पीएम मोदी के यूरोप दौरे में पत्रकारों के सवाल नहीं लेने पर आलोचना- प्रेस रिव्यू

प्रधानमंत्री मोदी

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इमेज कैप्शन, बर्लिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओलाफ़ शॉल्त्स

यूरोप दौरे पर मीडिया से सवाल न लेने और भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना शुरू हो गई है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द टेलिग्राफ' ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है.

अख़बार लिखता है कि साल 2015 के आख़िर से ही ये चलता आ रहा है कि प्रधानमंत्री पत्रकारों के सवाल लिए बिना सिर्फ़ अपने समकक्षों के साथ संयुक्त बयान जारी करते हैं. हालांकि, इस बार जर्मन ब्रॉडकास्टर डॉयचे वेले के चीफ़ इंटरनेशनल एडिटर रिचर्ड वॉकर ने ट्वीट के ज़रिए मोदी के जर्मनी दौरे को लेकर ये मुद्दा सबके सामने उठाया.

उन्होंने लिखा, "मोदी और शॉल्त्स बर्लिन में प्रेस को संबोधित करने वाले हैं. वे दोनों सरकारों के बीच 14 समझौतों का एलान करेंगे. वे भारतीय पक्ष के आग्रह पर एक भी सवाल नहीं लेंगे."

प्रेस की आज़ादी के मामले में भारत के आठ पायदान फिसलने को भी वॉकर ने हाइलाइट किया है.

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रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स (आरएसफ़) ने प्रेस आज़ादी के मामले में 180 देशों की सूची में भारत को 150वां स्थान दिया. पिछले साल भारत 142वें स्थान पर था.

'रिपोर्टर्स विदाउड बॉर्डर्स' (आरएसएफ़) की ओर से जारी ताज़ा रिपोर्ट में भारत प्रेस की आज़ादी के मामले में 142वें पायदान से फिसलकर 150वें स्थान पर पहुँच गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल को छोड़कर भारत के अन्य पड़ोसी देशों की रैंकिंग में भी गिरावट आई है, जिसमें पाकिस्तान 157वें, श्रीलंका 146वें, बांग्लादेश 162वें और म्यांमार 176वें स्थान पर पहुंच गए हैं.

ये रैंकिंग कुल 180 देशों की है. इस साल नॉर्वे (पहले) डेनमार्क (दूसरे), स्वीडन (तीसरे) एस्टोनिया (चौथे) और फ़िनलैंड (पाँचवें) स्थान पर हैं जबकि उत्तर कोरिया 180 देशों और क्षेत्रों की सूची में सबसे नीचे है.

रूस को इस रिपोर्ट में 155वें स्थान पर रखा गया है, जो पिछले साल 150वें स्थान से नीचे था जबकि चीन दो पायदान ऊपर चढ़ते हुए 175वें स्थान पर आ गया. पिछले साल चीन 177वें स्थान पर था.

अख़बार लिखता है कि मोदी के कार्यकाल में लंबे समय से विदेशी दौरों पर विमान में पत्रकारों को ले जाने की परंपरा को बंद कर दिया गया है. वहीं, नवंबर 2015 में पीएम मोदी के ब्रिटेन दौरे के बाद से विदेशी दौरों पर पत्रकारों के सवाल भी नहीं लिए जा रहे हैं. उस समय पीएम मोदी से भारत में बढ़ती कथित असहिष्णुता को लेकर सवाल किया गया था.

ये सवाल उत्तर प्रदेश के दादरी में बीफ़ रखने के शक में अख़लाक की मॉब लिंचिंग के कुछ हफ्तों बाद किया गया था.

अख़बार ने हाल ही में संपन्न हुए ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के भारत दौरे का भी उदाहरण दिया, जहाँ उन्होंने अकेले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

इससे पहले जब साल 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अहमदाबाद के दौरे पर आए थे, तब दूतावास ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद होटल में उनके लिए अलग से प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था.

मानवाधिकारों को लेकर विरोध प्रदर्शन

मंगलवार को जब डेनमार्क का शाही परिवार पीएम मोदी के लिए औपचारिक डिनर की मेज़बानी कर रहा था, उस समय 'द लंदन स्टोरी' नाम के एक डच थिंक टैंक से जुड़े मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कोपेनहेगन में अमालियनबोर्ग पैलेस के सामने विरोध स्वरूप खाली जूते रखे.

प्रेस आज़ादी

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इस थिंक टैंक ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर के बताया कि खाली जूते यूरोप में मोदी के ख़िलाफ बोलने वालों की कमी का प्रतीक है.

थिंक टैंक के साथ काम करने वाली अलीना केहल कहती हैं, "नॉर्डिक सरकारें ख़ुशी-ख़ुशी भारत में हो रहे अत्याचारों पर आंखें मूंदे हैं. उनके मिलने का एजेंडा सिर्फ क्लीन एनर्जी पर समझौता है. कितना बुरा हो सकता है? ये अस्वीकार्य है. मौन का अर्थ सहमति है."

राजीव गांधी हत्या केस में पेरारिवलन की रिहाई के मुद्दे पर सख़्त हुआ SC

राजीव गांधी

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या केस में उम्र क़ैद के तहत 36 साल जेल में काट चुके ए जी पेरारिवलन को रिहा करने के राज्य मंत्रिमंडल के फ़ैसले को मानने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल बाध्य हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजने के राज्यपाल के क़दम को ख़ारिज करते हुए कहा कि संविधान के ख़िलाफ़ कुछ हो रहा हो तो आंख मूंदकर नहीं रहा जा सकता.

अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार शीर्ष न्यायालय ने केंद्र की इस राय से सहमति नहीं जताई कि अदालत को इस विषय पर राष्ट्रपति का फैसला आने तक इंतजार करना चाहिए.

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने केंद्र से कहा कि राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत तमिलनाडु की मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई सलाह मानने के लिए बाध्य हैं. पीठ ने केंद्र को अगले हफ्ते तक जवाब देने का निर्देश दिया.

शीर्ष अदालत ने कहा, "हम उसे जेल से रिहा करने का आदेश देंगे क्योंकि आप मामले के गुणदोषों पर चर्चा करने को तैयार नहीं हैं. हम ऐसी किसी बात पर आंख नहीं मूंद सकते जो संविधान के खिलाफ हो. कानून से ऊपर कोई नहीं है."

उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि कानून की व्याख्या करने का काम हमारा है, राष्ट्रपति का नहीं."

पीठ ने कहा, "वो (पेरारिवलन) रिहा होना चाहता है क्योंकि 30 साल से अधिक समय वह जेल में बिता चुका है. हमने पहले भी उम्रकैद पाए कैदियों के पक्ष में फैसले सुनाए हैं जो 20 साल से अधिक सजा काट चुके हैं. अपराध कुछ भी हो, इस मामले में कोई भेदभाव नहीं हो सकता."

शीर्ष अदालत ने कहा, "उसने जेल में रहते हुए कई शैक्षणिक योग्यताएं हासिल की हैं. जेल में उसका आचरण अच्छा है. जेल में कई साल से रहते हुए उसे कई बीमारियां भी हो गयी हैं. हम आपसे उसकी रिहाई के लिए नहीं कह रहे. अगर आप इन पहलुओं पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं तो हम उसकी रिहाई का आदेश देने पर विचार करेंगे."

पेरारिवलन की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि हर बार राज्यपाल ने इस विषय पर फैसला नहीं करने का कोई न कोई 'बहाना' बना दिया.

शीर्ष अदालत ने पेरारिवलन को नौ मार्च को जमानत दी थी.

दिल्ली के सरकारी स्कूल में यौन उत्पीड़न का मामला

यौन हिंसा

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दिल्ली महिला आयोग ने बुधवार को कहा कि पूर्वी दिल्ली में सरकारी स्कूल की क्लास में एक अजनबी व्यक्ति कथित तौर पर घुसा और उसने दो नाबालिग बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न किया.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की ख़बर के अनुसार इस शख्स ने छात्रों के सामने कपड़े उतार कर पेशाब किया.

आयोग ने दावा किया कि जब छात्राओं ने इस मामले की जानकारी प्रिंसिपल और टीचर को दी तो उन्होंने चुप रहने और भूल जाने को कहा.

दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसने भजनपुरा में पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) के स्कूल में लड़कियों के यौन उत्पीड़न के संबंध में एक मामला दर्ज किया है. हालांकि, पुलिस ने घटना से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दी.

दिल्ली महिला आयोग ने इस संबंध में पुलिस और ईडीएमसी को एक नोटिस जारी किया है लेकिन क्लास में एक अजनबी के घुसने को लेकर नगर निगम के अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

निकाय के स्कूलों में कक्षा पांच तक के छात्र पढ़ते हैं. दिल्ली महिला आयोग ने 30 अप्रैल को जारी नोटिस में कहा कि स्कूल एसेम्ब्ली के बाद छात्र कक्षा में अपने शिक्षक का इंतज़ार कर रहे थे तभी एक अजनबी कक्षा में घुसा. नोटिस में कहा गया, "कथित तौर पर उसने एक बच्ची के कपड़े उतारे और उससे अश्लील शब्द कहे. इसके बाद वह दूसरी लड़की के पास गया और अपने कपड़े उतारे. इसके बाद अभियुक्त ने कक्षा का दरवाज़ा बंद कर दिया और छात्रों के सामने पेशाब किया."

आयोग ने कहा, "ये एक गंभीर मामला है और इस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए."

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्होंने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून (पॉक्सो) के तहत मामला दर्ज किया है और आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष दल बनाए गए हैं.

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