियां 11 महीने का अनुबंध करती है तो ग्रैच्युटी नहीं मिलेगी. नियोक्ता इसका फ़ायदा उठाएंगे."

नेशनल पोर्टल

सभी कर्मचारियों को नेशनल पोर्टल पर अपना पंजीयन कराना होगा. इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का फ़ायदा मिल पाएगा.

अगर कर्मचारी किसी दूसरे राज्य में काम कर रहा है तो उसे अपने गृह शहर में जाने के लिए साल में एक बार ट्रैवल एलाउंस देने का प्रावधान भी नए नियमों में किया गया है. सभी कर्मचारियों को नियोजन के संबंध में नियुक्त पत्र देने का प्रावधान भी जोड़ा गया है.

घर से काम करने की मंज़ूरी

नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने पर भी सहमति जतायी है. कोविड संक्रमण के दौरान कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दुनिया भर के नियोक्ताओं ने घर से काम करने की अनुमति दी है, इस अनुभव को देखते हुए ही इसे शामिल किया गया है. हालांकि इसके लिए नियोक्ता कुछ मूलभूत सिद्धांतों का पालन करना होगा.

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